आंगनवाड़ी अब सिर्फ राशन केंद्र नहीं, गांव की नई सोशल यूनिट: 9वें पोषण माह से कितना बदलेगा जमीनी सिस्टम?

9वें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत वाराणसी से हो चुकी है, जिसकी थीम "हमारी आंगनवाड़ी हमारी जिम्मेदारी" है. इसका लक्ष्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल राशन वितरण स्थलों से बदलकर सामुदायिक सीखने के केंद्र बनाना है. जानिए कैसे ग्रामीण भागीदारी और नई पहलें आंगनवाड़ी मॉडल को मजबूत कर रही हैं.

9 सितंबर 2026 से वाराणसी से शुरू हुए 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का मुख्य थीम "हमारी आंगनवाड़ी हमारी जिम्मेदारी" रखा गया है. इसका मकसद देश के 13.99 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ टेक-होम राशन (THR) बांटने की जगह सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट और कम्युनिटी लर्निंग हब में बदलना है. पोषण माह 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा.

इस बार सरकार का फोकस इन 5 प्रमुख बिंदुओं पर

सामुदायिक जिम्मेदारी: आंगनवाड़ी मैनेजमेंट कमेटियों (AMC) के जरिए ग्रामीणों को सीधे केंद्र प्रबंधन से जोड़ना.

  • ताजा गर्म पका खाना (HCM): पोषण स्तर सुधारने के लिए प्रोटीन-युक्त दैनिक मेन्यू की बोर्ड पर स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित करना.
  • प्रारंभिक बाल शिक्षा (ECCE): 3 से 6 साल के बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास (माइलस्टोन) की निगरानी और स्थानीय प्राथमिक स्कूलों से जुड़ाव.
  • पोषण ट्रैकर से निगरानी: 8.94 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की डिजिटल ग्रोथ मॉनिटरिंग.
  • PMMVY के 10 साल: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का 100% कवरेज.

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जून 2026 में जारी नए दिशानिर्देशों के तहत हर केंद्र पर महिला-नेतृत्व वाली आंगनवाड़ी मैनेजमेंट कमेटी (AMC) को पुनर्गठित किया जा रहा है.

  • हॉट कुक्ड मील: बिहार और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में गैस सिलिंडर और हरी सब्जियों/दालों के बजट में देरी की वजह से सप्ताह के 6 दिन तय मेन्यू लागू करने में व्यवहारिक रुकावटें आती हैं.
  • ग्रोथ मॉनिटरिंग: डिजिटल 'पोषण ट्रैकर' ऐप पर देश भर के 7.2 करोड़ से अधिक बच्चों की लंबाई और वजन दर्ज करने का काम चल रहा है. हालांकि, दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी और पुराने मोबाइल हैंडसेट के कारण सेविकाओं को रियल-टाइम डेटा अपडेट में चुनौती आती है.

माता-पिता और गांव की भागीदारी से कितना बदल सकता है आंगनवाड़ी मॉडल

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: जब आंगनवाड़ी में SNP मेन्यू बोर्ड लगाए जा रहे हैं, तो अभिभावक स्वयं भोजन की गुणवत्ता की जांच कर सकेंगे.
  • अतिकुपोषित (SAM) बच्चों का समय पर इलाज: माताओं और वार्ड सदस्यों की सक्रियता से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान जल्द होती है और उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजा जा सकता है.

बिहार समेत राज्यों में आंगनवाड़ी को मजबूत करने के लिए आगे क्या जरूरी है

  • स्वयं के भवन और सुविधाएं: किराए के मकानों में चल रहे केंद्रों के स्थान पर पक्के भवन, बिजली और पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना.
  • रिक्त पदों की पूर्ति: बिहार और झारखंड में महिला पर्यवेक्षिका (Supervisors) और सीडीपीओ (CDPO) के खाली पड़े पदों को जल्द भरना.
  • वित्तीय स्वायत्तता: आंगनवाड़ी मैनेजमेंट कमेटियों को आकस्मिक खर्चों के लिए बजट का समय पर हस्तांतरण करना ताकि मरम्मत और सामग्री पूर्ति तुरंत हो सके.

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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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