Video : अमरावती के जिला महिला अस्पताल में भर्ती एक बच्ची के पिता तसलीम खान ने बताया कि रात करीब 3 बजे अचानक अस्पताल में भीषण आग लग गयी. उस समय सभी लोग सो रहे थे. आग की खबर मिलते ही डॉक्टर बच्चों को लेकर बाहर निकलने लगे. कुछ देर बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया. तसलीम ने बताया कि आग की सूचना फैलते ही अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
तसलीम ने कहा कि घटना के बारे में कुछ नहीं बता सकते हैं. आग जानबूझ के लगाई गई, ऐसा कुछ नहीं है. आग बहुत तेजी से फैली थी. जैसे खबर लगी सभी बचाने के लिए दौड़े.
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वेंटिलेटर पोर्ट में हुआ जोरदार विस्फोट
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने बताया कि घटना रात करीब 3:30 बजे हुई. शुरुआती जानकारी के अनुसार, एनआईसीयू में वेंटिलेटर पोर्ट में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद आग लग गयी. हादसे के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और छह नवजात बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
दोषी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई : स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि घटना की तकनीकी जांच करायी जायेगी, ताकि यह पता चल सके कि हादसा किस वजह से हुआ. जांच में यह भी देखा जायेगा कि अस्पताल में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या उपकरण, सामग्री या अनुमति से जुड़ी कोई गड़बड़ी थी. उन्होंने बताया कि सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के लिए फायर ऑडिट अनिवार्य किया गया है. जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.
मृतक नवजात के परिजनों को 5 लाख की मदद
एनआईसीयू में हुए आग हादसे को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिये हैं. उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जायेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले नवजात बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है. वहीं, घायल बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने का निर्देश अमरावती के जिला कलेक्टर को दिया गया है.
