राम मंदिर डोनेशन घोटाले पर बढ़ा बवालः याचिका के बाद CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

Allahabad High Court:अयोध्या के राम मंदिर के दान पेटी हुई कथित चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका के अधिवक्ता मोहित अशोक ने सरकार द्वारा गठित SIT पर गंभीर सवाल खड़े किए है. उन्होंने कहा कि इतने ज्वलंत और संगीन मामले को SIT जांच कराने के नाम पर लिपा -पोती किया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने राम मंदिर में हुई चोरी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट से CBI जांच की मांग की है.

llahabad High Court: अयोध्या के राम मंदिर प्रोजेक्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और चढ़ावा चोरी को लेकर मामला तूल पकड़ता ही जा रहा है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि 12 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की गई. उन्होंने कथित तौर पर दावा करते हुए बताया कि 8 जून को उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को राम मंदिर ट्रस्ट और दान पेटी में हुई कथित चोरी की सीबीआई (Central Bureau of Investigation) से जांच कराने के लिए ज्ञापन सौंपा गया.

रिटायर्ड जजों की समिति की घोषणा के बाद दाखिल हुई पीआईएल


अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि ज्ञापन के बाद 9 जून को ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्र ने बैठक की. इसके बाद 9 से 12 जून के बीच यह जानकारी सामने आई कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो रिटायर्ड जजों की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की जाएगी, जो पूरे मामले की जांच करेंगे. उन्होंने कहा कि इसी बीच मैंने 12 जून की शाम को मामले में जनहित याचिका ( Public Interest Litigation) दाखिल कर दी, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट ने जल्दबाजी में राज्य सरकार से संपर्क किया और SIT जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि सबसे पहली बात, SIT का कोई कानूनी आधार या कानूनी मान्यता नहीं है.

SIT जांच पर उठाए कानूनी सवाल

याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने SIT जांच की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि SIT का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है और न ही आम नागरिकों के लिए उससे संपर्क करने की कोई व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार दस्तावेजी साक्ष्य मांग रही है, तो उन्हें SIT के सामने पेश करने का माध्यम क्या है.

SIT जांच रिपोर्ट में देरी और पारदर्शिता पर सवाल


याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने SIT जांंच पर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई. इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

CBI जांच और CAG( Comptroller and Auditor General of India) ऑडिट की मांग


अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है. याचिका में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा विस्तृत ऑडिट कराने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की गई है.

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By Satyendra Giri

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