रूस के नेता एलेक्सी नवेलनी की मौत बनी रहस्य, खामोश की जा रही पुतिन विरोधी आवाज

ये नवलनी की हिम्मत हिम्मत ही कह सकते हैं कि वे स्वस्थ्य होते ही करीब पांच माह बाद वह 2021 में रूस वापस रूस लौट आये. लेकिन उनकी मुसीबत कम नहीं हुई और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया.

नेशनल कंटेंट सेल
बीते एक दशक से रूस के सबसे महत्वपूर्ण विपक्षी नेता रहे एलेक्सी नवेलनी की पिछले हफ्ते जेल में मौत हो गयी. नवेलनी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे मुखर विरोधियों में शुमार किया जाता था. राजनीति से प्रेरित एक मुकदमें में उन्हें 19 साल की जेल की सजा दी गयी थी. कुछ समय पहले उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश भी की गयी थी, लेकिन वह बच गये थे. उन्हें एयरलिफ्ट कर बर्लिन ले जाया गया, जहां उनका लंबा इलाज चला.

ये नवलनी की हिम्मत हिम्मत ही कह सकते हैं कि वे स्वस्थ्य होते ही करीब पांच माह बाद वह 2021 में रूस वापस रूस लौट आये. लेकिन उनकी मुसीबत कम नहीं हुई और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. उनकी गिरफ्तारी को लेकर देशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन रूसी सैन्यबलों ने सभी विरोध प्रदर्शनों को कुचल दिया. 2022 में नवेलनी को कथित तौर पर जेल की कोठरी से गायब कर दिया गया.

जब उनके समर्थक और अधिक भड़क गये तो जेल अधिकारियों ने सफाई दी कि उनकी जेल बदल दी गयी है. अगस्त, 2023 में एक कोर्ट ने उनकी पहले की सजा बढ़ाकर 19 साल कर दी. इसके बाद उन्हें रूस की सबसे खतरनाक जेल पीनल कॉलोनी जेल में शिफ्ट कर दिया गया. पुतिन प्रशासन के मुताबिक, दो दिन पहले ही यहां टहलने के दौरान वह बेहोश हो गये और उनकी मौत हो गयी. हालांकि उनकी मौत को लेकर रहस्य बनी हुई है.

अबतक इनकी हो चुकी है मौत, पूर्व डिप्टी पीएम भी नहीं बख्शे गये

  1. येवगेनी प्रिगोझिन : प्राइवेट आर्मी वैगनर के चीफ थे. अगस्त 2023 में प्लैन क्रैश में मौत हो गयी थी.
  2. एलेक्जेंडर लित्विने : लंदन में साल 2006 में जहर देकर मारा गया था. पुतिन ने इसकी सहमति दी थी.
  3. दिमित्री बाइकोव व पायोत्र वर्जिलोव : ये रूसी लेखक थे. क्रेमलिन विरोधी खबर पर जहर देकर मारे गये.
  4. अन्ना पोलिटकोव्स्काया : 2006 में रूस में मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें लिखने पर गोली मार दी गयी.
  5. अन्ना पोलितकोवस्काया : मानवाधिकारों के हनन पर रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार, 2006 को गोली मार हत्या.
  6. बोरिस बेरेजोव्स्की : 2013 में फंदे से लटकते पाये गये. क्रेमलिन के समर्थक थे, बाद में पुतिन के आलोचक बने.
  7. बोरिस नेम्तसोव : रूस के प्रमुख विपक्षी नेता व डिप्टी पीएम, 2015 में सेंट्रल मॉस्को में गोलियों से भून दिये गये.
  8. मिखाइल लेसिन : क्रेमलिन के समर्थक थे. 2015 में वॉशिंगटन डीसी के एक होटल के कमरे में मृत पाये गये.
  9. किरिल स्ट्रेमॉसोव : यूक्रेन के खेरासन प्रांत के डिप्टी गवर्नर थे, मौत एक रहस्यमयी कार हादसे में हुई थी.

मौत को मात देने में ये रहे कामयाब, अभी जेल में बंद

व्लादिमीर कारा मुर्जा
एक चर्चित पुतिन विरोधी कार्यकर्ता व्लादीमिर कारा मुर्जा को साल 2015 और 2017 में जहर दिये जाने का प्रयास किया गया था. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, एक जर्मन प्रयोगशाला ने उनमें पारा, तांबा, मैंगनीज और जस्ता का हाई लेवल पाया था. बाद में वे बचा लिये गये. इसी साल अप्रैल में मुर्जा को मॉस्को की एक अदालत ने देशद्रोह और अन्य अपराधों का दोषी पाया था और सजा सुनायी थी.

सर्गेई स्क्रिपल
पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल ने ब्रिटिश खुफिया को कई बड़े रहस्य बताये थे. सर्गेई स्क्रिपाल और उनकी बेटी यूलिया मार्च 2018 में कैथेड्रल शहर सैलिसबरी में एक शॉपिंग सेंटर के बाहर बेहोश पाये गये थे. ब्रिटिश अधिकारियों ने कहा, उन्हें नोविचोक जहर दिया गया था. ये जहर सबसे खतरनाक माना जाता है. हालांकि, दोनों बच गये थे. बाद में उन्हें जेल की सजा मिली. अयी ब्रिटेन में रह रहे हैं.

विक्टर युशचेंको
यूक्रेन के विपक्षी नेता विक्टर युशचेंको को 2004 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जहर दे दिया गया था. वे मॉस्को समर्थक प्रधानमंत्री विक्टर यानुकोविच के खिलाफ पश्चिम समर्थक टिकट पर चुनाव लड़े थे. यूक्रेनी सुरक्षा सेवाओं के अधिकारियों के साथ कीव के बाहर रात्रिभोज में उन्हें खाने में जहर दिया गया था. जहर के कारण उनका चेहरा और शरीर विकृत हो गया था. अभी ये जेल में बंद हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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