Agriculture: नकली और घटिया बीज बेचने वालों की खैर नहीं, सरकार ला रही है नया कानून

किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार सीड एक्ट 2026 लागू करने की तैयारी कर रही है. इस कानून से घटिया या नकली बीज पर रोकथाम लगाने में मदद मिलेगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी हो सकेगी.

By Anjani Kumar Singh | January 16, 2026 7:22 PM

Agriculture: नकली बीज की समस्या से किसानों को जल्द राहत मिल सकती है. किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार सीड एक्ट 2026 लागू करने की तैयारी कर रही है. नये कानून के तहत देश में बीज की ट्रेसिबिलिटी की व्यवस्था बनेगी और सरकार ऐसा सिस्टम तैयार करेगी जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस डीलर ने दिया और किसने बेचा. हर बीज पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही किसान यह जान सकेंगे कि बीज कहां से आया.

इस कानून से घटिया या नकली बीज पर रोकथाम लगाने में मदद मिलेगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी हो सकेगी. देश में बीज को लेकर वर्ष 1966 में कानून बनाया गया था. पुराने कानून में ना तकनीक थी न डेटा का ही उपयोग किया गया था. ऐसे में बदलते समय के साथ नया सीड कानून लाया जा रहा है जो ट्रेसिबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के सिद्धांत पर आधारित है ताकि भविष्य में कोई भी किसान ठगा न जाए.

बिना पंजीकरण के काम नहीं कर सकेंगी बीज कंपनियां


नये कानून के तहत सभी बीज कंपनी काे पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. पंजीकरण से पता चलेगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है. पंजीकृत कंपनियों की जानकारी उपलब्ध रहेगी और कोई भी अनधिकृत विक्रेता बीज नहीं बेच पाएगा. इससे बाजार में फर्जी कंपनियां खत्म होंगी और किसानों को सही बीज मिलेगा.नये कानून के तहत किसानों के परंपरागत बीजों पर कोई पाबंदी नहीं होगी. किसान अपने बीज बो सकते हैं, दूसरे किसान को बीज दे सकते हैं. स्थानीय स्तर पर जो परंपरागत बीज विनिमय की परंपरा है, वो जारी रहेगी. बीजों की गुणवत्ता पर अब किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. 

नये कानून में 30 लाख तक जुर्माना का प्रावधान

पुराने कानून के तहत घटिया बीज बेचने वाले पर सिर्फ 500 रुपये तक का जुर्माना था, जबकि नये कानून के तहत 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान होगा. अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो सजा का भी प्रावधान है. सीड एक्ट में तीनों स्तर पर प्रावधान किए गए हैं जैसे सार्वजनिक क्षेत्र (आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र), देसी कंपनियां जो उच्च गुणवत्ता के बीज बनाती हैं, विदेशी बीजों के लिए उचित मूल्यांकन की व्यवस्था होगी. विदेश से आने वाले बीज पूरी तरह जांच और मूल्यांकन के बाद ही स्वीकृत होंगे. सार्वजनिक और देसी निजी क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा ताकि किसानों तक अच्छे बीज पहुंच सकें. इस बारे में किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए देश के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को बीजों की गुणवत्ता, बीज चयन और शिकायत निवारण की जानकारी देने का काम करेंगे. नये कानून के तहत राज्यों के अधिकार पहले की तरह बने रहेंगे. 

शुक्रवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान नए सीड एक्ट 2026 की जानकारी देते हुए कहा कि जैसे ही ट्रेसिबिलिटी लागू होगी, नकली या खराब बीज की पहचान तुरंत हो जाएगी. इससे खराब बीज को बाजार में आने से रोकने में मदद मिलेगी और अगर ऐसा बीज आया तो दोषी तुरंत पकड़े जा सकेंगे. खराब बीज बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. नये कानून से किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.