पिछले सप्ताह ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने वाले अभिजीत दीपके ने कहा कि मंत्रियों और नेताओं को कम से कम एक दिन अपने बच्चों को गांव के सरकारी स्कूलों में भेजना चाहिए. इससे वे समझ सकेंगे कि ग्रामीण छात्रों को पढ़ाई के लिए किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. कई बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. अपने गृह जिले हिंगोली के लिम्बाला में पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने हिंगोली से लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर साफ जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल सुधर गए तो चुनाव लड़ने का मुद्दा ही नहीं बचेगा.
हिंगोली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर चर्चाओं के बारे में सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधार देती है, तो अभिजीत दीपके के पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचेगा.’’
दीपके ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार हो, क्योंकि अगर गरीबों के बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करेंगे तो इससे आज के नेताओं की अगली पीढ़ी को चुनाव जीतने में मदद नहीं मिलेगी.
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दीपके ने किया था वीडियो शेयर
अभिजीत दीपके ने इससे पहले गांव के एक जिला परिषद स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था. वीडियो में स्कूल के प्रधानाध्यापक के कथित तौर पर शराब के नशे में कक्षा में सोने का दावा किया गया था. दीपके के मुताबिक, शिकायत के बाद अधिकारियों ने मंगलवार को शिक्षक को निलंबित कर दिया. हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक स्कूल में नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो जाती, वह गांव नहीं छोड़ेंगे. दीपके ने बताया कि स्कूल में चार शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन फिलहाल केवल दो शिक्षक हैं. उन्होंने दो और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है. साथ ही, वह जल्द ही चार-पांच अन्य स्कूलों का भी दौरा करेंगे.
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