यूपी सरकार ने ठुकरायी ‘जल ट्रेन”, रेल मंत्री ने कहा, पानी पर राजनीति नहीं

लखनऊ : ‘प्यासे’ बुंदेलखण्ड की मदद के लिए केंद्र द्वारा ट्रेन के जरिये पानी के टैंकर भेजना उसके लिए फजीहत का सबब गया है. राज्य सरकार ने इस ‘मदद’ को ठुकराते हुए ट्रेन की बजाय 10 हजार खाली टैंकर भेजने का आग्रह किया है, ताकि बुंदेलखण्ड की जलराशियों से पानी लेकर संकटग्रस्त क्षेत्रों में भेजा […]

By Prabhat Khabar Print Desk | May 5, 2016 5:02 PM

लखनऊ : ‘प्यासे’ बुंदेलखण्ड की मदद के लिए केंद्र द्वारा ट्रेन के जरिये पानी के टैंकर भेजना उसके लिए फजीहत का सबब गया है. राज्य सरकार ने इस ‘मदद’ को ठुकराते हुए ट्रेन की बजाय 10 हजार खाली टैंकर भेजने का आग्रह किया है, ताकि बुंदेलखण्ड की जलराशियों से पानी लेकर संकटग्रस्त क्षेत्रों में भेजा जा सके. उधर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा " हम पानी पर राजनीति नहीं करना चाहते हैं, हम राज्य सरकारों को जिस भी तरह मदद पहुंचा सकते हैं, पहुंचायेंगे".

प्रदेश के जल संसाधन मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने केंद्र द्वारा सूखाग्रस्त बुंदेलखण्ड को राहत पहुंचाने के लिए पानी के टैंकरों वाली ट्रेन भेजे जाने पर तंज करते हुए कहा कि बिन मांगे भेजे गये इस पानी को रखने के लिए कोई जगह नहीं है.उन्होंने कहा ‘‘प्रदेश को बाहर से पानी मंगाने की जरुरत नहीं है. जब जरूरत होगी तो पानी मांगा जाएगा. कोई अगर इस तरह से पानी भेज देगा तो हम उसे कहां रखेंगे.’ इस बीच, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘ट्वीट’ किया कि उन्होंने केंद्र सरकार से पानी भरी ट्रेन के बजाय 10 हजार खाली टैंकर भेजने की गुजारिश की है ताकि बुंदेलखण्ड के जलसंसाधनों में उपलब्ध पानी को सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके.
उधर, मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी पानी भरी ट्रेन भेजे जाने को गैर जरुरी बताते हुए कहा ‘‘पानी की ऐसी दिक्कत नहीं है कि हमें बाहर से रेल से पानी मंगवाना पडे। हमने पानी के लिये प्रबन्ध किये हैं. हम मांग करेंगे कि खाली टैंकर भेजवाये जाएं। पानी की समस्या नहीं है, बस उसे पहुंचाने की समस्या है.’ दरअसल, बुंदेलखण्ड में व्याप्त जलसंकट के मद्देनजर केंद्र सरकार की तरफ से पानी से भरे 10 टैंकरों वाली एक ट्रेन कल इस सूखाग्रस्त क्षेत्र के झांसी जिले में भेजी गयी थी.
झांसी रेल मण्डल के वाणिज्य अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि ट्रेन कल झांसी पहुंच गयी थी लेकिन अभी तक उसे किसी स्थान पर भेजने के निर्देश नहीं मिलने पर रेलगाडी को यार्ड में खडा कर दिया गया है.बुंदेलखण्ड के ही महोबा जिले में वह ट्रेन भेजे जाने की तैयारियों की चर्चा के बारे में कंचन ने बताया कि महोबा के जिलाधिकारी ने अफसरों के साथ बातचीत में कहा है कि अभी उनके जिले में पानी की जरुरत नहीं है. जब आवश्यकता होगी तो पानी मांग लिया जाएगा.
भाजपा ने प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र की इस मदद को ठुकराये जाने को गैरजरुरी बताया है. पार्टी के प्रान्तीय प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार ने सूखाग्रस्त बुंदेलखण्ड के जख्मों पर मरहम लगाने के लिये एक कदम उठाया है. इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिये.उन्होंने सवाल किया कि अगर बुंदेलखण्ड में इतना ही पानी मौजूद है, और शासन तंत्र राहत पहुंचाने के लिये इतना ही गम्भीर है, तो वहां के लोग पानी के लिये इतना संघर्ष क्यों कर रहे हैं. बेहतर होता, अगर राज्य सरकार केंद्र की इस मदद को सियासत से उपर उठकर देख देखती.

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