भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार और विपक्ष में तना-तनी

नयी दिल्‍ली : भूमि अधिग्रहण बिल पर मोदर सरकार को विपक्ष की करारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. आज सदन में भी विपक्ष ने हर प्रकार से सरकार को घेरने का प्रयास किया. ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बिरेन्‍द्र सिंह ने विपक्ष के सवालों के जवाब में कहा कि कांग्रेस की ओर से लाये […]

नयी दिल्‍ली : भूमि अधिग्रहण बिल पर मोदर सरकार को विपक्ष की करारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. आज सदन में भी विपक्ष ने हर प्रकार से सरकार को घेरने का प्रयास किया. ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बिरेन्‍द्र सिंह ने विपक्ष के सवालों के जवाब में कहा कि कांग्रेस की ओर से लाये गये भूमि अधिग्रहण बिल में किसानों की आत्‍मा निकालने का काम किया गया था. मोदी सरकार किसानों में फिर से आत्‍मा डालने का काम कर रही है.

उन्‍होंने सरकार की ओर से दिये गये जवाब में कांग्रेस सहित विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. सिंह ने कहा कि किसानों के विकास के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में सुधार कर रही है. आजादी के 68 सालों में पांच दशक तक कांग्रेस ने देश पर राज किया. आजादी के बाद जीडीपी में कृषि का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक था, वही अब 15 प्रतिशत पर आ गया है. आजादी के बाद से कांग्रेस ने यही किया है कि किसानों को टुकड़े देते रहो ताकी वे मरे नहीं, लेकिन उन्‍हें आगे मत बढ़ने दो.

सिंह के भाषण के दौरान कई बार विपक्ष ने हंगामा किया और भाषण को रोकने का प्रयास किया. इसपर लोकसभा अध्‍यक्षा सुमित्रा महाजन ने बीच बचाव किया और फिर से कार्रवाई शुरू करवायी. महाजन ने कहा कि जब तक बिल पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती सभा का समय बढ़ाया जाता है. उन्‍होंने कहा कि जितनी भी भूमि अधिग्रहित होगी वह सरकारी कामों में लाया जायेगा. किसी भी अधिग्रहित जमीन का उपयोग गैरसरकारी संस्‍थाओं की स्‍थापना के लिए नहीं की जायेगी.

जिन पांच चिजों को जोड़ा गया है उसमें डिफेंस, उद्योग, गरीबों के लिए आवास, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और सोशल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर था. इसमें से सोशल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को निकाल दिया गया है ताकि यह ना लगे कि जमीन का उपयोग प्राइवेट संस्‍थानों की स्‍थापना के लिए की जायेगी. जमीन अधिग्रहित करने के पांच साल तक अगर उसपर काम नहीं किया गया तो वह जमीन किसान को वापस पर दी जायेगी. चाहे वह किसी भी कारण से विलंब हुआ हो.

किसानों को उनके जमीन का मुआवजा उसी समय उपलब्‍ध कराने का प्रयास होगा जिस समय से उनकी जमीन अधिग्रहित की जाएगी. एक प्रावधान किया गया है जिसके अनुसार अगर किसान की जमीन ले ली गयी है और उसपर काम शुरू हो गया है तो अगर प्रोजेक्‍ट ज्‍यादा लंबा समय के लिए होगा तो उतने समय तक इंतजार के ही जमीन उसके मालिक को वापस की जायेगी.

विधेयक के प्रावधानों को लेकर विपक्ष ने राजग सरकार पर बोला हमला

भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन लाने के लिए सरकार पर हमला बोलते हुए विपक्ष ने आज कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव में केवल कारपोरेट के हितों को ध्यान में रखा है. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और जनता दल एस के सदस्यों ने भूमि अधिग्रहण कानून में से सहमति उपबंध, उचित मुआवजा के अधिकार में से सामाजिक प्रभाव आकलन और पारदर्शिता प्रावधानों को हटाने के लिए सरकार की जमकर आलोचना की.

लोकसभा में इसके बदले सरकार की ओर से रखे गए भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनरव्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार संशोधन विधेयक 2015 को पारित कराने के लिए कल चर्चा शुरू हुई और इसे मत विभाजन के जरिए पारित कराया जा सकता है. कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कल की चर्चा को आगे बढाते हुए कहा, किसान विधेयक में सहमति और सामाजिक प्रभाव आकलन के उपबंध को चाहते थे लेकिन राजग सरकार ने कारपोरेट की आवाज सुनी और इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता.

जनता दल एस रिपीट एस प्रमुख एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौडा ने कहा कि सरकार को इस बात का डर है कि किसानों की मंजूरी हासिल करना मुश्किल होगा और इसलिए केंद्र ने उनसे मंजूरी लेने वाले उपबंध को ही हटा दिया है. शिरोमणि अकाली दल के रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों की मंजूरी को अनिवार्य बनाया जाए. उन्होंने कहा, इस बात की सावधानी बरती जाए कि केवल बंजर जमीन का अधिग्रहण हो न कि उपजाऊ जमीन का.

तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक लाकर भाजपा ने किसानों से किए गए अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों की ही धज्जियां उडा दी हैं. उन्होंने विधेयक को स्थायी समिति को भेजे जाने की मांग की. विधेयक का समर्थन करते हुए लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान ने कहा कि कृषि और उद्योग विकास के दो पहिये हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि किसी एक के कारण दूसरे का नुकसान नहीं हो.

उन्होंने उम्मीद जतायी कि राजग सरकार कोई जनविरोधी काम नहीं करेगी. भाजपा के भारतेन्द्र सिंह ने इस संबंध में महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों के माडलों को अपनाए जाने का सुझाव दिया और विधेयक को जन हितैषी बताया. इंडियन नेशनल लोकदल के दुष्यंत चौटाला ने विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया. उन्होंने व्यापक चर्चा के लिए इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की.

अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने विधेयक पर सरकार की ओर से पेश किये जाने वाले संशोधनों का स्वागत किया और कहा कि अधिग्रहित भूमि पर लगने वाली परियोजना में विस्थापित होने वाले परिवारों को भी शेयर के माध्यम से हिस्सेदार बनाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि नगर निकाय तथा अन्य इकाईयों की अतिरिक्त भूमि का इस्तेमाल परियोजनाओं की स्थापना के लिए किया जाना चाहिए.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के विजय कुमार हंसदक ने विधेयक को किसान और आदिवासियों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की और कहा कि इसे जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए. भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया ने विधेयक का समर्थन करते हुए विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह देश का और किसानों का विकास नहीं चाहता है.

तेलगू देशम पार्टी के थोटा नरसिंम्हन ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि रोजगार सृजन के लिए प्रयास किये जाने चाहिए. जदयू के संतोष कुमार ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसमें कई खामियां है और 2013 के कानून के मूल सिद्धांत को ही बदल दिया गया है.

उन्होंने भी इसे स्थायी समिति में भेजने की वकालत की. भाजपा के ओम बिडला ने इसे देश हित में और विकास के हित का कानून बताते हुए कहा कि इससे किसान खुशहाल होगा और विकास के नये रास्ते बनेंगे. इसी दल के पी पी चौधरी ने भी विधेयक का पूरा समर्थन

किसान लडेंगे महाभारत की लडाई : तृणमूल कांग्रेस

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार को आडे हाथ लेते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आज केंद्र की राजग सरकार को चेतावनी दी कि एक महाभारत कौरवों और पांडवों के बीच हुई थी और अब दूसरी महाभारत में किसान मैदान में उतरेगा. लोकसभा में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने भाजपा पर अपने चुनाव पूर्व घोषणापत्र से पलटने का आरोप लगाया जिसमें पार्टी ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखने का वादा किया था.

भाजपा के सदस्यों द्वारा टोकाटोकी किए जाने पर त्रिवेदी ने कहा, ‘यह लोकतंत्र है. आप चिल्ला कर मेरी आवाज नहीं दबा सकते.’ उन्होंने इसी क्रम में पौराणिक ग्रंथों रामायण और महाभारत का उद्धरण देते हुए कहा, ‘ना रावण की चली है, ना दुर्योधन की चली है. अहम किसी का नहीं चला है.’

महाभारत में कौरवों द्वारा पांडवों को सूत भर भी जमीन देने से इंकार करने का उद्धरण देते हुए कहा कि किसानों से उनकी जमीन छीनी जाएगी तो वे चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने कहा, ‘लडाई तो अब किसान लडेंगे.’ उन्होंने सत्तारुढ भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि वह विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजे और यही उसके हित में होगा.

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