20 July Sansad March : डॉ गीतांजलि आंग्मो ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा- "मैं निश्चित रूप से सोमवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन में पति का प्रतिनिधित्व करूंगी. हमने आज एक अर्जेंट याचिका दायर की क्योंकि अगर हमें आज शिफ्ट करने की अनुमति मिल जाती, तो हम मेदांता जा सकते थे और फिर कल सुबह तक विरोध स्थल पर पहुंच सकते थे. लेकिन हमें पता था कि वे इसकी अनुमति नहीं देंगे. मैं सोनम वांगचुक का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हूं, और मैं निश्चित रूप से कल मार्च में शामिल होऊंगी.
छात्रों और अभिभावकों को वांगचुक की पत्नी ने किया सतर्क
संसद मार्च में शामिल होने वाले सभी छात्रों और अभिभावकों को सतर्क करते हुए वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा- दो बातों का ध्यान रखें. पहला, आइए इस मार्च को पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करें. दूसरा, उन बुरे तत्वों से सावधान रहें जो इसमें बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं; आइए सतर्क रहें और उनके जाल में फंसने से बचें. गड़बड़ी पैदा करने या कार्यक्रम को अलग रंग देने की कोशिशें हो सकती हैं. सोनम उसी तरह उपवास जारी रखना चाहते थे जैसे वे पहले कर रहे थे. वे अपना उपवास जारी रखना चाहते हैं. वे उनसे तरल पदार्थ लेने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. हालांकि वे पानी पी रहे हैं."
स्वास्थ्य की चिंता एक दिखावा है : डॉ गीतांजलि
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कार्यकर्ता के स्वास्थ्य के प्रति केंद्र की चिंता को दिखावा करार दिया. उन्होंने दावा किया कि सरकार को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को संसद तक होने वाले मार्च में वांगचुक की उपस्थिति से डर है. सरकार को इस बात का डर था कि अगर सोनम अपना मार्च शुरू करते हैं, तो लाखों लोग उनका साथ देंगे. सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में. और वे इसे रोकने की कोशिश कर रहे थे.
दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी की याचिका को किया खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका को खारिज कर दिया. गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल से वांगचुक को तत्काल डिस्चार्ज और मेदांता अस्पताल में स्थानांतरण करने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं थे और उन्हें सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित करने के सरकार के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता. गीतांजलि ने आरोप लगाया था कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को जबरन जंतर-मंतर से हटा दिया गया था और उनकी सहमति के बिना उन्हें अस्पताल में रखा जा रहा है.
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