नई दिल्ली :बेहद गंभीर स्वभाव के जेटली को शेरो-शायरी का बहुत शौक था. बजट पेश करते समय उनका यह अंदाज देखने को मिला करता था. कई बार अपनी शायरी से उन्होंने विपक्ष को भी अपने निशाने पर लिया था.
2015 के बजट में दिखा अंदाज
कुछ तो फूल खिलाये हमने
और कुछ फूल खिलाने हैं
मुश्किल ये है बाग में
अब तक कांटे कई पुराने हैं
2016 में भी जारी रहा दौर
कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें
लहर-लहर तूफान मिलें और मौज-मौज मझधार हमें
फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको
इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें
2017 में जेटली ने यह सुनायी
इस मोड़ पर घबरा कर न थम जाइए आप
जो बात नयी है अपनाइए आप
डरते हैं क्यों नयी राह पर चलने से आप
हम आगे आगे चलते हैं आइए आप
