चंद्रयान-2 : तकनीकी गड़बड़ी के बाद 15 को प्रक्षेपण नहीं हुआ था
6-7 सितंबर को उतरेगा चंदा मामा पर
श्रीहरिकोटा : चांद पर भारत के दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 सोमवार को सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3-एम-1 के जरिये प्रक्षेपित किया जायेगा़ सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इसका प्रक्षेपण दोपहर बाद दो बज कर 43 मिनट पर किया जायेगा़ ‘चंद्रयान-2′ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां वह इसके अनछुए पहलुओं को जानने का प्रयास करेगा़ अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान 6-7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव की निर्धारित जगह पर उतरेगा़
इस मिशन की लागत 978 करोड़ रुपये है़ 15 जुलाई को तकनीकी गड़बड़ी के बाद इसका प्रक्षेपण रोक दिया गया था. दिग्गज वैज्ञानिकों ने इस कदम के लिए इसरो की प्रशंसा भी की थी, क्योंकि इस निर्णय से बड़ा हादसा टल गया.
तीन दिन पहले ही इसे प्रक्षेपित किये जाने की नयी तिथि की घोषणा की गयी थी. 11 साल पहले इसरो ने ‘चंद्रयान-1′ का प्रक्षेपण किया था़ दुनिया में अब तक केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपने यान उतारे हैं.
चांद पर पानी से लेकर खनिज तक की मिलेगी सूचना
चंद्रयान-2 की सफलता पर दुनिया की निगाहें हैं. चंद्रयान-1 ने विश्व को बताया था कि चांद पर पानी है़ अब चंद्रयान-2 वहां पानी की उपलब्धता पर ठोस जानकारी देगा़ यह अभियान चांद की सतह से जुड़ी चीजों की जानकारी देगा, मसलन चांद पर किस तरह की मिट्टी है, कौन-कौन से खनिज हैं और कितनी मात्रा में हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चांद के जिस हिस्से की पड़ताल का जिम्मा चंद्रयान-2 को मिला है, वह सौर व्यवस्था को समझने और पृथ्वी के विकास क्रम को जानने में भी मददगार हो सकता है़गड़बड़ी को ठीक कर लिया गया है. वैज्ञानिक चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में चंद्रयान-2 के लैंडर को उतारेंगे जहां अब तक कोई देश नहीं गया है.
– के सिवन, अध्यक्ष, इसरो
