एनडीए कार्यकाल में हुई भ्रष्‍ट जज की नियुक्ति,मनमोहन की भूमिका की होगी जांच

नयी दिल्‍ली : उच्‍चतम न्‍यायालाय के पूर्व मुख्‍य न्‍यायाधीश मार्कण्‍डेय काटजू के भ्रष्‍ट जज की नियुक्ति मामले में एक नया मोड़ आ गया है. काटजू ने जिस मद्रास हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति और प्रमोशन का आरोप यूपीए सरकार पर लगाया है,उस मामले में अब एनडीए सरकार भी लपेटे में आती नजर आ रही है. […]

नयी दिल्‍ली : उच्‍चतम न्‍यायालाय के पूर्व मुख्‍य न्‍यायाधीश मार्कण्‍डेय काटजू के भ्रष्‍ट जज की नियुक्ति मामले में एक नया मोड़ आ गया है. काटजू ने जिस मद्रास हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति और प्रमोशन का आरोप यूपीए सरकार पर लगाया है,उस मामले में अब एनडीए सरकार भी लपेटे में आती नजर आ रही है.

एक अहम खुलासे में पता लग रहा है कि भ्रष्‍ट जज की नियुक्ति एनडीए के कार्यकाल में हुई थी. सूत्रों के हवाले से खबर है कि तीन अप्रैल 2003 को ही जस्टिस अशोक कुमार को मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया था उस वक्त एनडीए की सरकार थी और सरकार को डीएमके का समर्थन था.

कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े जस्टिस काटजू के आरोपों में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका की जांच हो सकती है. हालांकि इस मामले में भाजपा नेता सुधांशु मित्तल का कहना है कि मद्रास हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति मामले में एनडीए सरकार कैसे कोई कटघरे में खड़ा कर सकता है. उन्‍होंने इस मामले में एनडीए को घसीटे जाने से नाराजगी व्‍यक्‍त की.

* क्‍या है मामला

उच्‍चतम न्‍यायालाय के पूर्व मुख्‍य न्‍यायाधीश मार्कण्‍डेय काटजू ने एक अखबार में खुलासा किया था कि मद्रास हाईकोर्ट में एक जज भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बावजूद न सिर्फ अपने पद पर बने रहे बल्कि हाईकोर्ट में एडिशनल जज बना और बाद में उसे स्थाई नियुक्ति भी मिल गई.

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