असम के शिवसागर में बाढ़ का कहर, बेजबरुआ बोले- 12 घंटे मौत के साए में तैरता रहा दीवान, बाढ़ ने उजाड़ दी पूरी जिंदगी

असम में बाढ़ से मची तबाही के बीच शिवसागर जिले से दिल दहला देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं. एक बुजुर्ग दंपति ने कैसे 12 घंटे तक पानी में तैरते दीवान पर बैठकर अपनी जान बचाई, और कैसे हजारों परिवार आज बेघर हैं.

असम की भीषण बाढ़ ने शिवसागर जिले में हजारों परिवारों की जिंदगी पलभर की प्रभावित कर दी. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मुकुल बेजबरुआ (70 वर्ष) और उनकी पत्नी बोंटी बेजबरुआ ने घर में घुसे तेज बहाव वाले पानी के बीच करीब 12 घंटे तक एक लकड़ी के दीवान पर बैठकर अपनी जान बचाई. प्रशासन ने अगले दिन नाव से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन उनका घर और वर्षों की जमा-पूंजी पूरी तरह तबाह हो गई.

12 घंटे दीवान बना जिंदगी का सहारा

मुकुल बेजबरुआ ने बताया कि 19 जुलाई की रात अचानक तेज बहाव के साथ पानी घर में घुस आया. फ्रिज, अलमारी और घर का सारा सामान बह गया. दोनों पति-पत्नी पुराने लकड़ी के दीवान पर बैठ गए, जो पानी में तैरता रहा और वही उनकी जिंदगी का सहारा बन गया. मोबाइल की बैटरी खत्म होने से उनका बाहरी दुनिया से संपर्क भी टूट गया.


बाढ़ का पानी उतरने के बाद जब दंपति घर लौटे तो वहां केवल कीचड़ और मलबा मिला. घर से दो ट्रक मलबा निकाला गया, फिर भी गाद की मोटी परत जमी रही. उन्होंने कहा कि 1992 से नाजिरा में रहने के दौरान मैंने कभी इतनी भयावह बाढ़ नहीं देखी. - 'सेवानिवृत्त प्रोफेसर मुकुल बेजबरुआ'

दो बेटियों संग मौत से भागीं मधुस्मिता

शिवसागर की ओएनजीसी कॉलोनी में रहने वाली मधुस्मिता बोरठाकुर भी अपनी नौ और 3 साल की बेटियों के साथ बाढ़ में फंस गईं. पति ड्यूटी पर थे, इसलिए उन्होंने हिम्मत जुटाई और खुली वैन में बैठकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचीं. कई दिन उन्होंने अपनी मित्र के घर में बिताए.

68 मौतें, 6 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

इस साल असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. पानी भले उतर रहा हो, लेकिन हजारों परिवारों के सामने अब घर दोबारा बसाने और सामान्य जिंदगी शुरू करने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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