नयी दिल्ली : यदि पेट्रोल व डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जायेगा, तो इनको टैक्स की 28% की सबसे ऊंची दर के तहत रखा जायेगा. इसके साथ इन वस्तुओं पर राज्य भी कुछ कर लगा सकेंगे. इस तरह इनकी खुदरा कीमतें मौजूदा स्तर के आस पास बनी रहेंगी. यह जानकारी जीएसटी काउंसिल के प्रमुख सदस्य व बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शुक्रवार को दी. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में यही व्यवस्था है.
राज्यों के राजस्व का करीब 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोलियम पदार्थों पर कर से ही मिलता है. हालांकि, इस मुद्दे पर सहमति बनाने में अभी कुछ वक्त लगेगा. काउंसिल ही इस पर अंतिम फैसला समय पर लेगी. काउंसिल की अगली बैठक 21 जुलाई को होगी. जीएसटी लागू होने के एक साल पूरा होने पर मोदी ने कहा कि जीएसटी भरने के लिए नया रिटर्न फार्म आने वाले महीनों में जारी कर दिया जायेगा. इससे कारोबारियों को जीएसटी भरना सरल होगा.
कीमतों में नहीं आयेगा ज्यादा फर्क
जीएसटी काउंिसल के प्रमुख सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पेट्रोल व डीजल को अभी फिलहाल आने वाले कुछ महीनों में जीएसटी में शामिल नहीं किया जायेगा. अभी पूरी ध्यान नयी रिटर्न व्यवस्था पर है. हालांकि, जीएसटी की उच्च दर और वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत करीब उतनी ही रहेगी, जो अभी केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों के वैट के बाद होती है.
घटेंगी सीमेंट, टीवी व फ्रीज की कीमतें !
मोदी ने कहा कि जीएसटी के तहत राजस्व वसूली स्थिर होने पर काउंसिल इसकी सबसे ऊंची दर में शामिल वस्तुओं की सूची को छोटा कर सकती है. संभावना है कि सीमेंट, रंग-रोगन, टीवी, फ्रीज जैसे उत्पादों पर जीएसटी रेट कम हो सकता है.
