जयंती पर विशेष: देश से सती प्रथा मिटाने वाले राजाराम मोहन राय के विचार आज भी हैं प्रासंगिक

आज हमारे देश के प्रसिद्ध समाज सुधारक राजा राम मोहन राय की जयंती है. राजा राम मोहन राय ने समाज में फैली विसंगतियों और धार्मिक रुढ़िवाद का विरोध किया था और ‘ब्रह्म समाज’ की नींव रखी थी. राजा राम मोहन राय ने तात्कालीन समाज में व्याप्त सती प्रथा का विरोध किया था और इस प्रथा […]

आज हमारे देश के प्रसिद्ध समाज सुधारक राजा राम मोहन राय की जयंती है. राजा राम मोहन राय ने समाज में फैली विसंगतियों और धार्मिक रुढ़िवाद का विरोध किया था और ‘ब्रह्म समाज’ की नींव रखी थी. राजा राम मोहन राय ने तात्कालीन समाज में व्याप्त सती प्रथा का विरोध किया था और इस प्रथा को समाज से हटाने में अहम भूमिका निभाई थी.

राजा राममोहन राय का जन्म बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में 1772 में हुआ था. इनके पिता वैष्णव थे जबकि माता शाक्त. इन्होंने बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फारसी भाषा की शिक्षा ली थी.
राजा राममोहन राय ने ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्जीन’, ‘संवाद कौमुदी’, मिरात-उल-अखबार, बंगदूत जैसे अखबारों का संपादन व प्रकाशन किया था. इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी और अपने पत्र के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ कई आलेख लिखे थे. आज गूगल ने इस प्रसिद्ध समाज सुधारक के सम्मान में डूडल भी बनाया है.

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