नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम से यह पता करने को कहा है कि उनके चार सालों के शासन के दौरान कितनी नौकरियां पैदा हुई हैं. इसका जवाब साल 2019 के आम चुनाव के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालयों से कहा गया है कि वह एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें, जिससे यह पता चल सके कि मंत्रालयों द्वारा चलाये गये प्रोजेक्ट और कार्यक्रमों से कितने लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं और उनके कार्यक्रमों का जीडीपी पर क्या प्रभाव पड़ा. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर 26 मई को चार साल पूरे कर लेंगे.
हो सकता है आंकड़े सटीक न हों : हालांकि अधिकारियों की मानें तो इसके पीछे बताये जा सकने वाले आंकड़े और गणतीय सबूत जुटाने की मंशा है.
लेकिन संभव है कि ये आंकड़े पूरी तरह से सही न हों, क्योंकि सभी मंत्रालयों के आंकड़ों की ठीक-ठीक गणना करना आसान नहीं है.
टॉप पांच जिलों की सूची तैयार करें
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया, इस रिपोर्ट को तैयार करवाने का सरकार का मकसद उस नजरिये को बदलना है, जिसमें यह माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी हर साल एक करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा पूरा नहीं कर पा रहे हैं. अगर वे 2014 की ऐतिहासिक सफलता को दोहराना चाहते हैं तो ये आंकड़े निर्णायक साबित हो सकते हैं.
रोजगार निर्माण मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने अपने मंत्रालय के साथियों से उन टॉप पांच जिलों की सूची बनाने को भी कहा है, जिन्हें सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा है. इसके अलावा लोगों की जीवनशैली में आये बदलावों का भी अध्ययन करने को कहा गया है.
अप्रैल में गिरी बेरोजगारी दर
मीडिया रिपोर्ट में मुंबई स्थित बिजनेस इन्फर्मेशन कंपनी के हवाले से रोजगार के आंकड़े दिये गये. इसमें बताया गया कि 15 महीने तक 6.23 फीसदी पर रहने वाली बेरोजगारी दर अप्रैल महीने में 0.37 फीसदी गिरकर 5.86 पर आ गयी है.
