जयनगर. स्थानीय मस्जिद मुहल्ला में सिरत-ए-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस जलसा का आयोजन किया गया. अध्यक्षता मुफ्ती अमीरुद्दीन मिस्बाही ने की, संचालन शाहिद इकबाली ने किया. मुख्य वक्ता हजरत अल्लामा मौलाना गुलाम आसी कलकत्वी ने अपने संबोधन में कहा कि सीरत-ए-मुस्तफा हर दौर और हर इंसान के लिए रहनुमा है. उन्होंने बताया कि असल पैग़ाम-ए-मुस्तफा यह है कि मुसलमान अपनी जिंदगी में तालीम, पर्दे की हिफाज़त, मां-बाप के हुकूक की अदायगी और रसूल-ए-पाक से सच्ची मोहब्बत को शामिल करें. उन्होंने कहा कि कौम की तरक्की तालीम से ही मुमकिन है. बेटियों को भी पर्दे की पाबंदी के साथ इल्म हासिल करना चाहिये. मां-बाप के हुकूक अदायगी करना और उनकी खिदमत करना हमारी जिम्मेदारी है और रसूल-ए-पाक से मोहब्बत का मतलब सिर्फ जज्बात नहीं, बल्कि उनकी सीरत को अमल में लाना है. मौके पर मौलाना शाहनवाज, मौलाना गुलाम सरवर, हाफिज जियाउल मुस्तफा समेत अन्य उलमा-ए-कराम ने भी अपने विचार रखे और लोगों से सीरत-ए-नबी पर अमल करने की अपील की. जलसे में गुलजार नूरानी और शम्स रज़ा शम्स ने नात-ए-पाक पेश कर समां बांध दिया.
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