साहिबगंज
भक्तों ने नवरात्र के चौथे दिन गुरुवार को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की. पंडित जगदीश प्रसाद शर्मा के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी हंसी से संपूर्ण ब्रह्मांड को उत्पन्न किया है. इस कारण इन्हें कुष्मांडा देवी कहा गया. कुम्हड़े की बलि प्रिय होने के कारण इन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है. सूर्यमंडल के भीतर निवास करने वाली कुष्मांडा देवी की कांति सूर्य के समान दैदीप्यमान हैं. मान्यता है कि इन्हीं के तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं. आठ भुजाओं के कारण इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. शहर के तालबन्ना, बनिया पट्टी दहला, चौक बाजार, बंगाली टोला, नॉर्थ कॉलोनी, कुलीपाड़ा, पुरानी साहिबगंज, साक्षरता चौक, जिरवाबाड़ी थाना, सुभाष कॉलोनी, झरना कॉलोनी, साउथ कॉलोनी, गोड़ाबाड़ी हाट में स्थापित प्रतिमा स्थल में पूजा-अर्चना की गयी. वहीं बोरियो प्रतिनिधि के अनुसार, पुराना दुर्गा मंदिर व तेली टोला स्थित दुर्गा मंदिर में भी मां कुष्मांडा की पूजा हुई. मंडरो प्रतिनिधि के अनुसार, प्रखंड अंतर्गत मंडरो, भगैया एवं मिर्जाचौकी के आसपास के क्षेत्रों में मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की गयी.
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