राष्ट्रकवि के साथ ही सामाजिक व मानव चेतना के भी कवि हैं दिनकर : प्रो. सावित्री

पूर्णिया कॉलेज के दिनकर स्मृति कक्ष में विचार गोष्ठी आयोजित

– पूर्णिया कॉलेज के दिनकर स्मृति कक्ष में विचार गोष्ठी आयोजित पूर्णिया. पूर्णिया कॉलेज में फणीश्वर नाथ रेणु पुस्तकालय के रश्मिरथी के रचनास्थल पर दिनकर स्मृति कक्ष में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर पर विचार गोष्ठी आयोजित हुई. विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पूर्णिया कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रो. सावित्री सिंह ने कहा कि सिर्फ कवि दिनकरजी राष्ट्रीय कवि ही नहीं बल्कि सामाजिक तथा मानव चेतना के भी कवि हैं. कुरुक्षेत्र पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि युद्ध और शांति के बीच द्वंद्व का संदेश है कुरुक्षेत्र. प्रोफेसर डॉ. शंभू लाल वर्मा ने कहा दिनकरजी सच्चे अर्थों में सूर्य हैं तथा ये संक्रमण काल के कवि हैं. उन्होंने कविता पाठ किया. डॉ सीके मिश्रा ने कहा कि इनकी साहित्य श्रृंगार तथा वीर रस के साथ राजनीति से भी ओतप्रोत है. उर्वशी के प्रथम तथा तृतीय सर्ग का वर्णन किया. सच है विपत्ति जब आती है कविता का पाठ करके कार्यक्रम को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया. डॉ अंकिता विश्वकर्मा ने कहा कि दिनकर के साहित्य तथा संस्कृति के चार अध्याय का अध्ययन कर हम भारतीय संस्कृति को जान सकेंगें. डॉ मनीष ने रश्मिरथी पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके साहित्य से राजनीति को समझा जा सकता है. कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीता कुमारी ने किया. इस मौके पर डॉ ए खान, डॉ रमन गुंजन, प्रो अमृता सिंह, सुमी दत्ता थे. छात्र-छात्रा प्रतिभा, किरण, आरती, स्वाति, दीपक ने विचार तथा कविता पाठ प्रस्तुत किया. शिक्षकेत्तर कर्मचारी दिव्यांशु, जगदीश एवं छात्र-छात्रा सत्य, प्रेम, बबली, शिवानी, आरती, रंजन आदि उपस्थित थे.

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By Abhishek Bhaskar

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