बेटी बड़ी हो रही है? गुड टच -बैड टच के साथ ये बातें भी जरूर सिखाएं

Good Touch And Bad Touch: सिर्फ गुड टच-बैड टच काफी नहीं. अपनी बेटी को सुरक्षित रखने के लिए ये 3 खास बातें जरूर सिखाएं. जानें कैसे.

Good Touch And Bad Touch: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी हमेशा सुरक्षित रहे और पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े. इसके लिए सिर्फ पढ़ाई या अच्छी परवरिश ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही बातें सिखाना भी जरूरी है. जब बच्चियां छोटी उम्र से ही अपनी सुरक्षा से जुड़ी बातें समझने लगती हैं, तो वे कई मुश्किल हालात में सही फैसला लेने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 3 जरूरी बातें, जो हर माता-पिता को अपनी बेटी को जरूर सिखानी चाहिए.

सुरक्षित और असुरक्षित माहौल की पहचान करना सिखाएं

बेटी से खुलकर बात करें और उसे समझाएं कि कौन-सी जगह और कौन-से लोग भरोसेमंद हो सकते हैं और किन हालात में सावधान रहने की जरूरत होती है. अगर कभी उसे असहज महसूस हो, तो वह तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े, माता-पिता, शिक्षक या पुलिस से मदद मांगे. साथ ही उसे घर का पता और माता-पिता का फोन नंबर भी याद होना चाहिए.

ऑनलाइन दुनिया में भी सावधानी जरूरी है

आज बच्चे भी मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए उन्हें यह समझाना जरूरी है कि किसी अनजान व्यक्ति से बात न करें और अपनी फोटो, वीडियो या कोई भी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें. अगर कोई ऑनलाइन ऐसी बात करे जिससे वह असहज महसूस करे, तो तुरंत घर में बताएं.

बेटी को खुलकर अपनी बात कहना सिखाएं

बेटी को बताएं कि अगर कभी किसी की कोई बात या हरकत उसे ठीक न लगे, तो उसे उसे छिपाना नहीं है. वह तुरंत मम्मी-पापा या किसी भरोसेमंद बड़े को बता दे. साथ ही उसे यह भी समझाएं कि उसकी बॉडी उसकी अपनी है और उसकी मर्जी के बिना कोई उसे छू नहीं सकता. सबसे जरूरी बात, उसे हमेशा यह एहसास दिलाएं कि घर वाले उसकी हर बात सुनेंगे और हर समय उसके साथ खड़े रहेंगे.

गलत लगे तो चुप न रहें

बेटी को हमेशा यह सिखाएं कि अगर कोई बात उसे ठीक न लगे या किसी की वजह से डर या असहज महसूस हो, तो वह चुप न रहे. उसे खुलकर अपनी बात कहने की आदत डालें. जब बच्चों को यह भरोसा होता है कि परिवार हर समय उनके साथ है, तो वे अपनी बात बिना डर के बता पाते हैं.

माता-पिता का साथ सबसे जरूरी है

बच्चों की सेफ्टी सिर्फ नियम बनाने से नहीं होती, बल्कि रोज उनसे प्यार से बात करने, उनकी बातें सुनने और उन पर भरोसा करने से भी होती है. जितना खुला रिश्ता माता-पिता और बच्चों के बीच होगा, उतना ही बच्चा हर बात बिना झिझक अपने परिवार से साझा कर पाएगा.

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Published by: Anushka Singh

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