Vastu Tips for Flat: फ्लैट खरीदना आजकल एक बड़ा फैसला है. जगह, बजट और सुविधाओं के साथ कई लोग वास्तु का भी ध्यान रखते हैं. वास्तु विशेषज्ञ बाबा बिमलेश के अनुसार, फ्लैट लेते समय सिर्फ दिशा और मेन गेट ही नहीं, बल्कि किस फ्लोर पर घर है, यह भी देखा जा सकता है. अगर आप भी नया फ्लैट लेने का प्लान बना रहे हैं और ग्राउंड, पहली या ऊपरी मंजिल को लेकर कंफ्यूज हैं, तो वास्तु से जुड़ी इन आसान मान्यताओं को समझ लें.
फ्लैट के फ्लोर का वास्तु में क्या कनेक्शन है?
वास्तु में घर के आसपास के माहौल और पांच तत्वों को महत्व दिया जाता है. ये हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश. मान्यता है कि फ्लोर बदलने के साथ घर में हवा, रोशनी और खुलेपन का अनुभव भी बदलता है. इसी वजह से अलग-अलग मंजिलों को अलग तरह से देखा जाता है.
ग्राउंड फ्लोर को माना जाता है स्थिर
ग्राउंड फ्लोर जमीन के सबसे पास होता है. इसलिए इसे स्थिरता और मजबूत आधार से जोड़ा जाता है. अगर आपको शांत और स्थिर माहौल पसंद है, तो यह फ्लोर आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है.
पहली से तीसरी मंजिल क्यों है खास?
वास्तु की मान्यताओं में पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल को काफी संतुलित माना जाता है. इन फ्लोर पर जमीन से जुड़ाव भी रहता है और हवा-रोशनी भी ठीक मिल सकती है. इसलिए इन्हें घर के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है.
चौथी मंजिल से ऊपर कैसा है माहौल?
ऊंचे फ्लोर पर हवा और खुला आसमान ज्यादा मिलता है. वास्तु में ऐसी मंजिलों को वायु और आकाश तत्व से जोड़ा जाता है. अगर फ्लैट में अच्छी रोशनी और हवा आती है, तो यह भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
क्या टॉप फ्लोर लेना शुभ है?
टॉप फ्लोर को सिर्फ ऊंचाई की वजह से अशुभ नहीं माना जाता. फ्लैट की दिशा, मेन गेट और घर के अंदर कमरों की जगह भी काफी मायने रखती है. ये चीजें सही हों, तो टॉप फ्लोर भी चुना जा सकता है.
किस दिशा का फ्लैट चुनें?
पूर्व दिशा: इसे नई शुरुआत और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है.
उत्तर दिशा: वास्तु में इसे धन और नए अवसरों से जुड़ी दिशा माना जाता है.
पश्चिम दिशा: इसे स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है.
दक्षिण दिशा: सही वास्तु व्यवस्था होने पर इसे भी चुना जा सकता है.
मेन गेट की दिशा भी देखें
फ्लैट लेते समय मेन गेट की दिशा पर भी नजर डालें. वास्तु की मान्यताओं में उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा के प्रवेश द्वार को अच्छा माना जाता है. साथ ही गेट के आसपास साफ-सफाई और पर्याप्त रोशनी रखना भी बेहतर माना जाता है.
तो कौन-सा फ्लोर चुनें?
अगर सिर्फ वास्तु की मान्यताओं की बात करें, तो पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल को संतुलित विकल्प माना जाता है. ग्राउंड फ्लोर को स्थिरता, जबकि ऊपरी मंजिलों को खुले माहौल से जोड़ा जाता है. हालांकि फ्लैट लेते समय अपनी जरूरत, बजट, हवा और रोशनी जैसी चीजों को भी जरूर देखें.
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