Vastu Significance of Alta in Navratri: नवरात्रि का समय देवी शक्ति की उपासना का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है. इस दौरान कई पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जिनमें पैरों में आलता (लाल रंग) लगाना भी शामिल है. ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ डॉ. जय मदान के अनुसार आलता केवल शृंगार का सामान नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी आध्यात्मिक और पारंपरिक मान्यताएं जुड़ी हैं. सही तरीके से और सही दिन पर लगाया गया आलता जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि ला सकता है. जानिए नवरात्रि में आलता लगाने से कैसे आती है सकारात्मक ऊर्जा.
वास्तु एक्सपर्ट से जानें नवरात्रि में आलता लगाने के फायदे और सही तरीका (Vastu Significance of Alta in Navratri)
- वास्तु विशेषज्ञ डॉ. जय मदान के अनुसार पैरों में आलता लगाने से रूट चक्र मजबूत होता है. इससे डर, असुरक्षा और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाएं कम होती हैं और व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर महसूस करता है.
- पुराने समय में आलता का इस्तेमाल सिर्फ सजने के लिए नहीं बल्कि घाव भरने के लिए भी किया जाता था. माना जाता है कि इसमें ऐसे गुण होते थे जो त्वचा को आराम देने में मदद करते थे.
- हाथों पर आलता लगाना शक्ति, चेतना और देवी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यह देवी की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का संकेत है.
वास्तु के अनुसार इस तरह लगाएं आलता
आलता लगाते समय पैरों पर एक खास पैटर्न बनाना शुभ माना जाता है.
- पैरों के बीच में एक बिंदु बनाएं.
- उसके आसपास 9 छोटे बिंदु बनाएं
ये 9 बिंदु जीवन की नौ भावनाओं और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं.
मंगलवार और शुक्रवार को लगाना है सबसे शुभ
आलता लगाने के लिए मंगलवार और शुक्रवार सबसे अच्छे दिन माने जाते हैं.
- मंगलवार को लगाने से मंगल ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
- शुक्रवार को लगाने से शुक्र ग्रह की कृपा मिलती है.
आलता में क्या मिलाकर लगाना चाहिए?
डॉ. जय मदान के अनुसार अगर शुक्रवार को आलता में गुलाब के इत्र की 2 बूंद मिला दी जाए, तो इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है.
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