दशहरे पर रावण के पुतले नहीं जलते, बल्कि होती है पूजा! ये 4 जगहें हैं अनोखी

दशहरे पर जहां देशभर में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं भारत की कुछ जगहों पर यह परंपरा बिल्कुल अलग है. कहीं रावण को शिव भक्त माना जाता है, तो कहीं दामाद का सम्मान मिलता है. जानें ऐसी 4 अनोखी जगहों की दिलचस्प मान्यताएं.

दशहरा आते ही देश के ज्यादातर हिस्सों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां दशहरे की परंपरा बिल्कुल अलग है. कहीं रावण को शिव भक्त मानकर सम्मान दिया जाता है, तो कहीं उसे दामाद का दर्जा मिला हुआ है. आइए जानते हैं ऐसी ही अनोखी जगहों के बारे में.

1. बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा जिले का बैजनाथ अपनी अनोखी दशहरा परंपरा के लिए जाना जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, रावण ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से उसे शिव का बड़ा भक्त माना जाता है. यहां आम जगहों की तरह रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है. बैजनाथ का प्राचीन शिव मंदिर भी रावण से जुड़ी इस लोककथा के लिए प्रसिद्ध है.

2. बिसरख, उत्तर प्रदेश

ग्रेटर नोएडा के पास स्थित बिसरख गांव को रावण से जोड़कर देखा जाता है. यहां की मान्यता के अनुसार रावण का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ था. इसलिए स्थानीय लोगों में उसके प्रति अलग तरह की धार्मिक आस्था देखने को मिलती है. यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा किए जाने की परंपरा बताई जाती है.

3. मंदसौर, मध्य प्रदेश

मंदसौर में रावण को लेकर एक खास मान्यता है. कहा जाता है कि यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था. इसी वजह से यहां रावण को ‘जमाई राजा’ का सम्मान दिया जाता है. खानपुरा इलाके में रावण की प्रतिमा की पूजा की जाती है और कुछ स्थानीय महिलाएं आज भी उसके सामने से गुजरते समय घूंघट करती हैं.

4. बस्तर, छत्तीसगढ़

बस्तर का दशहरा देश के बाकी हिस्सों से काफी अलग है. यहां दशहरा राम और रावण के युद्ध पर आधारित नहीं है. करीब 600 साल पुरानी इस परंपरा में मां दंतेश्वरी, स्थानीय देवी-देवताओं, आदिवासी संस्कृति और सामुदायिक रस्मों का खास महत्व है. यहां रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है.

अलग हैं मान्यताएं, खास है भारत

इन जगहों की परंपराएं बताती हैं कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में रामायण और दशहरे से जुड़ी मान्यताएं एक जैसी नहीं हैं. कहीं रावण को शिव भक्त के रूप में देखा जाता है, तो कहीं स्थानीय लोकविश्वासों के कारण उसे सम्मान दिया जाता है. यही विविधता भारत की लोकसंस्कृति को खास बनाती है.

यह भी पढ़ें: मुसीबत में बच्चों को बचाएंगे ये 5 ‘सेफ्टी वाले झूठ’, पैरेंट्स जरूर सिखाएं

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By पुष्पांजलि

मेरा नाम पुष्पांजलि है. मैं पिछले 2.5 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रही हूं. इस दौरान मैंने मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ, फैशन, ब्यूटी और होम टिप्स से जुड़े कंटेंट पर काम किया है. मुझे ऐसे आर्टिकल लिखना पसंद है जो आसान भाषा में हों और पाठकों के लिए उपयोगी भी हों. मैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर रिसर्च करके SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करती हूं. इसके साथ ही आकर्षक हेडलाइन लिखना, सही जानकारी जुटाना और डिजिटल ऑडियंस की पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करना मेरी प्रमुख जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा है. मैं हमेशा नई चीजें सीखने और अपने लेखन को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. मेरा उद्देश्य ऐसा कंटेंट तैयार करना है जो लोगों तक सही जानकारी सरल और दिलचस्प तरीके से पहुंचाए.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >