Tropical Weather Transition: मौसम काफी तेजी से बदल रहा है, कभी तेज गर्मी तो कभी बढ़ती ह्यूमिडिटी, और इसी के साथ बढ़ रही हैं डिहाइड्रेशन और इंफेक्शन जैसी परेशानियां. कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि सिर्फ ज्यादा पसीना आना भी शरीर के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में सही हाइड्रेशन, सही डाइट और सही लाइफस्टाइल बेहद जरूरी हो जाती है. इनसे जुड़ी जरूरी सवालों पर बात करने के लिए प्रभात खबर के साथ मौजूद थीं मणिपाल हॉस्पिटल, रांची की एसोसिएट डाइटिशियन स्मृति गुप्ता. उन्होंने ट्रॉपिकल वेदर ट्रांजिशन, डिहाइड्रेशन, फंगल इंफेक्शन, पानी पीने का सही तरीका और गर्मियों में किन चीजों से बचना चाहिए, इस पर आसान भाषा में डीटेल से जानकारी दी.
ट्रॉपिकल वेदर ट्रांजिशन का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
इस मौसम में हीट भी रहती है और ह्यूमिडिटी भी. गर्मी की वजह से शरीर में ज्यादा पसीना आता है, लेकिन हवा में नमी ज्यादा होने की वजह से वह पसीना ठीक तरीके से सूख नहीं पाता. इसकी वजह से बॉडी का इंटरनल टेंपरेचर बढ़ने लगता है और शरीर और ज्यादा स्वेटिंग करने लगता है. जब लगातार पसीना निकलता रहता है, तो बॉडी से फ्लूइड और सोडियम दोनों लॉस होने लगते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से बढ़ता है.
कैसे पहचानें कि बॉडी डिहाइड्रेट हो रही है?
स्मृति गुप्ता कहती हैं, डिहाइड्रेशन के कुछ शुरुआती संकेत बहुत कॉमन होते हैं. जैसे ज्यादा प्यास लगना, मुंह सूखना, कमजोरी महसूस होना और बहुत ज्यादा थकान लगना. इसके अलावा डार्क यूरिन या कम यूरिन आना भी डिहाइड्रेशन का बड़ा संकेत माना जाता है. कुछ लोगों को सिरदर्द और कन्फ्यूजन जैसी दिक्कतें भी होने लगती हैं. बच्चों में इरिटेशन बढ़ना और पेशाब कम आना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं.
इस मौसम में कितना पानी पीना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर 20 किलो वजन पर करीब 1 लीटर पानी पीना चाहिए. आमतौर पर एक व्यक्ति को रोज 2.5 से 3.5 लीटर तक पानी पीना चाहिए. हालांकि, अगर किसी को डायरिया, उल्टी या ज्यादा स्वेटिंग हो रही है, तो पानी की मात्रा 4 से 5 लीटर तक बढ़ सकती है. लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसान कर सकता है. सिर्फ बहुत ज्यादा पानी पीने से शरीर में सोडियम लेवल कम होने लगता है, जिससे हाइपोनेट्रेमिया का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए जरूरत के हिसाब से ही पानी पीना जरूरी है.
क्या रोज ORS पीना सही है?
कई लोग गर्मी में रोज ORS पीने लगते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार ORS सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही लेना चाहिए. अगर डायरिया, उल्टी, बुखार या सीवियर डिहाइड्रेशन हो रहा है, तभी ORS लेना फायदेमंद माना जाता है. माइल्ड डिहाइड्रेशन में नारियल पानी और नॉर्मल वाटर ही काफी होता है.
गर्मी और उमस में क्या खाना चाहिए?
इस मौसम में ऐसे फूड्स खाने चाहिए जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो. तरबूज, खरबूजा, खीरा और नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा सूप और हल्के फ्लूइड्स भी लिए जा सकते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है, वे लिमिट में फ्रूट जूस भी ले सकते हैं.
स्पाइसी और ऑयली फूड क्यों अवॉइड करना चाहिए?
गर्मी में ज्यादा मसालेदार और ऑयली फूड पेट को इरिटेट करते हैं. इसकी वजह से डायरिया और उल्टी का खतरा बढ़ जाता है. अगर बॉडी पहले से डिहाइड्रेटेड है, तो फ्लूइड लॉस और ज्यादा बढ़ सकता है. इसी वजह से इस मौसम में हल्का और सिंपल खाना खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है.
क्या स्ट्रीट फूड नुकसान कर सकता है?
गर्मी और बारिश के मौसम में स्ट्रीट फूड खाते समय सावधानी रखना जरूरी है. असल खतरा फूड की हाइजीन से जुड़ा होता है. अगर खाना साफ तरीके से तैयार नहीं हुआ है या पानी साफ नहीं है, तो इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है.
ह्यूमिडिटी में कौन से इन्फेक्शन सबसे ज्यादा होते हैं?
उमस वाले मौसम में सबसे ज्यादा फंगल इन्फेक्शन देखने को मिलते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पसीना ठीक तरीके से सूख नहीं पाता, जिसकी वजह से फंगल ग्रोथ तेजी से बढ़ती है. अंडरआर्म्स, गर्दन, स्किन फोल्ड्स और जेनिटल एरिया में लाल रैशेज या खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए क्या करें?
इस मौसम में ढीले और कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए ताकि पसीना आसानी से अब्सॉर्ब हो सके और जल्दी सूख जाए. बहुत टाइट कपड़े पहनने से भी रैशेज और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
इम्यूनिटी मजबूत रखने के आसान तरीके
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अच्छी इम्यूनिटी के लिए बैलेंस डाइट, सही नींद, हाइड्रेशन और रेगुलर एक्सरसाइज बहुत जरूरी है. डाइट में कार्ब्स, प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर सभी चीजें सही मात्रा में शामिल होनी चाहिए.
क्या हर किसी को विटामिन सप्लीमेंट लेना चाहिए?
आजकल लोग बिना जरूरत के विटामिन सप्लीमेंट लेने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. विटामिन डी और विटामिन बी12 जैसे सप्लीमेंट तभी लेने चाहिए जब उनकी जरूरत हो या डॉक्टर सलाह दें.
इस मौसम में एक्सरसाइज कब करनी चाहिए?
बहुत ज्यादा गर्मी के दौरान सुबह 10 बजे से दोपहर 2-3 बजे तक जिम या आउटडोर एक्सरसाइज अवॉइड करनी चाहिए. एक्सरसाइज के लिए अर्ली मॉर्निंग और लेट इवनिंग ज्यादा सुरक्षित समय माना जाता है.
एसी में रहने वालों को क्यों सावधान रहना चाहिए?
फैन सिर्फ हवा को सर्कुलेट करता है, लेकिन एसी हवा की नमी कम करके ड्राई एयर छोड़ता है. एसी में रहने वाले लोगों को अक्सर प्यास महसूस नहीं होती, जिसकी वजह से उन्हें पता ही नहीं चलता कि बॉडी डिहाइड्रेट हो रही है. इसीलिए एसी में लंबे समय तक रहने वालों को टाइम-टाइम पर पानी पीते रहना चाहिए.
बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं को खास ध्यान रखने की जरूरत
छोटे बच्चे अपनी परेशानी बता नहीं पाते. अगर बच्चा चिड़चिड़ा हो रहा है, पेशाब कम कर रहा है या बहुत सुस्त लग रहा है, तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है. वहीं, प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए सही हाइड्रेशन बहुत जरूरी होता है. शरीर में फ्लूइड कम होने से ब्लड सर्कुलेशन और बच्चे तक ऑक्सीजन व न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
क्या ठंडा पानी नुकसान करता है?
गर्मी में ठंडा पानी पीना गलत नहीं है, लेकिन बहुत ज्यादा ठंडा पानी तुरंत राहत जरूर देता है, पर वह बॉडी में उतनी तेजी से अब्सॉर्ब नहीं होता जितना नॉर्मल या हल्का गुनगुना पानी. धूप से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीने से गले में खराश, खांसी या एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं,
क्या एनर्जी ड्रिंक्स सच में फायदेमंद होते हैं?
मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर एनर्जी ड्रिंक्स और सोडा सिर्फ कुछ समय के लिए प्यास शांत करते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये शरीर को नेचुरल हाइड्रेशन नहीं देते और ज्यादा मात्रा में नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.
क्या ज्यादा पसीना आने से बॉडी डिटॉक्स होती है?
यह पूरी तरह मिथक है. पसीना आने से बॉडी डिटॉक्स नहीं होती. शरीर को डिटॉक्स करने का काम सिर्फ लिवर और किडनी करते हैं.
गर्मी में खुद को हाइड्रेटेड कैसे रखें?
इस मौसम में रोज पर्याप्त पानी पीना जरूरी है. साथ ही नारियल पानी, सूप और पानी से भरपूर फल और सब्जियां डाइट में शामिल करनी चाहिए. यही छोटी-छोटी आदतें शरीर को गर्मी, डिहाइड्रेशन और इन्फेक्शन से बचाने में मदद करती हैं.