Relationship Possessiveness: किसी नए रिश्ते में आने के बाद पार्टनर को लेकर थोड़ा पजेसिव महसूस करना आम बात है. मन में यह डर रह सकता है कि कहीं सामने वाला दूर न हो जाए या कोई दूसरा व्यक्ति रिश्ते के बीच न आ जाए. हालांकि यह भावना सिर्फ लड़कियों में नहीं होती, लड़के भी अपने पार्टनर को लेकर पजेसिव हो सकते हैं. लेकिन आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ दिमाग और हार्मोन का भी रोल होता है.
प्यार बढ़ने के साथ बढ़ता है लगाव
जब हम किसी व्यक्ति के करीब आते हैं, तो उसके साथ हमारा भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ने लगता है. साथ समय बिताना, बातें शेयर करना, एक-दूसरे पर भरोसा करना और शारीरिक स्पर्श जैसी चीजें रिश्ते में अपनापन बढ़ाती हैं. इस दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन की भूमिका होती है, जो सामाजिक जुड़ाव और भरोसे से जुड़ा माना जाता है.
जैसे-जैसे लगाव बढ़ता है, पार्टनर हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. ऐसे में उसके व्यवहार में आए छोटे बदलाव भी हमें जल्दी महसूस होने लगते हैं. कई बार यही ज्यादा ध्यान देने की आदत पजेसिवनेस में बदल जाती है.
पार्टनर को खोने का डर भी बन सकता है वजह
पजेसिवनेस के पीछे सिर्फ हार्मोन ही जिम्मेदार नहीं होते. कई बार पार्टनर को खोने का डर भी इसकी बड़ी वजह होता है. अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसका रिश्ता कमजोर पड़ सकता है या पार्टनर किसी और के करीब जा सकता है, तो उसके मन में असुरक्षा पैदा हो सकती है.
पुराने रिश्ते का खराब अनुभव भी इस भावना को बढ़ा सकता है. अगर पहले किसी को धोखा मिला हो या भरोसा टूटा हो, तो नए रिश्ते में भी वह ज्यादा सतर्क रह सकता है.
कब पजेसिवनेस बन जाती है परेशानी?
थोड़ी पजेसिवनेस रिश्ते में परवाह दिखा सकती है, लेकिन हर बात पर शक करना, पार्टनर का फोन चेक करना, दोस्तों से मिलने पर रोकना या उसकी हर गतिविधि पर नजर रखना सही नहीं है. ऐसी आदतें धीरे-धीरे रिश्ते में तनाव बढ़ा सकती हैं.
इसलिए रिश्ते में प्यार के साथ भरोसा और एक-दूसरे की आजादी का सम्मान भी जरूरी है. स्वस्थ रिश्ते में पार्टनर को बांधकर रखने के बजाय उस पर भरोसा करना ज्यादा जरूरी होता है.
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