प्रेमानंद जी ने बताए भक्ति मार्ग के 6 कांटे, इनके रहते कभी नहीं मिलेगी भक्ति

Premanand Ji Maharaj: भक्ति करना चाहते हैं पर मन शांत नहीं? प्रेमानंद जी महाराज ने बताए वो 6 खतरनाक घमंड, जिनकी वजह से भक्ति महारानी आपके दिल में कदम भी नहीं रखतीं. कहीं आप भी तो नहीं पाल रहे ये 6 दुश्मन? आज ही जानें और अपना रास्ता साफ करें.

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज एक ऐसे संत हैं जिनकी बातें आज लाखों लोगों का जीवन संवार रही हैं. महाराज जी कहते हैं कि भगवान की भक्ति कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप जबरदस्ती पा सकें. वे भक्ति को एक महारानी की तरह मानते हैं और उनका कहना है कि ये महारानी हर किसी के दिल में नहीं आतीं. महाराज जी ने 6 ऐसे खतरनाक कांटों के बारे में बताया है, जो अगर आपके अंदर जरा भी हैं, तो आपके लिए भक्ति का रास्ता बंद हो जाता है. वे साफ कहते हैं कि जब तक मन में ये घमंड रहेंगे, तब तक भक्ति महारानी वहां कदम भी नहीं रखेंगी. हम अक्सर अनजाने में इन्हीं बुराइयों को पाल लेते हैं और फिर परेशान होते हैं कि हमें भगवान का प्रेम क्यों नहीं मिल रहा. तो आइए जानते हैं वे कौन से 6 घमंड हैं जो आपको ईश्वर से दूर रख रहे हैं.

विद्या का अभिमान

जब इंसान थोड़ा बहुत पढ़-लिख जाता है या उसे शास्त्रों का ज्ञान हो जाता है, तो अक्सर उसे अपनी बुद्धि पर घमंड होने लगता है. वह दूसरों को मूर्ख समझने लगता है और अपनी विद्वत्ता की अकड़ में रहता है. सच तो यह है कि जो ज्ञान आपको झुकना न सिखाए, वह भक्ति के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है.

कुल का अभिमान

बहुत से लोगों को अपने ऊंचे खानदान या बड़े वंश में जन्म लेने का बहुत ज्यादा घमंड होता है. वे खुद को दूसरों से श्रेष्ठ और बाकी लोगों को छोटा समझने लगते हैं. ईश्वर के दरबार में आपके कुल या खानदान की कोई कीमत नहीं है, वहाँ सिर्फ आपके मन का भाव देखा जाता है.

समाज में महत्व का अभिमान

जब किसी व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलने लगता है, तो उसके अंदर यह इच्छा जाग जाती है कि हर जगह उसे ही महत्व दिया जाए. उसे लगने लगता है कि उसकी बात सबसे ऊपर होनी चाहिए और लोग उसे खास समझें. सम्मान पाने की यही भूख इंसान को सच्चा भक्त नहीं बनने देती.

धन का अभिमान

पैसा आने पर इंसान अक्सर यह भूल जाता है कि यह सब अस्थायी है. वह अपनी संपत्ति और दौलत के नशे में चूर होकर दूसरों का अपमान करने लगता है. जिसके मन में पैसों की गर्मी और अहंकार होता है, उस दिल में भक्ति का कोमल भाव कभी पैदा ही नहीं हो सकता.

रूप का अभिमान

अपनी शारीरिक सुंदरता या अच्छे दिखने पर घमंड करना एक बहुत बड़ी भूल है. इंसान को लगता है कि वह बहुत सुंदर है और इसी मोह में वह फंस जाता है. यह शरीर समय के साथ ढल जाएगा और अंत में मिट्टी बन जाएगा, इसलिए इस बाहरी दिखावे पर गर्व करना भक्ति से दूर ले जाता है.

बल का अभिमान

चाहे शरीर की ताकत हो या किसी ऊंचे पद की शक्ति, इसका घमंड इंसान को अत्याचारी बना देता है. जब कोई अपनी ताकत के दम पर दूसरों को दबाता है या उन्हें डराता है, तो उसके अंदर से दया और करुणा खत्म हो जाती है. बिना दया और प्रेम के भगवान की भक्ति मिलना नामुमकिन है.

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लेखक के बारे में

By Shubhra Laxmi

Shubhra Laxmi is a lifestyle and health writer with a year-long association with Prabhat Khabar. While she specializes in health, fashion, food, and numerology, her writing is deeply rooted in the human experience. By blending emotional depth with motivational insights, Shubhra aims to inspire readers to live a life that is balanced, mindful, and vibrant.

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