Personality Development: पब्लिक स्पीकिंग एक ऐसी कला है, जिसमें व्यक्ति अपने विचारों को आसानी से शब्दों के माध्यम से लोगों के सामने व्यक्त करता है पर कभी-कभी स्पीकर की बातें सुन कर सुनने वाले लोग बोर हो जाते हैं, उन्हें कुछ समझ नहीं आता है साथ ही उनका ध्यान भी भटकने लग जाता है. ऐसे में अगर आप भी एक पब्लिक स्पीकर हैं और आपको अपनी बातें और अनुभवों को लोगों तक पहुंचाना अच्छा लगता है लेकिन आप अक्सर नर्वस हो जाते हैं और लोग आपकी बातें समझ नहीं पाते तो घबराए नहीं क्योंकि आज हम आपको बताएंगे पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को प्रभावशील बनाने के 8 आसान टिप्स.
अपनी ऑडियंस को जानें
अपनी स्पीच को तैयार करने से पहले ये जांच कर लें कि आपकी टारगेट ऑडियंस कौन है जिनके सामने आपको अपने विचार शेयर करने हैं, साथ ही आप उसी अनुसार अपने शब्दों का चयन करें. आप ये भी देख ले कि आपकी ऑडियंस किस प्रोफेशन से है और उन्हें किस बारें में ज्यादा जानकारी चाहिए.
टॉपिक का सही चयन करें
अपने टॉपिक का सही तरीके से चयन करें. ऐसे टॉपिक का चयन करें जिसकी आपको अच्छे से जानकारी हो. अगर ऐसी कोई टॉपिक है जिसके बारे में आपको ज्यादा जानकारी नहीं हैं तो उसे बिना क्रॉस चेक किए न बोलें. कोई भी फैक्ट रखने से पहले अच्छे से उसके बारे में रिसर्च करें.
रोजाना प्रैक्टिस करें
अपनी स्पीच को तैयार करने के बाद उसे 1-2 बार पढ़ कर यह देख लें कि वो सही तरीके से लिख हुआ है या नहीं. उसे पढ़ कर बार-बार प्रैक्टिस करें ताकि आपको सही तरीके से बोलने की आदत हो जाए और साथ ही इससे आपके शब्दों के उच्चारण में स्पष्टता आ जाएगी.
खुद की पर्सनैलिटी को निखारे
एक स्पीकर को हमेशा प्रोफेशनल दिखना चाहिए, जिससे आपका लोगों पर सही इम्प्रेशन पड़े. कोशिश करें, आपका पहनावा डीसेन्ट रहे जिससे आप प्रोफेशनल और स्मार्ट लगें.
आई कांटेक्ट बना कर रखें
जब भी आप कहीं स्पीच दे रहें हों तो ध्यान दें, कि आप अपनी ऑडियंस से आई कांटेक्ट बना कर रखें ताकि लोगों का ध्यान न भटके. इससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और लोगों से आप कनेक्ट भी कर सकेंगे.
सही स्पीड बना कर रखें
अगर आप चाहते हैं कि आपकी स्पीच प्रभावशाली हो तो स्पीच देते वक्त ध्यान रखें कि आप न ज्यादा फास्ट बोलें न ज्यादा धीरे. अपने बोलने की स्पीड को मीडियम पेस पर रखें. कोशिश करें, कि आप की स्पीच ज्यादा लंबी या फिर ज्यादा छोटी न हो.
उदाहरण के साथ समझाएं
अपनी स्पीच में कुछ रियल लाइफ से जुड़ी उदाहरणों को भी शामिल करें, जिससे आपकी ऑडियंस आसानी से आपकी बातों को समझ पाए और आप की कही हुई बातों से कनेक्ट कर पाए.
एक्सप्रेशन के साथ बोलें
अक्सर स्पीच देते वक्त स्पीकर बिना किसी एक्सप्रेशन और ईमोशन के स्पीच देते हैं जिस कारण ऑडियंस बिना पूरी स्पीच सुने वहां से चले जाते हैं, ऐसे में आपको यह ध्यान देने की जरूरत है कि जब भी आप अपने विचार या अनुभव शेयर कर रहे हैं तो जरूरत के हिसाब से एक्सप्रेशन भी दें ताकि ऑडियंस आपको इंटरेस्ट के साथ सुन सकें.
इन्पुट- शाम्भवी सिन्हा
