2 से 5 साल के बच्चे की मोबाइल की लत कैसे छुड़ाएं? यहां जानिए सबसे आसान और कारगर तरीका

Parenting Tips: छोटे बच्चे और मोबाइल का रिश्ता आजकल हर दूसरे घर की कहानी बन चुका है. बच्चा खाना खाए तो मोबाइल चाहिए और रोए तो भी फोन चाहिए। अगर आपका बच्चा भी इसी तरह स्क्रीन से चिपका रहता है, तो उसकी यह आदत छुड़ाने के लिए आपको डांट नहीं, बल्कि थोड़ा प्यार और पेशेंस दिखाना होगा.

Parenting Tips: आज के समय में जिस भी घर में छोटे बच्चे हैं, उनमें एक समस्या देखने को जरूर मिलती है कि बच्चा रो रहा है और शांत होने के लिए अपने माता-पिता से मोबाइल फोन की जिद कर रहा है. खासकर जिन बच्चों की उम्र 2 से 5 साल के बीच होती है, वे हर समय मोबाइल फोन के लिए जिद करते रहते हैं. चाहे वे खाना खा रहे हों या फिर चुपचाप सोफे पर बैठे हों, उनकी नजरें हर समय स्क्रीन पर ही टिकी रहती हैं और वे फोन में कुछ न कुछ करते ही रहते हैं.

अगर आपके घर पर भी छोटे बच्चे हैं और उनकी उम्र 2 से 5 साल के बीच है, तो आपको यह समझना होगा कि यह समय उनके मेंटल और फिजिकल डेवलपमेंट के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है. इस उम्र में ज्यादा मोबाइल देखना उनके बोलने, सोचने और आंखों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है. अगर आपका बच्चा भी बिना फोन देखे खाना नहीं खाता या बात-बात पर जिद करता है, तो घबराने की कोई बात नहीं है. आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप उसकी इस आदत को हमेशा के लिए छुड़वा सकते हैं. तो चलिए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

mobile addiction in kids

बच्चे को मोबाइल नहीं, अपना समय दें

छोटे बच्चे अक्सर मोबाइल की जिद उस समय करते हैं जब वे बोर होने लगते हैं या फिर उन्हें अपने साथ खेलने वाला कोई नहीं मिलता. ऐसे में जब आप बच्चे को समय देने लगते हैं, तो उसका ध्यान मोबाइल फोन से अपने आप ही हटने लगता है. बच्चे को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए हर शाम उसके साथ पार्क जाएं या फिर घर पर ही उसके साथ कोई गेम खेल लें. इसके अलावा आप चाहें तो उसे मजेदार कहानियां भी सुना सकते हैं, उससे छोटी-छोटी बातें कर सकते हैं या फिर घर के छोटे-मोटे कामों में उसकी मदद भी ले सकते हैं. जब बच्चा आपके साथ समय बिताने लगेगा, तो उसे फोन की याद अपने आप ही नहीं आएगी.

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खाना खाते समय स्क्रीन पूरी तरह से बंद रखें

बहुत से माता-पिता की यह आदत होती है कि बच्चे को जल्दी खाना खिलाने के चक्कर में वे उनके हाथों में मोबाइल थमा देते हैं या फिर टीवी में कार्टून चलाकर छोड़ देते हैं. आपका यह तरीका शुरुआत में तो आसान लगता है, लेकिन आगे चलकर आपके लिए ही एक बहुत बड़ी परेशानी बन जाता है. इस प्रॉब्लम से निपटने के लिए पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना शुरू कर दें. इसके अलावा खाना खाते समय बच्चे से खाने के स्वाद, रंग और उसके फायदों के बारे में बात करें. इससे बच्चा खाने का स्वाद लेना सीखेगा और बिना मोबाइल देखे भी बहुत आराम से खाना खाएगा.

मोबाइल की जगह मजेदार खिलौने और बुक्स दें

अगर आप बच्चे के हाथ से मोबाइल छीन लेंगे और उसे खेलने के लिए कुछ नहीं देंगे, तो जाहिर है कि वह रोएगा ही. इसलिए फोन लेने से पहले उसका कोई अच्छा ऑप्शन तैयार रखना बहुत जरूरी है. आप बच्चे को ड्राइंग बुक, कलर्स या सॉफ्ट खिलौने लाकर दे सकते हैं. इसके अलावा बिल्डिंग ब्लॉक्स या पजल्स जैसी चीजें भी उनके लिए बहुत बढ़िया रहती हैं, क्योंकि इनसे उनका दिमाग तेज होता है और वे फोन चलाने के बारे में भूल जाते हैं. इसके साथ ही आपको उन्हें सुंदर तस्वीरों वाली कहानियों की किताबें देखने के लिए भी मोटिवेट करना चाहिए.

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खुद सही आदतें अपनाएं और रोल मॉडल बनें

यह बात आप खुद भी जानते होंगे कि छोटे बच्चे वही करते हैं जो वे अपने माता-पिता या फिर बड़ों को करते हुए देखते हैं. अगर आप खुद दिनभर फोन में लगे रहेंगे, तो बच्चा भी आपसे वही सीखेगा. इसलिए बच्चे के सामने बार बार बेवजह मोबाइल का इस्तेमाल करने से या फिर रील्स स्क्रॉल करने से आपको बचना चाहिए. ऑफिस या घर का काम खत्म होने के बाद फोन को साइड में रख दें और परिवार के साथ समय बिताना शुरू कर दें. जब बच्चा आपको किताबें पढ़ते या बाकी काम करते देखेगा, तो वह भी वही अच्छी आदतें बहुत आसानी से सीख जाएगा.

प्यार से 'ना' बोलना सीखें और अपनी बात पर डटे रहें

जब आपका बच्चा फोन के लिए जिद करने लग जाए या फिर रोने, चिल्लाने या गुस्सा दिखाने लग जाए, तो उसे डांटने की जगह बिल्कुल शांत दिमाग से काम लें. उसकी जिद या गुस्से के सामने झुकने की गलती बिल्कुल भी न करें. बेहतर होगा कि आप अपने बच्चे को प्यार से गले लगाएं और आसान भाषा में समझाएं कि मोबाइल देखने से उसकी आंखें खराब हो सकती हैं. हमेशा अपनी बात पर कायम रहने की कोशिश करें. अगर आपने एक बार 'ना' कह दिया, तो रोने पर भी फोन मत दीजिए. जब बच्चे को समझ आ जाएगा कि रोने-धोने से भी फोन नहीं मिलने वाला, तो वह धीरे-धीरे जिद करना पूरी तरह बंद कर देगा.

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By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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