गुस्से में कहे गए ये 6 शब्द दीमक की तरह चाट सकते हैं बच्चे का कॉन्फिडेंस, आपकी छोटी सी बात बिगाड़ सकती है उसका फ्यूचर

Parenting Tips: बच्चों की परवरिश में सिर्फ आपकी आदतें ही नहीं, बल्कि आपके मुंह से निकले शब्द भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. कई बार गुस्से या अनजाने में कही गई बातें बच्चों के कॉन्फिडेंस, थिंकिंग और इमोशंस पर गहरा असर छोड़ जाती हैं. जानिए ऐसी 6 बातें, जिन्हें अपने बच्चे से कहने से आपको हमेशा बचना चाहिए.

Parenting Tips: आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन आपके मुंह से निकला हुआ एक छोटा सा शब्द भी आपके बच्चे की पूरी जिंदगी और उसकी दुनिया को बदल सकता है. जब बच्चे छोटे होते हैं तो वे उस गीली मिट्टी की तरह होते हैं, जो आपकी हर एक बात और आदत को अपने अंदर एब्जॉर्ब कर लेते हैं. यह एक बड़ी वजह है कि अगर आपके घर पर छोटे बच्चे हैं तो आपको उनके सामने कुछ भी कहने से और करने से पहले अच्छी तरह से चीजों को सोच और समझ लेना चाहिए. आपकी एक छोटी सी गलती आपके बच्चे के दिल और दिमाग पर एक गहरा घाव छोड़ सकती है. आपके बच्चे के साथ ऐसा न हो इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको अपने बच्चे के सामने कभी भी नहीं कहना चाहिए. अगर आप अपने बच्चे से इनमें से कोई भी बात कहते हैं तो उन्हें सिर्फ चोट नहीं पहुंचती है, उनका कॉन्फिडेंस भी काफी तेजी से गिरने लग जाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी ही 6 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपने बच्चे से कहकर आप अपने हाथों से ही उसके फ्यूचर को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं.

तुमसे कुछ नहीं हो सकता

अक्सर ऐसा होता है कि जब बच्चा कोई काम ठीक से नहीं कर पाता, तो गुस्से में अक्सर पेरेंट्स कह देते हैं कि “तुमसे कुछ नहीं होगा.” यह छोटी सी बात बच्चे के कॉन्फिडेंस को पूरी तरह तोड़ देती है. इससे उसे लगने लगता है कि वह सच में किसी काम के लायक नहीं है. इसकी जगह पर आपको उसे कहना चाहिए कि, “कोई बात नहीं, अगली बार तुम इसे और बेहतर कर सकते हो.”

देखो, उनका बेटा कितना होशियार है

आपको शायद यह मालूम न हो लेकिन कम्पेरिजन करने से बच्चों के मेंटल डेवलपमेंट पर काफी बुरा असर पड़ता है. जब आप अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे के मार्क्स, आदतों या लुक से करते हैं, तो उसके अंदर जलन की भावना पैदा होने लगती है. आपकी इस आदत की वजह से वह खुद को दूसरे बच्चे से कम आंकने लगता है. याद रखें, हर बच्चा अपने आप में यूनिक और स्पेशल होता है.

चुप रहो, तुम्हारा दिमाग खराब है क्या?

कई बार ऐसा होता है कि जब बच्चे अपनी कोई बात या शिकायत लेकर आपके पास आते हैं, तो आप उन्हें डांटकर चुप करा देते हैं. आपकी इस आदत की वजह से वे अंदर से टूट जाते हैं. आपकी इस आदत की वजह से उनका खुलकर बोलना और अपने इमोशंस शेयर करना बंद हो जाता है. बड़े होने पर ऐसे बच्चे अपनी बातें दूसरों से शेयर करने में कतराते हैं और डरपोक बन जाते हैं.

रोना मत, तुम कोई लड़की हो क्या?

अक्सर लड़कों को बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि ‘लड़के रोते नहीं हैं.’ बता दें यह सोच पूरी तरह से ही गलत है. रोना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने इमोशंस को बाहर निकालने का एक जरिया है. आपके ऐसा ऐसा कहने से बच्चे अपने इमोशंस को दबाना सीख जाते हैं, जो आगे चलकर उनके स्वभाव में गुस्से और चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर आता है.

मैं तुम्हें छोड़कर चला जाऊंगा या जाऊंगी

बच्चों को बात-बात पर यह डराना कि अगर तुमने यह काम नहीं किया, तो मैं तुम्हें पुलिस को दे दूंगा या घर से चला जाऊंगा, बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है. आपके ऐसा कहने से बच्चों के मन में अकेले छूट जाने का डर बैठ जाता है. आपकी इस आदत की वजह से वे हर समय एक अनजाने खौफ में जीने लगते हैं, जिससे उनका मेंटल ग्रोथ रुक जाता है.

तुम्हारी वजह से आज मेरा मूड खराब है

आपको कभी भी अपनी किसी नाकामी, ऑफिस के स्ट्रेस या पर्सनल गुस्से का ठीकरा बच्चों के सिर पर नहीं फोड़ना चाहिए. बता दें जब आप कहते हैं कि तुम्हारी वजह से मैं परेशान हूं, तो बच्चा खुद को हर मुसीबत के लिए जिम्मेदार समझने लग जाता है. वह एक अजीब से गिल्टी फीलिंग में जीने लगता है, जो उसकी मासूमियत को छीन लेता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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