आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही कई लोगों का हाथ सबसे पहले फोन की तरफ जाता है. कोई सोशल मीडिया चेक करता है, तो कोई मैसेज और ईमेल देखने लगता है. लेकिन क्या दिन की शुरुआत इसी तरह करना सही है? इसी सोच के साथ इन दिनों 'नो-फोन मॉर्निंग' का ट्रेंड काफी चर्चा में है.
क्या है 'नो-फोन मॉर्निंग'?
नो-फोन मॉर्निंग का मतलब है कि सुबह उठने के तुरंत बाद कुछ समय तक मोबाइल से दूरी बनाए रखना. इसमें लोग करीब 30 मिनट से एक घंटे तक फोन नहीं देखते. इस दौरान वे अपनी सुबह की शुरुआत बिना स्क्रीन के करते हैं. आप चाहें तो इस समय टहल सकते हैं, एक्सरसाइज कर सकते हैं, गहरी सांस ले सकते हैं या कुछ देर शांत बैठ सकते हैं.
सुबह फोन न देखने से मूड पर क्या असर पड़ता है?
सुबह उठते ही सोशल मीडिया, खबरें या काम से जुड़े मैसेज देखने से दिमाग पर एक साथ काफी जानकारी आ जाती है. इससे दिन की शुरुआत तनाव और बेचैनी के साथ हो सकती है. वहीं, कुछ समय फोन से दूर रहने पर दिमाग को आराम से जागने और दिन के लिए तैयार होने का मौका मिलता है.
सुबह फोन न देखने से आपका ध्यान अपने काम पर बेहतर तरीके से लग सकता है. खासकर सोशल मीडिया से दूरी बनाने पर दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करने की आदत भी कम हो सकती है. इससे मन हल्का और मूड बेहतर महसूस हो सकता है.
सुबह की शुरुआत ऐसे करें
सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास पानी पिएं और कुछ मिनट खुली हवा में रहें. हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करें. चाहें तो कुछ देर मेडिटेशन या जर्नलिंग भी कर सकते हैं. अगर फोन से दूरी बनाना मुश्किल लगता है, तो उसे रात में ही बेड से दूर रखकर चार्ज करें.
हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. जरूरी नहीं कि आपको पूरे एक घंटे फोन से दूर रहना ही पड़े. शुरुआत 15-20 मिनट से करें और धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
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