प्यार और अटैचमेंट में क्या है सबसे बड़ा फर्क? आसान शब्दों में समझें क्यों लोग हो जाते हैं कन्फ्यूज

Love Vs Attachment: यह आर्टिकल असल में यह समझाना चाहता है कि रिश्तों में लोग अक्सर प्यार और अटैचमेंट को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग होते हैं. इसी गलतफहमी की वजह से रिश्तों में कन्फ्यूजन, डर और गलत फैसले आने लगते हैं. सही फर्क समझने से रिश्ता ज्यादा हेल्दी और स्टेबल बन सकता है.

Love Vs Attachment: किसी के साथ भी एक रिश्ते में रहना बहुत ही अच्छी बात होती है, लेकिन रिश्ते में होने के बावजूद भी कई बार हम अपनी फीलिंग्स को सही से समझने में गलती कर देते हैं. जब हम किसी के साथ रिश्ते में होते हैं, तो सच्चे प्यार और अटैचमेंट को एक ही चीज मान लेते हैं, जिस वजह से हमें आगे चलकर ज्यादा कन्फ्यूजन होता है और साथ ही हमें चीजें समझने में भी दिक्कत होती है. जब हम किसी के साथ अपना ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगते हैं, तो हमें उनकी आदत लग जाती है, जिसे ही आसान शब्दों में अटैचमेंट कहा जाता है. अटैचमेंट की वजह से हमें लगता है कि यही प्यार है, जबकि ऐसा होता बिलकुल भी नहीं है. प्यार और अटैचमेंट के बीच एक बहुत ही बड़ा फर्क होता है, जिसे आपके लिए समझना बेहद ही जरूरी हो जाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको बिलकुल ही आसान और सीधी भाषा में इन दोनों के बीच का फर्क समझाने वाले हैं, ताकि जीवन में आपको कभी भी कन्फ्यूजन न हो.

प्यार में सामने वाले की खुशी जरूरी है, अटैचमेंट में अपनी

जब आप किसी से सच्चा प्यार करते हैं, तो आप दिल से यही चाहते हैं कि सामने वाला हमेशा खुश रहे, चाहे वह आपके साथ हो या फिर न हो. सच्चे प्यार में किसी भी तरह का कोई लालच नहीं होता. लेकिन अटैचमेंट में सब कुछ ‘मेरे’ इर्द-गिर्द घूमता रहता है. आप सोचते हैं कि ‘वह इंसान मेरे पास ही रहना चाहिए, क्योंकि उसके बिना मेरा मन नहीं लगता.’ यहां पर आप सामने वाले से ज्यादा अपनी खुशी के बारे में सोच रहे होते हैं.

प्यार आजादी देता है, अटैचमेंट शक और पाबंदी

सच्चे प्यार की सबसे बड़ी पहचान है भरोसा. एक सच्चे प्यार के रिश्ते में आप अपने पार्टनर को पूरी आजादी देते हैं और उनकी अपनी लाइफ यानी कि पर्सनल स्पेस की इज्जत भी करते हैं. लेकिन जिस जगह पर सिर्फ अटैचमेंट होता है, वहां डर और इनसिक्योरिटी आ जाती है. इंसान सामने वाले को कंट्रोल करने की कोशिश करने लगता है. अटैचमेंट होने की वजह से “तुम कहां जा रहे हो?”, “किससे बात कर रहे हो?” जैसी चीजें और सवाल कॉमन होने लगती हैं, जिससे सामने वाले का दम घुटने लगता है.

प्यार आपको आगे बढ़ाता है, अटैचमेंट आपको कमजोर

अगर रिश्ते में सच्चा प्यार है, तो आप दोनों एक-दूसरे को लाइफ में कुछ अच्छा करने के लिए सपोर्ट करेंगे. प्यार आपको एक बेहतर और मजबूत इंसान बनाता है. वहीं, दूसरी तरफ, अटैचमेंट आपको अंदर ही अंदर कमजोर कर देता है. आपके मन में हर वक्त यह डर बना रहता है कि ‘अगर यह मुझे छोड़कर चला गया या चली गई, तो मेरा क्या होगा?’ यह डर आपको लाइफ में आगे बढ़ने से हर समय रोकता रहता है.

प्यार टिकता है और अटैचमेंट समय के साथ खत्म हो जाता है

जब रिश्ते में सच्चा प्यार होता है तो वह समय के साथ और भी गहरा होता चला जाता है, चाहे हालात कितने भी बदल जाएं. लेकिन अटैचमेंट हमारी जरूरतों से जुड़ा हुआ होता है. जब तक सामने वाले से हमारी जरूरतें पूरी हो रही हैं, तब तक सब अच्छा लगता है. जैसे ही वो चीजें कम होती हैं या कोई दूसरा इंसान मिल जाता है, हमारा अटैचमेंट खत्म होने लगता है और लोग बोर हो जाते हैं.

कैसे समझें कि आपके रिश्ते में क्या है?

इसे समझने का एक बहुत ही सिंपल तरीका है. ठंडे दिमाग से खुद से एक सवाल पूछिए, ‘क्या मैं सामने वाले की खुशी में सचमुच खुश हूं, चाहे हालात कुछ भी हो?’ अगर जवाब ‘हां’ आता है, तो आपका यह प्यार पूरी तरह से सच्चा है. लेकिन अगर आप सिर्फ अकेलेपन के डर से या किसी आदत की वजह से उस इंसान के साथ चिपके हुए हैं, तो समझ जाइए कि यह सिर्फ एक अटैचमेंट है. जब आप इस फर्क को समझ जाएंगे, तो आपका रिश्ता बहुत आसान और खूबसूरत बन जाएगा.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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