सिंक में पड़ा आपका स्क्रबर बन चुका है बैक्टीरिया का अड्डा? जानें कब करें रिप्लेस

Kitchen Sponge Bacteria Risk: किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला स्क्रबर अगर लंबे समय तक गीला और गंदा रहे, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. जानिए स्क्रबर में बदबू, गंदगी और घिसावट जैसे कौन-से संकेत दिखें तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए.

Kitchen Sponge Bacteria Risk: बर्तन धोने के बाद हम अक्सर स्क्रबर को पानी से धोकर वापस सिंक में रख देते हैं. हमें लगता है कि साबुन और पानी के संपर्क में रहने वाला स्क्रबर साफ ही होगा. लेकिन हकीकत थोड़ी अलग हो सकती है. लगातार गीला रहना, उसमें खाने के छोटे-छोटे कण फंसना और ठीक से सूख न पाना स्क्रबर में बैक्टीरिया के बढ़ने की वजह बन सकता है.कुछ अध्ययनों में रसोई के स्पंज और स्क्रबर में बड़ी संख्या में बैक्टीरिया पाए गए हैं. इसलिए सिर्फ बर्तन साफ करने के लिए इस्तेमाल होने का मतलब यह नहीं है कि स्क्रबर खुद भी साफ रहता है. अब सवाल है कि आखिर इसे कब बदल देना चाहिए?

स्क्रबर से आने लगे अजीब गंध तो समझें इशारा

अगर स्क्रबर धोने के बाद भी उसमें से बदबू आती है, तो उसे बदल देना बेहतर है. यह बदबू अक्सर उसमें फंसे खाने के कणों और बैक्टीरिया की वजह से हो सकती है.

धोने के बाद भी दिखे गंदगी


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अगर बार-बार पानी और साबुन से धोने के बावजूद स्क्रबर चिकना, दागदार या खाने के कणों से भरा दिखाई देता है, तो उसे ज्यादा इस्तेमाल न करें. पुराने स्क्रबर में फंसी गंदगी पूरी तरह निकालना मुश्किल हो सकता है.

रेशे टूटने या घिसने लगे हैं

समय के साथ स्क्रबर के रेशे कमजोर होने लगते हैं. अगर वे टूट रहे हैं, फैल गए हैं या पहले की तरह खुरदरे नहीं रहे, तो सफाई भी ठीक से नहीं होगी. ऐसे स्क्रबर को बदलना ज्यादा सही है.

घंटों तक गीला रहता है स्क्रबर?

सिंक में पड़ा गीला स्क्रबर बैक्टीरिया के लिए अनुकूल माहौल बना सकता है. बर्तन धोने के बाद उसे अच्छी तरह निचोड़ें और ऐसी जगह रखें जहां हवा आसानी से लग सके. उसे हमेशा पानी से भरे सिंक में छोड़ने से बचें.

कच्चे चिकन या मांस की सफाई में किया है इस्तेमाल?

कच्चे मांस और चिकन के रस में हानिकारक बैक्टीरिया हो सकते हैं. अगर उसी स्क्रबर से आपने कच्चे मांस या सीफूड का फैलाव साफ किया है, तो खासकर पुराने स्क्रबर को बदल देना बेहतर ऑप्शन हो सकता है.

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रंग बदल गया है तो भी दें ध्यान

स्क्रबर का रंग गहरा पड़ना या उस पर ऐसे दाग बनना जिन्हें धोने के बाद भी हटाया न जा सके, उसके पुराने होने का संकेत हो सकता है. केवल रंग बदलना बैक्टीरिया की मौजूदगी साबित नहीं करता, लेकिन अगर इसके साथ गंध और घिसावट भी है, तो नया स्क्रबर इस्तेमाल करें.

घर में कोई बीमार रहा हो तो बरतें ज्यादा सावधानी

अगर घर में किसी को उल्टी, दस्त या कोई संक्रामक बीमारी हुई है, तो किचन की सफाई वाली चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है. ऐसे समय में पुराने स्क्रबर को बदलना और किचन की दूसरी सतहों को अच्छी तरह साफ करना स्वच्छता बनाए रखने में मदद कर सकता है.

स्क्रबर कितने दिन में बदलें?

अगर आप स्क्रबर का इस्तेमाल रोज करते हैं और वह जल्दी गंदा या खराब हो जाता है, तो उसे नियमित रूप से बदलना अच्छी आदत है. आम तौर पर बार-बार इस्तेमाल होने वाले स्क्रबर को करीब 1 से 2 हफ्ते में बदलने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, कैलेंडर से ज्यादा जरूरी उसकी हालत है. बदबू, लगातार गीलापन, गंदगी या टूटे हुए रेशे दिखें तो पहले ही बदल दें.

इसे ज्यादा साफ रखने के लिए क्या करें?

हर इस्तेमाल के बाद स्क्रबर को अच्छी तरह धोकर उसमें से पानी निचोड़ दें. इसके बाद उसे खुली और हवादार जगह पर सूखने दें.

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लेखक के बारे में

By मेघा रॉय

मेघा रॉय वर्तमान में प्रभात खबर में वीडियो कंटेंट और लाइफस्टाइल राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. इससे पहले वह राजस्थान पत्रिका में फीचर राइटर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की है. साथ ही, इंडिया न्यूज और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव भी हासिल किया है.उन्हें डिजिटल मीडिया, ट्रेंडिंग न्यूज, लाइफस्टाइल, हेल्थ, ज्योतिष, धर्म और सोशल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर सरल और रोचक लेख लिखना पसंद है. उनका मानना है कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पाठकों तक सही, सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है.

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