Kanji Vada Pani Preparation: कांजी वड़ा उत्तर भारत का एक पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय व्यंजन है, जो खासतौर पर होली और अन्य त्योहारों के अवसर पर बनाया जाता है. इसका खट्टा-तीखा स्वाद और हल्की मसालेदार खुशबू इसे अन्य व्यंजनों से अलग बनाती है. सरसों (राई) के स्वाद से तैयार किया गया कांजी पानी और उसमें डाले गए मुलायम मूंग दाल के वड़े मिलकर एक अनोखा और चटपटा अनुभव देते हैं. यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि पाचन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक फर्मेंटेशन (खमीर उठने) की प्रक्रिया शामिल होती है. सही तरीके और संतुलित मसालों के साथ घर पर आसानी से स्वादिष्ट कांजी वड़ा तैयार किया जा सकता है.
सही मसालों का चयन
काली गाजर (अगर उपलब्ध हो) से रंग और स्वाद बेहतर आता है. पिसी हुई राई (सरसों) कांजी का मुख्य स्वाद देती है, इसे ताजा पीसकर ही उपयोग करें. लाल मिर्च पाउडर और काला नमक स्वाद को संतुलित करते हैं. चाहें तो थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर भी डाल सकते हैं. मसालों की मात्रा संतुलित रखें, ज्यादा राई कांजी को कड़वा बना सकती है.
सही फर्मेंटेशन
कांजी को कांच या मिट्टी के बर्तन में रखें. धूप में 3–4 दिन तक रोज 1–2 बार चलाएं. जब पानी हल्का खट्टा और सुगंधित लगे, तब समझिए कांजी तैयार है. ठंड के मौसम में फर्मेंटेशन में ज्यादा समय लग सकता है.
वड़ा बनाने के जरूरी टिप्स
मूंग दाल को 4–5 घंटे भिगोकर बारीक पीसें. घोल को अच्छे से फेंटें ताकि वड़े हल्के और फूले बनें. वड़े तलने के बाद गुनगुने पानी में 10 मिनट भिगो दें, फिर हल्का निचोड़ लें. ज्यादा सख्त वड़े कांजी में स्वाद नहीं छोड़ते, इसलिए नरम वड़े बनाएं.
स्वाद बढ़ाने के उपाय
कांजी को सर्व करने से पहले 1–2 घंटे फ्रिज में ठंडा कर लें. ऊपर से थोड़ा चाट मसाला या हरी धनिया डाल सकते हैं. स्वाद चखते रहें और जरूरत अनुसार नमक/मिर्च एडजस्ट करें.
स्टोरेज टिप्स
कांजी को फ्रिज में 4–5 दिन तक रखा जा सकता है. रोज साफ चम्मच से ही निकालें ताकि स्वाद और ताजगी बनी रहे.
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