World Tribal Day पर चखें झारखंड का असली स्वाद, छिलका रोटी से आरसा तक हैं खास

Jharkhand Tribal Foods: World Tribal Day पर जानें झारखंड के समृद्ध आदिवासी व्यंजनों के बारे में. धुस्का, रुगड़ा और चिलका रोटी जैसे 10 पारंपरिक ट्राइबल फूड्स, जो यहां के खान-पान की असली पहचान हैं.

Jharkhand Tribal Foods: झारखंड अपनी हरियाली, जंगल, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है. यहां की पहचान सिर्फ घूमने की जगहों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का खान-पान भी काफी खास है. World Tribal Day के मौके पर अगर आप झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं, तो यहां के पारंपरिक खान-पान को भी जरूर समझें. झारखंड टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार नीचे बताएं गए झारखंड के इन ट्राइबल फूड्स (Jharkhand Tribal Foods) के बारे में आइए जानते हैं.

रुगड़ा की सब्जी

रुगड़ा एक तरह का जंगली मशरूम है, जो खासकर बारिश के मौसम में देखने को मिलता है. इसे साफ करके मसालों के साथ सब्जी की तरह बनाया जाता है. इसी तरह पुटू भी जंगल से मिलने वाला पारंपरिक मशरूम है, जिसे स्थानीय तरीके से पकाकर खाया जाता है. 

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धुस्का का स्वाद है बिल्कुल देसी

धुस्का झारखंड के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजनों में से एक है. इसे चावल और दाल के मिश्रण से तैयार किया जाता है और फिर तेल में पकाया जाता है. आमतौर पर इसे चना या आलू की सब्जी के साथ खाया जाता है. बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम धुस्का नाश्ते या खाने के लिए काफी पसंद किया जाता है.

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छिलका रोटी (Jharkhand Tribal Foods)

छिलका रोटी भी झारखंड के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा है. इसे चावल और दाल के मिश्रण से तैयार किया जाता है और तवे पर सेंका जाता है. इसे चटनी, सब्जी या दही के साथ खाया जा सकता है. इसका स्वाद सामान्य रोटी से काफी अलग होता है.

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मीठा पीठा और कुदारुम की चटनी

झारखंड के पारंपरिक खाने में पीठा भी अपनी खास जगह रखता है. मीठा पीठा स्वाद में हल्का मीठा और देसी होता है, जिसे खास मौकों पर बनाया जाता है. वहीं कुदारुम की चटनी अपने अलग स्वाद के लिए जानी जाती है. मीठे पीठे के साथ चटनी का कॉम्बिनेशन पारंपरिक खान-पान की खास झलक देता है.

कोइनर साग

कोइनर साग झारखंड के देसी सागों में शामिल है. इसे साधारण मसालों के साथ पकाकर खाया जाता है. गांवों में मौसम के अनुसार मिलने वाले स्थानीय सागों को भोजन में शामिल करने की परंपरा काफी पुरानी है. कोइनर साग (Jharkhand Tribal Foods) का स्वाद भी इसी देसी खान-पान की याद दिलाता है.

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भाजी साग

झारखंड की थाली में अलग-अलग तरह के साग और भाजी को भी पसंद किया जाता है. भाजी साग (Jharkhand Tribal Foods) को हल्के मसालों के साथ पकाकर रोटी या चावल के साथ खाया जा सकता है. इसकी खासियत यही है कि इसे ज्यादा तामझाम के बिना घर के सामान्य मसालों से तैयार किया जाता है.

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डुबकी (Jharkhand Tribal Foods)

डुबकी झारखंड के पारंपरिक खाने में शामिल एक देसी व्यंजन है. इसे स्थानीय तरीके से तैयार किया जाता है और इसका स्वाद घर के बने सादे भोजन जैसा लगता है. अलग-अलग इलाकों और परिवारों में इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग भी हो सकता है.

खपड़ा रोटी

खपड़ा रोटी झारखंड के पारंपरिक खान-पान की एक खास रोटी है. इसे बनाने का तरीका आम रोटी से अलग होता है और इसका स्वाद भी काफी देसी लगता है. इसे सब्जी, चटनी या दूसरी पारंपरिक चीजों के साथ खाया जाता है.

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मड़ुआ रोटी

मड़ुआ यानी रागी से बनी रोटी भी झारखंड के पारंपरिक भोजन का हिस्सा रही है. इसका स्वाद गेहूं की रोटी से अलग होता है. इसे दाल, सब्जी या चटनी के साथ खाया जाता है. स्थानीय अनाजों से बने ऐसे व्यंजन झारखंड के पुराने खान-पान की पहचान हैं.

आरसा (Jharkhand Tribal Foods)

आरसा झारखंड का एक पारंपरिक मीठा पकवान है. इसे खास मौकों और त्योहारों पर बनाने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है. इसका स्वाद देसी मिठाई जैसा होता है और इसे बनाने में स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है.

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By स्मिता दे

स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग इनकी रुचि है. ये लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ और ट्रेंडिंग टॉपिक्स कवर करती है. रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी उपयोगी और रोचक जानकारी रीडर्स तक पहुंचाना इन्हें पसंद है.

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