Hug Day Special: अपने पसंदीदा इंसान को गले लगाने के हैं कई फायदे, यहां जाने

वैलेंटाइन वीक का छठा दिन हग डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन प्रेमी जोड़े एक दूसरे को गले लगाकर अपने प्यार का इजहार करते हैं. ऐसे में आज हम इस आर्टिकल में आपको गले मिलने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं. तो चलिए इनके बारे में डीटेल से जानते हैं.

Benefit Of Hugs: प्रेमी जोड़ियों के बीच इस समय वैलेंटाइन वीक सेलिब्रेट किया जा रहा है. वैलेंटाइन वीक का छठा दिन यानी कि 12 फरवरी को हग डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. तनाव से भरी इस दुनिया में, हग करने जैसे इजी एक्टिविटी आराम के एक यूनिवर्सल सोर्स के रूप में सामने आया है. इससे मिलने वाली गर्मजोशी और इमोशनल कनेक्शन के अलावा, वैज्ञानिक रिसर्च इस सदियों पुराने भाव से जुड़े अनलिमिटेड हेल्थ बेनिफिट्स का खुलासा करता है. ऐसी दुनिया में जहां ह्यूमन कनेक्शन अक्सर बिजी सिड्यूल और सोशल नॉर्म्स से जूझते हैं, एक प्यार से भरा हग इमोशनल और फिजिकल दोनों बीमारियों के इलाज के रूप में सामने आता है. हग करने के साइंस बैक्ड फायदे हमें इस एक्टिविटी को पूरे दिल से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपसे अपने पसंदीदा इंसान को गले लगाने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं. तो चलिए इनके बारे में डीटेल से जानते हैं.

स्ट्रेस में कमी

जब जीवन बोझिल हो जाता है, तो गले लगाना एक पावरफुल दोस्त साबित हो सकता है. रिसर्च से पता चलता है कि तनावपूर्ण समय के दौरान सपोर्टिव टच न केवल गले मिलने वाले व्यक्ति को आराम देता है, बल्कि सपोर्ट देने वाले व्यक्ति का तनाव भी कम करता है. न्यूरोलॉजिकल रिस्पॉन्स मेटरनल बेहेवियर से जुड़े रिवार्ड्स को प्रतिबिंबित करती है, जो स्ट्रेस-रिलीविंग पोटेंशियल को उजागर करती है.

इम्यून सिस्टम को करता है बूस्ट

हैरानी की बात यह है कि गले लगाने का तनाव कम करने वाला प्रभाव हमारी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने तक जाता है. रिसर्च से पता चलता है कि रेगुलर हग सहित मजबूत सपोर्ट सिस्टम वाले व्यक्तियों में बीमारी की आशंका कम होती है. बीमारी के मामलों में भी, मजबूत सपोर्ट नेटवर्क वाले लोगों को हल्के लक्षणों का अनुभव होता है. गले लगाने की इम्यून बूस्टिंग पावर उन्हें बीमार पड़ने के खिलाफ एक एक्टिव उपाय के रूप में स्थापित करती है.

हार्ट हेल्थ के लिए जरुरी

गले मिलना सिर्फ आत्मा के लिए ही अच्छा नहीं है. बल्कि यह हार्ट हेल्थ के लिए भी एक प्रैक्टिस है. रोमांटिक पार्टनर्स में हाथ पकड़ने की तुलना गले लगाने से करने वाले रिसर्च से पता चलता है कि बाद वाले से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में महत्वपूर्ण कमी आती है. ये निष्कर्ष स्नेहपूर्ण रिश्ते को डेवेलप करने के संभावित हार्ट से जुड़े फायदों को रेखांकित करते हैं, गले लगाने से हार्ट हेल्थ पर पड़ने वाले पॉजिटिव इफ़ेक्ट पर जोर दिया जाता है.

खुशी में ऑक्सीटोसिन की भूमिका

ऑक्सीटोसिन, जिसे कडल हार्मोन भी कहा जाता है, गले लगने के दौरान सेंटर लेवल पर होता है. खुशी और तनाव कम करने से जुड़ा यह रसायन, जब हम शारीरिक निकटता में संलग्न होते हैं तो वृद्धि का अनुभव करता है. महिलाओं में विशेष रूप से प्रभावशाली, ऑक्सीटोसिन ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस हार्मोन नॉरपेनेफ्रिन में कमी लाता है. करीबी रिश्तों में गले मिलने की आवृत्ति, चाहे वह रोमांटिक पार्टनर के साथ हो या किसी शिशु के साथ, इन सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाती है.

उपचारात्मक स्पर्श के माध्यम से दर्द में कमी

इसके इमोशनल इफ़ेक्ट से परे, गले लगाने सहित टच में उपचारात्मक गुण होते हैं. उपचारात्मक स्पर्श इलाज से गुजर रहे फाइब्रोमाल्जिया रोगियों पर शोध जीवन की क्वालिटी में वृद्धि और दर्द में कमी दर्शाता है. टच के एक स्पर्शात्मक रूप के रूप में गले लगाना, शारीरिक दर्द को कम करने और वेल बीइंग की बेहतर इमोशन में योगदान देने का वादा करता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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