Happy father's Day 2020 : जानें क्या है इतिहास, पिता क्यों होते हैं इतने खास...

Happy fathers Day 2020 Know about history Importance and significant : पिता के लिए कहा जाता है कि वह आग पर चढ़े उस तवे की तरह है जो खुद तो हमेशा जलता रहता है, लेकिन अपने परिवार को नरम मुलायम रोटियां खिलाता है. पिता शब्द काफी सशक्त है, क्योंकि हर कोई इस शब्द में सहारा, संबल और प्रेरणा ढूंढ़ता है. ऐसे पिता के प्रति प्रेम तो हर किसी के मन में है, लेकिन उसे प्रदर्शित करने के लिए जून के तीसरे रविवार का खास दिन तय किया गया है.

पिता के लिए कहा जाता है कि वह आग पर चढ़े उस तवे की तरह है जो खुद तो हमेशा जलता रहता है, लेकिन अपने परिवार को नरम मुलायम रोटियां खिलाता है. पिता शब्द काफी सशक्त है, क्योंकि हर कोई इस शब्द में सहारा, संबल और प्रेरणा ढूंढ़ता है. ऐसे पिता के प्रति प्रेम तो हर किसी के मन में है, लेकिन उसे प्रदर्शित करने के लिए जून के तीसरे रविवार का खास दिन तय किया गया है.

फादर्स डे का आयोजन पहली बार अमेरिका में 1910 के 19 जून को किया गया था. सोनोरा स्मार्ट डोड ने पहली बार फादर्स डे का आयोजन किया था. उनकी माता का देहांत बचपन में हो गया था और उनके पिता ने उन्हें बहुत जिम्मेदारी और प्यार से पाला था इसलिए मदर्स डे से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने फादर्स डे की शुरुआत की थी. उसके बाद 1924 में अमेरिकी राष्ट्रपति कैल्विन कोली ने फादर्स डे को मान्यता दे दी. 1966 में अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने 1966 में यह घोषणा कर दी कि हर वर्ष जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जायेगा.

फादर्स डे का आयोजन अलग-अलग देशों में अलग-अलग तारीख को होता है. लेकिन भाव एक ही है, पिता के प्रति सम्मान और प्रेम. पिता के प्रति प्यार जताने के लिए जरूरी है कि हम उन्हें कुछ गिफ्ट दें. यह गिफ्ट कुछ भी हो सकता है. बस आपको ध्यान यह रखना है कि आपके पिता को यह एहसास हो कि वे आपके लिए खास हैं.

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अगर आप नौकरीपेशा हैं और पिता के साथ समय ज्यादा नहीं बीता पाते हैं, तो यह ध्यान रखें कि आप उन्हें समय दें. उनकी रुचि का खाना बनायें उन्हें खुश करें. उनके जमाने की मूवी दिखायें, गाने सुनायें. उन्हें फोन गिफ्ट कर सकते हैं, ताकि वे अपनों के संपर्क में रहें. अगर पिता को पढ़ने का शौक हो तो किताबें खरीद कर दें. उनसे बातें करें. उद्देश्य यह होना चाहिए कि पिता खास महसूस करें.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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