सर्जरी से डरती थीं महिलाएं, डॉ. निवेदिता चक्रवर्ती ने बताया अब बिना बड़े चीरे कैसे होता है ऑपरेशन

Laparoscopic Surgery Awareness: सर्जरी का नाम सुनते ही डर जाना आम बात है, लेकिन बदलती मेडिकल तकनीक ने इलाज का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. इस खास बातचीत में महिलाओं की सेहत, समय पर जांच, सुरक्षित इलाज और जागरूकता से जुड़ी कई ऐसी जरूरी बातें सामने आई हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. एक छोटी सी सावधानी कई बड़ी परेशानियों से बचा सकती है.

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Laparoscopic Surgery Awareness: डॉक्टर साहब, पेट पूरा काटिएगा क्या? बहुत डर लग रहा है… रांची के एक बड़े अस्पताल की ओपीडी में बैठी एक महिला कांपते हाथों से अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पकड़े डॉक्टर को देख रही थी. उसकी आंखों में बीमारी से ज्यादा डर उस लंबे चीरे, अनगिनत टांकों और महीनों तक बिस्तर पर पड़े रहने का था, जो अक्सर हर भारतीय महिला के मन में सर्जरी का नाम सुनते ही घर कर जाता है. लेकिन सामने बैठीं रांची की जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. निवेदिता चक्रवर्ती ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ थामा और कहा, अब वो दौर नहीं रहा जब बीमारी ठीक करने के लिए पेट को पूरा चीरा जाता था. आज की मेडिकल साइंस सुई से भी कम दर्द में बड़ी से बड़ी गांठ निकाल देती है. प्रभात खबर की खास बातचीत में डॉ. निवेदिता ने लेप्रोस्कोपी से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं, जिन्हें हर महिला और उसके परिवार को जरूर जानना चाहिए.

जब टीवी स्क्रीन पर दिखने लगा पेट के अंदर का हाल

डॉ. निवेदिता बताती हैं कि गांवों और छोटे कस्बों से आने वाले कई लोग इसे “लेजर वाला ऑपरेशन” समझ लेते हैं, जबकि असल में यह लेप्रोस्कोपी यानी मिनिमल एक्सेस सर्जरी है. उन्होंने आसान भाषा में समझाते हुए कहा कि, पहले 8 सेंटीमीटर तक लंबा चीरा लगाकर पेट के अंदर देखा जाता था. लेकिन अब नाभि के पास सिर्फ 10 मिलीमीटर और पेट के आसपास 5-5 मिलीमीटर के छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं. इन्हीं रास्तों से एक छोटा कैमरा पेट के अंदर जाता है और बाहर लगी बड़ी स्क्रीन पर अंदर का पूरा हिस्सा साफ-साफ दिखाई देता है. कई बार तो मरीज के परिवार वालों को भी स्क्रीन पर दिखाया जाता है कि बीमारी कहां थी और उसे कैसे हटाया गया.

कल ऑपरेशन हुआ, आज मरीज अपने पैरों पर

पुरानी ओपन सर्जरी के बाद महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती थी कि घर का काम कौन करेगा, बच्चों को कौन संभालेगा. क्योंकि ऐसे ऑपरेशन के बाद कई हफ्तों तक बिस्तर पर आराम करना पड़ता था. टांकों में इंफेक्शन, घाव पकने और बाद में हर्निया जैसी दिक्कतों का खतरा भी बना रहता था. लेकिन लेप्रोस्कोपी में छोटा छेद होने की वजह से दर्द बेहद कम होता है. डॉ. निवेदिता बताती हैं कि कई मरीजों को ऑपरेशन के अगले ही दिन चलाया जाता है और एक हफ्ते के भीतर वे सामान्य जिंदगी में लौट आती हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि शरीर पर बड़े निशान भी नहीं पड़ते.

पैसे बचाने के चक्कर में जान जोखिम में न डालें

बातचीत के दौरान डॉ. निवेदिता ने गांवों में होने वाले गलत ऑपरेशनों की भयावह सच्चाई भी शेयर की. उन्होंने बताया कि एक महिला लगातार पेट दर्द और सूजन की शिकायत लेकर आई थी. जब दोबारा ऑपरेशन किया गया, तो पता चला कि पुराने ऑपरेशन के दौरान पेट साफ करने वाला कपड़ा ही अंदर छूट गया था. धीरे-धीरे शरीर के अंग उस कपड़े से चिपक गए और उसकी आंतें बुरी तरह जकड़ गईं. डॉक्टर के मुताबिक, अगर सही समय पर इलाज न मिलता तो महिला की जान भी जा सकती थी. उन्होंने यह भी बताया कि बिना प्रशिक्षित लोगों से कराए गए गर्भपात के कारण बच्चेदानी में छेद, पेशाब की थैली कटने और पूरे शरीर में इंफेक्शन फैलने जैसे गंभीर मामले भी सामने आते हैं.

एक महिला की खामोशी ने बढ़ा दी बीमारी

डॉ. निवेदिता ने महिलाओं की उस आदत पर भी चिंता जताई, जिसमें वे शर्म या झिझक के कारण अपनी तकलीफ छुपाती रहती हैं. उन्होंने हाल का एक मामला शेयर करते हुए बताया कि एक बुजुर्ग आदिवासी महिला पिछले 6 महीने से लगातार खूनी स्राव और भारी ब्लीडिंग की समस्या झेल रही थी, लेकिन शर्म के कारण उसने घर में किसी को कुछ नहीं बताया. जब दर्द असहनीय हो गया और शरीर में सूजन आने लगी, तब परिवार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा. जांच में पता चला कि उसे स्टेज-4 सर्वाइकल कैंसर था, जो पेशाब की नली तक फैल चुका था. डॉ. निवेदिता कहती हैं कि अगर वह महिला कुछ महीने पहले ही जांच के लिए आ जाती, तो बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती थी.

डॉ. निवेदिता के 4 गोल्डन रूल्स

  • मेडिकल स्टोर से खुद अबॉर्शन की गोली न लें. बिना जांच कराए सीधे दवा खाना खतरनाक हो सकता है. एक्टोपिक प्रेगनेंसी की स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है.
  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें. अगर पीरियड्स बंद होने के बाद दोबारा ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं. यह कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है.
  • बेटियों को HPV वैक्सीन जरूर लगवाएं. आपको अपनी 12 से 15 साल की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के टीके जरूर लगवाने चाहिए.
  • कम उम्र में शादी और बार-बार गर्भपात से बचें क्योंकि कम उम्र में मां बनना और असुरक्षित गर्भपात कराना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है. इसके अलावा सही गर्भनिरोधक सलाह लेना जरूरी है.

एक औरत स्वस्थ रहती है, तो पूरा परिवार खुश रहता है

बातचीत के आखिर में डॉ. निवेदिता ने बेहद भावुक बात कही. उन्होंने कहा कि अगर घर की महिला बीमार पड़ जाए, तो पूरा परिवार बिखर जाता है. इसलिए महिलाओं को अपनी तकलीफ छुपाने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और अपनी सेहत को प्रायोरिटी देनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh Poddar

मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.

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