Do You Know: हम सभी के घरों की छतों पर प्लास्टिक की बड़ी-बड़ी पानी की टंकियां रखी हुई होती ही हैं. इनमें हम सुबह के समय पानी भर देते हैं और अगली सुबह तक इसका इस्तेमाल अपने तरह-तरह के कामों के लिए करते रहते हैं. अगर आप कभी अपनी छत पर जाकर अपने आस-पड़ोस की छत पर नजर डालेंगे तो आप यह नोटिस करेंगे कि ज्यादातर छतों पर जो टंकियां हैं, वे काले रंग की ही हैं. ऐसे तो हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ठंडे दिमाग से यह सोचने की कोशिश की है कि पानी की यह टंकियां लाल, पीले, नीले या फिर सफेद जैसे सुंदर और ज्यादा अट्रैक्टिव रंगों की क्यों नहीं होती हैं? अगर आपको ऐसा लगता है कि इसके पीछे कोई दिखावा या फिर कंपनियों की मर्जी है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. इसके पीछे साइंस का एक बहुत ही मजेदार, यूनिक और बहुत ही जरूरी रूल काम करता है, जिसे हमारे फायदे के लिए कंपनियां इस्तेमाल करती हैं. तो चलिए इस पूरी बात को बिल्कुल ही आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर छत पर रखी पानी की टंकी का रंग ज्यादातर काला ही क्यों होता है.
काई का दुश्मन होता है टंकी का यह काला रंग
हम सभी यह बात जानते हैं कि जहां पर भी पानी जमा होता है, वहां पर कुछ ही समय में हरी-हरी काई जमने लग जाती है. अगर ये काई बढ़ने लगे तो इसकी वजह से पानी गंदा और बदबूदार हो जाता है. अब जरा सोचिए, काई को बढ़ने के लिए किस चीज की जरूरत होती है? उसे चाहिए पानी और सूरज की रोशनी यानी कि धूप. हम सबने देखा है कि जहां भी पानी जमा होता है, वहां हरी-हरी काई जम जाती है. यह काई पानी को गंदा और बदबूदार बना देती है. अब जरा सोचिए, काई को बढ़ने के लिए किस चीज की जरूरत होती है? उसे चाहिए पानी और सूरज की रोशनी यानी धूप. धूप मिलते ही काई फोटोसिंथेसिस की मदद से अपना खाना बनाने लगती है और तेजी से फैलती है. ठीक इसी जगह पर हमारे काम आता है टंकी का यह काला रंग. काले रंग की एक बहुत बड़ी खासियत होती है कि यह अपने पार लाइट को बिल्कुल नहीं जाने देता. जब सूरज की किरणें काली टंकी पर पड़ती हैं, तो टंकी का काला प्लास्टिक उस लाइट को बाहर ही रोक लेता है जिससे टंकी के अंदर एकदम घना अंधेरा रहता है. जब टंकी के अंदर लाइट ही नहीं पहुंचेगी, तो काई अपना खाना नहीं बना पाएगी. इसका रिजल्ट यह होता है कि टंकी के अंदर काई नहीं जम पाती और हमारा पानी लंबे समय तक बिल्कुल साफ और इस्तेमाल होने लायक रहता है.
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सूरज की खतरनाक किरणें भी नहीं कर पाती इसे डैमेज
सूरज की रोशनी में कुछ ऐसी किरणें भी होती हैं जिन्हें हम अल्ट्रावायलेट किरणें या फिर यूवी रेज के नाम से जानते हैं. ये किरणें प्लास्टिक की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं. अगर आप प्लास्टिक की किसी भी सिंपल सी चीज को भी महीनों तक तेज धूप में छोड़ देंगे, तो वह समय के साथ कड़क होकर अपने आप टूटने लग जाती है. टंकी बनाने वाली सभी कंपनियों को यह बात बहुत ही अच्छे से मालूम है. इसलिए वे टंकी के प्लास्टिक में कार्बन ब्लैक नाम का एक खास मटेरियल मिलाती हैं, जो टंकी को काला रंग देता है. इसका असली काम सूरज की उन खतरनाक यूवी किरणों को एब्जॉर्ब करना और उन्हें बेअसर करना होता है. यह एक सबसे बड़ी वजह है कि तेज धूप और गर्मी में भी टंकी का प्लास्टिक सालों-साल तक मजबूत बना रहता है और टंकी क्रैक नहीं होती.
मल्टी-लेयर का कमाल
अगर आपने साइंस पढ़ा है तो आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि काला रंग तो गर्मी को सबसे ज्यादा एब्जॉर्ब करता है, तो फिर काली टंकी का पानी तो उबल जाना चाहिए? आपका सोचना एक तरह से सही भी है, लेकिन इंजीनियर्स ने इसका भी एक जबरदस्त जुगाड़ निकाला है. आजकल मार्केट में जो अच्छी कंपनी की टंकियां आती हैं, वे मल्टी-लेयर यानी कि कई परतों वाली होती हैं. इसकी जो सबसे बाहरी काली लेयर होती है, वह धूप और यूवी रेज को रोकने में मदद करती है. इसके ठीक नीचे बीच में एक ऐसी लेयर होती है जो बाहर की गर्मी को अंदर के पानी तक पहुंचने से रोक देती है. सबसे अंदर की लेयर सफेद या नीले रंग की होती है जो पानी को छूती है और उसे एकदम फ्रेश रखती है. इस खास बनावट की वजह से टंकी का पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं हो पाता.
सेहत के लिए भी फायदेमंद
अगर टंकी के अंदर काई नहीं जमेगी, तो आपको बार-बार छत पर चढ़कर उसे साफ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इसकी टेंशन रहेगी. इसकी वजह से आपके पैसे और मेहनत दोनों की ही बचत होगी. इसके अलावा सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि काई वाले गंदे पानी की वजह से पेट खराब होने और स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा बिल्कुल भी नहीं रहेगा. छत पर रखी यह काली टंकी पानी को पॉल्यूटेड होने से बचाती है और बीमारियों को हमसे दूर रखती है. आपकी टंकी का काला रंग साइंस का एक ऐसा स्मार्ट आईडिया है जो बिना किसी इलेक्ट्रिसिटी या फिर फिल्टर के भी पानी को साफ रखने में मदद करता है.
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