झूठ बोलते समय इंसान का शरीर खुद-ब-खुद करने लगता है ये हरकतें, क्या आपने कभी नोटिस किया है?

Body Language Reading: आज हम आपको बॉडी लैंग्वेज रीडिंग की कुछ ऐसी आसान ट्रिक्स बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप बिना किसी सबूत के भी सामने वाले की बातों के पीछे छिपी सच्चाई को समझ सकते हैं. इन छोटे-छोटे हाव-भाव पर ध्यान देकर आप आसानी से जान सकते हैं कि आखिर दाल में कुछ काला है या नहीं.

Body Language Reading: क्या आपको यह पता है कि जुबान आपसे जितना मर्जी झूठ क्यों न कह ले, लेकिन सामने वाले इंसान का शरीर कभी भी झूठ नहीं बोल पाता है. साइकोलॉजी के अनुसार जब हम झूठ बोलते हैं तो हमारे दिमाग में स्ट्रेस होने लगता है और न चाहते हुए भी हमारे शरीर में कुछ ऐसे संकेत दिखने लगते हैं, जिन्हें छुपाना बिलकुल भी पॉसिबल नहीं होता है. क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ है कि किसी से बात करते समय आपको अंदर से अजीब सा फील हो रहा होता है कि कुछ तो गड़बड़ है, लेकिन बिना किसी सबूत के हम सच्चाई का पता भी नहीं लगा पाते हैं. अगर आप भी इसी वजह से हर बार धोखे का शिकार हो जाते हैं, तो अब आगे से आपके साथ ऐसा कभी नहीं होगा. आज हम आपको बॉडी लैंग्वेज रीडिंग के कुछ आसान और सिंपल ट्रिक्स बताने जा रहे हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप काफी आसानी से सामने वाले इंसान के झूठ को पकड़ सकते हैं. तो चलिए इन ट्रिक्स के बारे में डीटेल से जानते हैं.

नजरें चुराना या बहुत ज्यादा आई कॉन्टैक्ट

हम हमेशा से यह सुनते आये हैं कि हमारी आंखें ही दिल का आईना होती हैं. यह एक बड़ी वजह है कि जब कोई आपसे झूठ कहता है, तो वह आपसे सीधे आंखें मिलाने में कतराता है. वह नीचे देखने लगेगा या कमरे में इधर-उधर नजरें घुमाने लगेगा क्योंकि उसे पकड़े जाने का डर होता है. इसके ठीक विपरीत, कुछ लोग खुद को सच्चा साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा आंखें मिलाते हैं और बिना पलक झपकाए आपको घूरने लगते हैं. अगर कोई अजीब तरीके से नजरें चुरा रहा है या जरूरत से ज्यादा घूर रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है.

बार-बार चेहरे और नाक को छूना

झूठ बोलते समय इंसान के शरीर में एड्रेनालाईन नाम का हार्मोन तेजी से बढ़ने लगता है. इससे चेहरे और नाक के पास की नसों में हल्की खुजली या झनझनाहट होने लगती है. अगर बातचीत के दौरान सामने वाला व्यक्ति बार-बार अपनी नाक को रगड़ रहा है, मुंह को हाथ से ढक रहा है, या अपनी ठुड्डी और गालों को छू रहा है, तो यह इस बात का साफ इशारा है कि वह असहज है और शायद कोई बात छुपा रहा है.

शरीर का बहुत ज्यादा हिलना या बिल्कुल सुन्न हो जाना

बता दें जब भी कोई व्यक्ति सच बोलता है, तो उसकी बॉडी लैंग्वेज बिलकुल ही नेचुरल होती है. लेकिन झूठ बोलने वाला इंसान या तो बहुत ज्यादा हिलेगा-डुलेगा या फिर वह बिल्कुल सीधा और एकदम स्टिफ होकर बैठ जाएगा. वह अपनी बॉडी मूवमेंट को रोकने की कोशिश करता है ताकि उसका झूठ पकड़ा न जाए. यह अचानक आया बदलाव साफ झूठ की तरफ इशारा करता है.

बातचीत में जरूरत से ज्यादा सफाई देना

अगर आप किसी से एक सिंपल सा सवाल पूछते हैं और वह उसका छोटा सा जवाब देने की बजाय लंबी-चौड़ी कहानी सुनाने लगे, तो आपको जल्दी से सतर्क हो जाना चाहिए. झूठ बोलने वाले लोग अक्सर बात को सच दिखाने के लिए जरूरत से ज्यादा डिटेल्स और जानकारियां देने लगते हैं. वे इस तरह की चीजें बताने लग जाते हैं जिनके बारे में आपने उनसे पूछा भी नहीं होता है. उन्हें ऐसा लगता है कि जितना ज्यादा वे बोलेंगे, उनका झूठ उतना ही सच लगेगा. असल में ऐसा होता नहीं है और कुछ ही देर में वे खुद ही अपने बुने जाल में फंस जाते हैं.

आवाज का बदलना और अटकना

दिमाग पर प्रेशर होने के कारण झूठ बोलते समय इंसान के बोलने का तरीका बदल जाता है. या तो उसकी आवाज की पिच अचानक ऊंची हो जाएगी, या वह बहुत धीरे और अटक-अटक कर बोलने लगेगा. इसके अलावा, झूठ बोलते समय गला सूखने लगता है, इसलिए सामने वाला बार-बार थूक निगल सकता है या अपनी आवाज साफ करने के लिए खांसने का नाटक कर सकता है.

डिफेंसिव पोस्चर अपना लेना

जब किसी को लगता है कि उसका झूठ पकड़ा जाने वाला है, तो उसका शरीर अनजाने में खुद को डिफेंड करने के पोस्चर में आ जाता है. झूठ बोलने वाले लोग अक्सर अपने दोनों हाथों को चेस्ट के पास फोल्ड कर लेते हैं या फिर अपने पैरों को क्रॉस कर लेते हैं. वे आपके और अपने बीच में कोई तकिया, बैग या कप जैसी चीज रख लेते हैं ताकि एक दूरी बनी रहे.

फेक स्माइल पहचानें

अगर आप किसी का झूठ पकड़ना चाहते हैं, तो आपको उसकी मुस्कान पर ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए. सच्ची मुस्कान पूरे चेहरे पर दिखती है और उससे आंखों के पास हल्की रिंकल्स भी बनती हैं. लेकिन जब कोई झूठ बोल रहा होता है या अपनी घबराहट छुपाने की कोशिश करता है, तो वह केवल अपने होठों से मुस्कुराता है. इसके अलावा उसकी आंखों में वो चमक या खुशी नहीं होती. ऐसी बनावटी मुस्कान को देखकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि सामने वाला दिल से बात नहीं कर रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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