Tum Dena Saath Mera: शो ‘तुम देना साथ मेरा’ एपिसोड की शुरुआत में अपराजिता सभी के सामने ललित को रोकती है और अपना मंगलसूत्र उतार देती है. वह कहती है कि यह मंगलसूत्र अब उसके लिए प्यार का प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऐसी जंजीर बन चुका है जिसने उसकी आजादी, सम्मान और खुशियां छीन ली हैं. अपराजिता कहती है कि उसने ललित के साथ घर नहीं, बल्कि एक कैदखाने जैसी जिंदगी बिताई है. अब वह खुद को उस रिश्ते से आजाद करना चाहती है. यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह जाते हैं.
परिवार के सामने आया घरेलू हिंसा का सच
अपराजिता भावुक होते हुए बताती है कि पिछले चार सालों से ललित उसके साथ गलत व्यवहार कर रहा था. वह परिवार को यह भी बताती है कि ललित ने उसके नाम पर कर्ज लिया था, जिसकी वजह से उसे लोगों की बातें और अपमान झेलना पड़ा. अपराजिता कहती है कि शादी के बाद उसने अपने रिश्ते को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन बदले में उसे सिर्फ दर्द मिला. दूसरी तरफ ललित खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश करता है. वह दावा करता है कि उसने जो कुछ भी किया, वह परिवार की खुशियों के लिए किया था.
परिवार बना अपराजिता की ताकत
जब ललित जबरदस्ती अपराजिता को अपने साथ ले जाने की कोशिश करता है, तब मालती और परिवार के अन्य सदस्य उसका विरोध करते हैं. अविनाश भी ललित को चेतावनी देता है कि वह अपराजिता से दूर रहे. ललित समाज का हवाला देते हुए कहता है कि तलाकशुदा महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता, लेकिन अपराजिता उसका जवाब देते हुए कहती है कि समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है. रामगोपाल अपनी बेटी को भरोसा दिलाते हैं कि वह हमेशा उसके साथ रहेंगे. मालती भी साफ कर देती हैं कि उनकी बेटी किसी पर बोझ नहीं है और उसे सम्मान के साथ जीने का पूरा हक है.
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