बंटवारे का दर्द, बिछड़े रिश्ते और अधूरी मोहब्बत... 1947 पर बनीं ये 9 फिल्में जरूर देखिए

15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के साथ भारत-पाकिस्तान का विभाजन भी हुआ, जिसने लाखों जिंदगियों को बदल दिया. यह विभाजन अपने साथ दर्द और बिछड़ने की कहानियां लाया. ऐसी ही दर्दनाक दास्तानों को पर्दे पर उकेरती हैं ये 9 फिल्में.

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन इसी के साथ देश का विभाजन भी हुआ. भारत और पाकिस्तान के बंटवारे ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी. किसी ने अपना घर खोया, तो कोई अपनों से हमेशा के लिए बिछड़ गया. इस दर्दनाक दौर की कहानियां बॉलीवुड और भारतीय सिनेमा में भी दिखाई गई हैं. कई फिल्मों ने बंटवारे को प्यार, रिश्तों, हिंसा और इंसानियत के नजरिए से दिखाया. 15 अगस्त के मौके पर आइए जानते हैं ऐसी ही 9 फिल्मों के बारे में.

‘मम्मो’ में दिखी सरहद की मजबूरी

साल 1994 में आई ‘मम्मो’ में फरीदा जलाल और सुरेखा सीकरी जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी मम्मो नाम की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बंटवारे के समय पाकिस्तान चली जाती है. कई साल बाद वह भारत लौटकर अपनी बहन से मिलने आती है, लेकिन कागजी नियमों के कारण उसे यहां रहने में परेशानी होती है. फिल्म के जरिए दिखाया गया है कि एक सरहद किस तरह लोगों को उनके अपनों से दूर कर सकती है.

मम्मो, फोटो - इंस्टाग्राम

‘पिंजर’ में महिलाओं के दर्द की कहानी

‘पिंजर’ साल 2003 में रिलीज हुई थी. उर्मिला मातोंडकर और मनोज बाजपेयी की इस फिल्म में बंटवारे के दौरान महिलाओं के साथ हुई मुश्किलों को दिखाया गया है. फिल्म की कहानी पुरो के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका अपहरण हो जाता है. जब वह किसी तरह अपने परिवार के पास वापस पहुंचती है, तो उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया जाता है. फिल्म बंटवारे के दौर की एक ऐसी सच्चाई सामने लाती है, जिसे देखना आसान नहीं है.

‘पार्टीशन’ में अधूरी रह गई मोहब्बत

साल 2007 में आई ‘पार्टीशन’ में जिमी शेरगिल और क्रिस्टिन क्रुक मुख्य भूमिका में थे. फिल्म की कहानी बंटवारे के समय की है, जब दंगों के बीच एक मुस्लिम लड़की अपने परिवार से अलग हो जाती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात एक पूर्व सिख सैनिक से होती है और दोनों के बीच प्यार पनपता है. लेकिन धर्म और समाज की दीवार उनके रिश्ते के लिए बड़ी मुश्किल बन जाती है.

‘खामोश पानी’ में सामने आया पुराना दर्द

‘खामोश पानी’ में किरण खेर ने मुख्य भूमिका निभाई थी. फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसका अतीत बंटवारे की एक दर्दनाक घटना से जुड़ा हुआ है. वह पाकिस्तान के एक गांव में अपने बेटे के साथ रहती है. जब वहां धार्मिक तनाव बढ़ता है, तो उसके पुराने जीवन की कई बातें सामने आने लगती हैं. इसके बाद उसकी जिंदगी में कई बदलाव आते हैं.

खामोश पानी, फोटो - इंस्टाग्राम

‘अर्थ’ में एक बच्ची की नजर से दिखा बंटवारा

साल 1998 में आई ‘अर्थ’ में आमिर खान, नंदिता दास और राहुल खन्ना जैसे कलाकार नजर आए. फिल्म में बंटवारे की कहानी को एक बच्ची की नजर से दिखाया गया है. लाहौर में अलग-अलग धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं, लेकिन बंटवारे के समय बढ़ती नफरत और हिंसा उनके रिश्तों को बदल देती है. फिल्म बताती है कि बड़े राजनीतिक फैसलों का असर आम लोगों की जिंदगी पर कितना गहरा पड़ सकता है.

‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ में दिखी हिंसा और इंसानियत

‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ बंटवारे पर बनी चर्चित फिल्मों में से एक है. फिल्म में एक ऐसे गांव की कहानी दिखाई गई है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहते हैं. लेकिन बंटवारे के दौरान जब हिंसा बढ़ती है और लाशों से भरी ट्रेन वहां पहुंचती है, तो गांव का माहौल पूरी तरह बदल जाता है. नफरत के बीच फिल्म इंसानियत और त्याग की कहानी भी सामने लाती है.

‘भाग मिल्खा भाग’ में दिखा बंटवारे का दर्द

फरहान अख्तर की ‘भाग मिल्खा भाग’ सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है. फिल्म में मिल्खा सिंह के बचपन और बंटवारे के दौरान उनके परिवार पर आई मुश्किलों को भी दिखाया गया है. उन्होंने बचपन में हिंसा का दर्द देखा और अपनों को खोया. इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और आगे चलकर भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं. फिल्म में उनका संघर्ष और उस मुश्किल दौर से निकलने की कहानी काफी भावुक कर देती है.

‘गदर: एक प्रेम कथा’ में सरहद के पार की मोहब्बत

सनी देओल और अमीषा पटेल की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ ने बंटवारे की पृष्ठभूमि में एक प्रेम कहानी दिखाई. फिल्म में तारा सिंह और सकीना की कहानी के जरिए दिखाया गया कि किस तरह सरहद और दंगे इंसानी रिश्तों के सामने दीवार बन जाते हैं. तारा सिंह अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए पाकिस्तान तक पहुंच जाता है. फिल्म में प्यार, परिवार और देश के जज्बे को बड़े फिल्मी अंदाज में पेश किया गया है.

‘गदर: एक प्रेम कथा’, फोटो - इंस्टाग्राम

‘मैं वापस आऊंगा’ में फिर दिखेगा बंटवारे का दर्द

बंटवारे की कहानियों पर बनी फिल्मों की इस लिस्ट में ‘मैं वापस आऊंगा’ का नाम भी शामिल किया जा सकता है. फिल्म की कहानी बंटवारे के समय अलग हुए कीनू और जिया के इर्द-गिर्द है. दोनों एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं, लेकिन कीनू के दिल में जिया से दोबारा मिलने की उम्मीद बनी रहती है. कई दशक गुजरने के बाद भी उसका इंतजार खत्म नहीं होता. कहानी बंटवारे के साथ टूटे उन रिश्तों की याद दिलाती है, जिनका दर्द सालों बाद भी खत्म नहीं हुआ.

ये भी पढ़ें: Independence Day Special: आर्मी से एयरफोर्स तक, वर्दी पहनकर छा गए ये बॉलीवुड सितारे

ये भी पढ़ें: बंटवारा 1947 हिट हुई या सुपरहिट... फिल्म क्रिटिक्स ने दिए इतने स्टार्स, रिव्यू पढ़कर बनाए वीकेंड में देखने का प्लान


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Nikita Singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >