Thangalaan: चियान विक्रम की फिल्म ‘थंगालान’ की कहानी KGF के सच्चे इतिहास पर आधारित

Thangalaan: चियान विक्रम की मेगा बजट फिल्म थंगालान 15 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. इस फिल्म की कहानी KGF के सच्चे इतिहास पर आधारित है. आइए जानते हैं इसकी कहानी.

Thangalaan: चियान विक्रम की बहुचर्चित साउथ इंडियन फिल्म ‘थंगलान’ 15 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. फिल्म का निर्देशन पा. रंजीत ने किया है. वहीं, फिल्म को प्रोड्यूस के.ई. ज्ञानवेल ने किया है. थंगालान पूरे 5 भाषा में रिलीज होगी, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम शामिल हैं. फिल्म को 100 करोड़ रुपए के बजट पर बनाया गया है.

अब बात करते हैं फिल्म की कहानी के बारे में, जिसे लेकर दर्शक काफी उत्सुक हैं. हाल ही में फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हुआ था, जिसने दर्शकों की बेसब्री और भी बड़ा दी. ट्रेलर को देखकर दर्शकों को सौ टका प्रशांत नील की निर्देशित फिल्म केएफजी की याद आने वाली है. ऐसे में आपके मन में यह सवाल भी आएगा कि कहीं केजीएफ का कुछ कनेक्शन थंगालान से तो नहीं, कहीं यह सच्ची घटना पर आधारित तो नहीं? इन सब सवालों का जवाब हम आपके लिए लेकर आए हैं.

थंगालान ट्रेलर

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क्या थंगालान सच्ची कहानी पर आधारित है?

थंगालान के ट्रेलर को देख आपको इस बात का पता चल ही गया होगा कि फिल्म की कहानी आपको एक अलग दुनिया में ले जाने वाली है, जिसमें खून खराबा, जंग, दर्द, जुल्म और बहुत कुछ देखने को मिलने वाला है. लेकिन क्या यह दुनिया सच्ची है, क्या इसकी कहानी सच्ची है? तो जवाब है, जी हां. दरअसल, इस फिल्म की कहानी कर्नाटक के कोलार गोल्ड माइंस (KGF) की है. अब यह सुनकर आप सोचेंगे की इसकी कहानी का संबंध यश की फिल्म KGF से है तो बिल्कुल नहीं, क्योंकि यश की केजीएफ का वास्तविकता से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था. लेकिन इस फिल्म में केजीएफ के इतिहास को दर्शाया गया है, जो आजादी के समय से भी पहले का है. जब लगभग 121 सालों तक माइन को खोदा गया था और तकरीबन 800 टन सोना निकाला गया. इस दौरान लाखों मजदूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. यह कहानी है उस सोने की को जमीन के बाहर आने तक मजदूरों के खून से लाल पड़ गया था.

बात अगर फिल्म की करें तो फिल्म में चियान विक्रम ने एक आदिवासी का किरदार निभाया है, जो अंग्रेजों से यह दावा करता है, कि केवल वही सोना निकालने में मदद कर सकता है. हालांकि, अब फिल्म में अंग्रेजों अत्याचार, मजदूरों की हालत और कोलार गोल्ड माइंस की कहानी को कैसे और कितने सही तरीके से पेश किया जाता है, उसे जानने के लिए 15 अगस्त 2024 तक का इंतजार करना पड़ सकता है.

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Published by: Sheetal choubey

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मूल रूप से बिहार के बक्सर की रहने वाली शीतल की शुरुआती पढ़ाई कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुई. इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शब्द सांची से की, जहां उन्होंने एजुकेशन और एंटरटेनमेंट दोनों बीट्स पर काम किया. इसी दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग के साथ वॉइस ओवर और Adobe Premiere Pro पर बेसिक वीडियो एडिटिंग का अनुभव भी हासिल किया.

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