the narmada story movie :फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ बीते शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. इस फिल्म का चेहरा रियल लाइफ आइपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद हैं. नर्मदा नदी, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म और एक्टिंग करियर पर सिमाला प्रसाद की उर्मिला कोरी से हुई बातचीत .
इस फिल्म में भी आपने वर्दी पहनी हैं ,आपके किरदार से कितनी समानता और असमानता आप पाती हैं ?
असल जिंदगी में मैं आइपीएस अधिकारी हूं, जबकि इस फिल्म में मैंने एक सब-इंस्पेक्टर की भूमिका निभायी है. दोनों का सिलेक्शन प्रोसेस और जिम्मेदारियां एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं. सिर्फ वर्दी पहन लेने से कहानी एक जैसी नहीं हो जाती. फिल्म में मेरे किरदार का बैकग्राउंड, उसका संघर्ष और उसकी परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए वह किरदार भी पूरी तरह अलग हो जाता है. समानता सिर्फ इतनी है कि फिल्म में मेरा किरदार हो या वास्तविक जीवन में मैं, हम दोनों ही चाहते हैं कि सभी को बराबरी का न्याय मिले और उसके लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.
फिल्म महिला पुलिस ऑफिसर्स से भेदभाव की बात भी रखती है,आप कभी भेदभाव से गुजरी हैं ?
लोगों की ये मानसिकता रही है. वह पुलिस को पुलिस नहीं बल्कि महिला पुलिस और पुरुष पुलिस के तौर पर देखते हैं. गलती लोगों की भी नहीं है क्योंकि उनकी परवरिश हो या सोशलाजेशन उसी तरह से है. हम जेंडर के परे इंसान की कॉम्पिटेंसी को देखने में दिक्कत महसूस करते हैं वो बात भी यह फिल्म कह रही है और बहुत अच्छे से कह रही है. अपनी बात करूँ तो मुझे इस तरह के भेदभाव से नहीं गुजरना पड़ा है. मुझे लगता है कि हाई लेवल पर ऐसा नहीं होता होगा. मैंने किसी दूसरे का भी नहीं सुना है.
इस फिल्म की शूटिंग कितने दिनों की थी और किस तरह से आपने मैनेज किया ?
छुट्टी ली थी इसके साथ ही परमिशन भी लिया था. तभी यह संभव हो पाया.मेरा शेड्यूल दस से पंद्रह दिनों का था.उसी में मैंने अपना पूरा शूटिंग शेड्यूल पूरा कर लिया था.
बतौर एक्ट्रेस किस तरह की फिल्में आपकी विशलिस्ट में हैं ?
अपनी ड्यूटी से ब्रेक लेकर अगर मैं फिल्मों की शूटिंग करुँगी तो मेरा मकसद यही रहेगा कि मैं मीनिंगफुल सिनेमा का हिस्सा बनूँ. जो लोगों को कुछ सन्देश दे. किसी प्रॉब्लम का सोल्युशन दे.अगर सिर्फ एंटरटेनमेंट होगा तो मैं उनसे नहीं जुड़ूंगी.जो काम मैं वर्दी पहनकर करती हूँ. वह मैं एक्टिंग में भी करना चाहती हूँ. मैं लोगों की मदद करना चाहती हूँ.
आप आईपीएस ऑफिसर हैं शूटिंग करते हुए क्या कभी ये पहलू हावी होता है ?
सेट पर मैं आईपीएस ऑफिसर नहीं, बल्कि आम एक्ट्रेस की तरह होती हूँ, क्योंकि अगर मैं आईपीएस का चोगा उतारूंगी नहीं, तो एक्टर का चोगा पहन कैसे पाउंगी.रियल घटनाओं पर आधारित इस फिल्म के चेहरों की बात करूँ तो रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी,अश्विनी कलसेकर जैसे कई नाम शामिल हैं..जब आपके साथ इतने लीजेंड एक्टर्स होते हैं, तो आपका काम आसान हो जाता है. उनसे आप बहुत कुछ सीख सकते हैं. आईपीएस सेट पर भी रहूंगी तो को एक्टर्स से क्या सीख पाउंगी.
सोशल मीडिया के इस दौर पर कई पुलिस ऑफिसर वर्दी पहनकर रियल बनाते नज़र आते हैं ?
मैं निजी तौर पर इसे गलत मानती हूँ. जब आपने वर्दी पहन ली है तो आपका उद्देश्य काम होना चाहिए. काम के इतर गाडी में चढ़ रहे हैं. गाडी से उतर रहे हैं या कहीं आ रहे हैं. उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरना शोभा नहीं देता है. अगर आपको रील बनाना है तो आप ऑफ ड्यूटी बिना वर्दी के बनाइये.सभी की तरह पुलिस वालों की भी पर्सनल लाइफ होती है लेकिन आप ड्यूटी के वक़्त पर्सनल काम नहीं कर सकते हैं. रील बनाना पर्सनल है
