Rani Chatterjee Bold Scene: भोजपुरी सिनेमा की ग्लैमरस एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने जब ‘मस्तराम’ में बोल्ड अंदाज दिखाया तो हर तरफ उनकी चर्चा होने लगी. जिस अभिनेत्री को कभी ‘अम्मा-भौजी’ वाले किरदारों तक सीमित कर दिया गया था, उसने अचानक ऐसा अवतार दिखाया कि फैंस भी हैरान रह गए. अब सालों बाद रानी ने प्रभात खबर डिजिटल से एक्सक्लूसिव बातचीत में उस चर्चित बस सीक्वेंस की पूरी कहानी सुनाई है.
‘रानी सेक्सी नहीं लग सकती...’
रानी चटर्जी ने बताया कि ‘मस्तराम’ करने के पीछे कोई मजबूरी नहीं थी. इसके पीछे उनके करियर को लेकर बनी एक धारणा को तोड़ने की जिद थी.
वह बताती हैं कि एक समय इंडस्ट्री में उनके बारे में कहा जाने लगा था कि रानी सेक्सी नहीं लग सकतीं, गुड लुकिंग नहीं लग सकतीं और वह सिर्फ अम्मा या भौजी जैसे किरदारों के लिए ही सही हैं.
यही बातें धीरे-धीरे उनके अंदर जिद पैदा करने लगीं.
“मुझे ये अम्मा-भौजी वाला टैग हटाना था. मुझे ये साबित करना था कि मैं एक ही तरह के रोल करने नहीं आई हूं.” रानी ने कहा.
पहले ठुकरा दिया था ‘मस्तराम’
दिलचस्प बात यह है कि जब रानी को ‘मस्तराम’ ऑफर हुई थी, तो उन्होंने शुरुआत में इसे करने से मना कर दिया था. लेकिन मेकर्स ने उन्हें शूटिंग की पूरी प्रक्रिया समझाई.
रानी के मुताबिक, टीम कनाडा से आई थी और उनके चर्चित सीक्वेंस को दो महिला डायरेक्टर्स ने कोरियोग्राफ किया था.
उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से हर मूवमेंट और शॉट समझाया गया था. सीन को तीन कैमरा एंगल से शूट किया जाना था और इसे बिना कट के पूरा किया गया.
स्क्रीन पर ‘बोल्ड’, सेट पर बिल्कुल अलग था माहौल
रानी कहती हैं कि स्क्रीन पर यह सीक्वेंस देखने के बाद दर्शकों को लग सकता है कि आखिर इतना बोल्ड सीन कैसे शूट कर लिया गया. लेकिन सेट पर उनके लिए पूरा सीन एक कोरियोग्राफ्ड परफॉर्मेंस की तरह था.
उन्होंने बताया कि उनके को-एक्टर ने भी उन्हें भरोसा दिया था कि अगर किसी चीज में असहज महसूस हो तो वह मना कर सकती हैं.
रानी के मुताबिक, शूटिंग शुरू होने के बाद उन्हें लगा कि सीक्वेंस डांस स्टेप्स की तरह ही डिजाइन किया गया है और पूरी शूटिंग बेहद स्मूथ तरीके से हो गई.
“कट सुना तो मुझे लगा- यार, ये तो बिना किसी हिचकिचाहट के सब शूट कर लिया.”
मां को लगा- ‘तुमने ये क्यों किया?’
लेकिन असली ड्रामा शूटिंग के बाद शुरू हुआ. जब रानी की मां ने यह वीडियो देखा तो वह काफी नाराज हो गईं. आखिर उनकी बेटी, जो भोजपुरी फिल्मों में किसिंग सीन तक नहीं करती थी, अचानक इतने ग्लैमरस अंदाज में कैसे नजर आ रही थी?
रानी बताती हैं कि मां ने उनसे सवाल किया कि आखिर इसकी जरूरत क्या थी.
इसके बाद रानी ने उन्हें समझाया कि शूटिंग किस तरह हुई थी और पूरा सीक्वेंस कैसे डिजाइन किया गया था. तब जाकर उनकी मां शांत हुईं.
‘या तो सलमान खान लॉन्च या फिर कुछ ऐसा...’
रानी ने बातचीत में अपने करियर की उस बेचैनी का भी जिक्र किया, जिसने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया.
उनका कहना था कि वह एक ही तरह के नॉन-ग्लैमरस किरदारों में बंधना नहीं चाहती थीं. उन्हें ऐसा कुछ करना था, जिसके बाद लोग उनके बारे में अपनी राय बदलने पर मजबूर हों. और ‘मस्तराम’ ने ठीक यही किया.
सीरीज के बाद रानी की चर्चा अचानक बढ़ गई. सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स बढ़े और लोगों का उनके प्रति नजरिया भी बदलने लगा.
‘मुझे लोगों को झटका देना था’
रानी के लिए ‘मस्तराम’ सिर्फ एक बोल्ड सीक्वेंस नहीं था. यह उनकी इमेज बदलने की सोची-समझी कोशिश थी.
वह साफ कहती हैं कि उन्होंने यह काम किसी मजबूरी में नहीं किया था. वह पूरी तरह सोच-समझकर इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनी थीं.उनका मकसद साफ था- लोगों के दिमाग में बनी ‘अम्मा-भौजी’ वाली रानी की तस्वीर को तोड़ना.
‘मस्तराम’ के बाद उन्हें अलग तरह के प्रोजेक्ट्स भी मिले. बाद में ‘आश्रम’ के ऑफर को ठुकरा कर वहां भी उन्होंने खुद को किसी एक इमेज में बांधने से बचाया.
रानी चटर्जी की कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस बोल्ड सीन को दर्शकों ने सिर्फ सनसनी के तौर पर देखा, रानी उसे अपने करियर की इमेज तोड़ने वाली चाल मानती हैं.
