Pati Patni Aur Woh Do Review: मुदस्सर अज़ीज द्वारा लिखित, निर्देशित और सह-लिखित फिल्म पति, पत्नी और वो 2 एक मजेदार कॉमेडी फिल्म है, जो अपनी अनोखी कहानी और हल्के-फुल्के मनोरंजन से दर्शकों को शुरुआत से अंत तक सीटों से बांधे रखती है. रिश्तों, उलझनों और हंसी से भरपूर यह फिल्म हर पल नए ट्विस्ट के साथ एंटरटेनमेंट का पूरा डोज देने का वादा करती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और तिग्मांशु धूलिया स्टारर इस फिल्म का क्या है रिव्यू और क्यों इसे देखना चाहिए.
कहानी
एक झूठ दूसरे झूठ को जन्म देता है और देखते ही देखते फिल्म का हर किरदार किसी ना किसी मुसीबत में फंस जाता है. कहानी की शुरुआत एक आसान सेटअप से होती है. प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर है, जो अपनी पत्रकार पत्नी अपर्णा पांडे (वामिका गब्बी) के साथ खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रहा होता है.
लेकिन सब कुछ तब गड़बड़ा जाता है, जब वह अपनी कॉलेज जूनियर चंचल कुमारी (सारा अली खान) का नकली बॉयफ्रेंड बनने के लिए तैयार हो जाता है. चंचल ऐसा इसलिए चाहती है ताकि वह अपने असली प्रेमी से मिल सके और नेता गजराज तिवारी (तिग्मांशु धूलिया) के गुस्से से बच सके.
इसके बाद कहानी झूठ, शक, पुलिस के चक्कर, राजनीतिक दबाव और अजीबो-गरीब सफाइयों के जाल में बदल जाती है. वहीं अपर्णा के फैसले हालात को और बिगाड़ देते हैं, और उसकी दोस्त नीलुफर भी इस पूरे पागलपन में फंस जाती है.
कॉमेडी और एंटरटेनमेंट का शानदार तड़का
फिल्म पूरी तरह सिचुएशनल कॉमेडी के अंदाज में बनाई गई है और कई सीन अपनी बेहतरीन टाइमिंग व मजेदार कन्फ्यूजन की वजह से खूब हंसाते हैं. खासकर जब किरदार एक-दूसरे से सच छुपाने की कोशिश करते हैं, तब फिल्म का मनोरंजन और भी बढ़ जाता है.
कहानी में कॉमेडी के साथ मसालेदार ड्रामा भी जोड़ा गया है, जो इसे और ज्यादा मनोरंजक बनाता है. यही वजह है कि फिल्म सिर्फ हल्की-फुल्की हंसी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे समय दर्शकों को बांधे रखती है. ह्यूमर संग एंटरटेनमेंट का यह मिश्रण फिल्म को मजेदार फैमिली एंटरटेनर बनाता है.
सारा अली खान ने जीता दिल, फिल्म की सबसे प्रभावशाली परफॉर्मेंस
सारा अली खान इस फिल्म की सबसे बड़ी सरप्राइज पैकेज बनकर सामने आती हैं. ट्रेलर से इसका अंदाजा नहीं था, लेकिन फिल्म में तीनों हीरोइनों के बीच उनकी परफॉर्मेंस सबसे ज्यादा असर छोड़ती है. वह पहले हाफ को पूरी तरह अपने नाम कर लेती हैं और जब भी स्क्रीन पर आती हैं, फिल्म में नई ऊर्जा भर देती हैं.
सारा ने कॉमेडी, इमोशनल कमजोरी और रिलेटेबल अंदाज का शानदार संतुलन दिखाया है. उनका किरदार मजेदार भी लगता है और जुड़ा हुआ भी महसूस होता है. यही वजह है कि दर्शक उनके हर सीन को एंजॉय करते हैं और जब वह स्क्रीन पर नहीं होतीं तो उनकी कमी महसूस होती है.
आयुष्मान खुराना के साथ उनकी केमिस्ट्री भी बेहद प्यारी लगती है. दोनों साथ में कई सिचुएशनल कॉमेडी और हल्के-फुल्के मजेदार पलों को और खास बना देते हैं.
इस फिल्म में सारा अली खान को देखना पूरी तरह वर्थ है. उन्हें एक कलाकार के तौर पर लगातार निखरते देखना अच्छा लगता है. साफ नजर आता है कि सारा ने बतौर अभिनेत्री काफी ग्रोथ की है और इस मल्टीस्टारर फिल्म में भी वह सबसे अलग और दमदार नजर आती हैं.
आयुष्मान खुराना प्रजापति पांडे के किरदार में पूरी फिल्म को मजबूती देते हैं और अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से हर सीन को मजेदार बना देते हैं. वहीं, वामिका गब्बी अपर्णा पांडे के रोल में बेहद नेचुरल लगती हैं और अपने सहज अभिनय से कहानी को अच्छा संतुलन देती हैं. बात करें तिग्मांशु धूलिया की जो नेता के रोल में शानदार जमे हैं और अपनी दमदार मौजूदगी से हर सीन में असर छोड़ते हैं. जबकि, रकुल प्रीत सिंह भी अपने किरदार में अच्छी लगती हैं और फिल्म के हल्के-फुल्के मनोरंजन को बढ़ाने में अहम योगदान देती हैं. कुल मिलाकर पूरी स्टारकास्ट ने मिलकर फिल्म को एक मजेदार और एंटरटेनिंग अनुभव बना दिया है.
कॉमेडी और नॉस्टैल्जिया का मजेदार तड़का
फिल्म का हास्य और लगातार होने वाली गलतफहमियां उन कॉमेडी फिल्मों की याद दिलाती हैं, जहां एक कन्फ्यूजन दूसरे से टकराता है और आखिर में सब कुछ मजेदार तरीके से एक साथ फट पड़ता है. यंग ऑडियंस को यह अंदाज खास तौर पर पसंद आ सकता है, क्योंकि फिल्म तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है और किरदारों को लगातार मजेदार व अजीब हालातों में डालती रहती है. इस तरह से यह थिएटर में बैठकर देखने का मजा जरूर देती है.
फिल्म की एक और खास बात इसका नॉस्टैल्जिया फैक्टर है. मुदस्सर अज़ीज़ ने यहां 90 के दशक के मशहूर बॉलीवुड गानों का इस्तेमाल किया है, जो कई मौकों पर फिल्म को और मजेदार बना देता है. पुराने पसंदीदा गानों की झलक दर्शकों को एक अपनापन और एंटरटेनमेंट का अलग एहसास देती है.
टेक्निकल पक्ष मजबूत, डायरेक्शन शानदार
मुदस्सर अज़ीज़ ने फिल्म को लिखा, डायरेक्ट किया और रवि कुमार के साथ स्क्रीनप्ले भी तैयार किया है. इस बार उन्होंने कहानी का आइडिया काफी दिलचस्प रखा है. कुछ सीन्स की परिस्थितियां बहुत मजेदार लगती हैं और फिल्म लगातार एंटरटेनमेंट बनाए रखती है. हालांकि कुछ जगह डायलॉग और भी असरदार हो सकते थे, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म का फ्लो अच्छा बना रहता है.
डायरेक्शन के मामले में मुदस्सर अज़ीज़ शानदार काम करते हैं. वह अपने विषय को अच्छी तरह समझते हैं और शुरुआत से आखिर तक हंसी-मजाक का माहौल बनाए रखते हैं. निनाद खानोलकर की एडिटिंग भी तारीफ के लायक है, जो बिना समय गंवाए पांडे परिवार की दुनिया से दर्शकों को जोड़ देती है.
केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड म्यूजिक कई सीन्स में असर बढ़ाता है और मजेदार पलों को भी सपोर्ट करता है. वहीं रेड चिलीज़ का वीएफएक्स खास ध्यान खींचता है. चीता, भेड़िया और हिरण जैसे CGI जानवर काफी रियलिस्टिक नजर आते हैं.
फिल्म के संगीत में कई संगीतकारों ने योगदान दिया है, जिनमें राजेश रोशन, रोचक कोहली, तनिष्क बागची, फहीम अब्दुल्लाह, अरसलान निजामी, नीलकमल, टोनी कक्कड़, लीजो जॉर्ज, बादशाह और देव सडाना शामिल हैं. हमने वहीं लगाया दिल और रूप दी रानी जैसे गाने ज्यादा याद रह जाते हैं, जबकि बाकी गाने कहानी के साथ ठीक बैठते हैं.
फाइनल वर्डिक्ट
आखिर में पति पत्नी और वो 2 एक चमकदार, हल्की-फुल्की और पूरी तरह मनोरंजन से भरी फिल्म बनकर सामने आती है, जो कन्फ्यूजन, रिश्तों के ड्रामे और मजेदार अफरा-तफरी पर टिकी हुई है. फिल्म में कई ऐसे पल हैं जो सच में खूब हंसाते हैं, वहीं सारा अली खान की दमदार परफॉर्मेंस इसे मजबूती देती है. साथ ही सपोर्टिंग किरदार भी फिल्म की रफ्तार बनाए रखते हैं.
कहानी कुछ जगह जानी-पहचानी लग सकती है, लेकिन जब इसे एक हल्की-फुल्की सिचुएशनल कॉमेडी की तरह देखा जाए तो फिल्म ज्यादा मजा देती है. यह ऐसी फिल्म है जिसे ज्यादा गंभीरता से नहीं, बल्कि एंटरटेनमेंट के लिए देखा जाना चाहिए.
अगर आपको शादीशुदा रिश्तों पर बनी मजेदार कहानियां, गलतफहमियां, झूठ और लगातार होने वाला कन्फ्यूजन पसंद है, तो यह फिल्म थिएटर में हंसी और मसालेदार मनोरंजन का अच्छा पैकेज साबित होती है.
