रेटिंग: 3.5
Lust Stories 3 Review: ‘लस्ट स्टोरीज 3’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है और इस बार फिल्म चार बिल्कुल अलग कहानियां लेकर आई है. फिल्म की खास बात ये है कि हर कहानी का अपना अलग अंदाज है. कहीं शादीशुदा रिश्ते में खोया रोमांच वापस लाने की कोशिश है, तो कहीं प्यार, पैसे और ठगी का खेल. एक कहानी शादी टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्ते को दिखाती है, जबकि एक कहानी आपको सीधे 1987 के दौर में ले जाती है. चारों कहानियों का कनेक्शन चाहत और रिश्तों से है, लेकिन इन्हें देखने का तरीका अलग है. आइए जानते हैं कैसी है ‘लस्ट स्टोरीज 3’.
विक्रमादित्य मोटवाने की कहानी में पार्टनर स्वैप का खेल
फिल्म की शुरुआत विक्रमादित्य मोटवाने की कहानी से होती है. इसमें राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी जैसे कलाकार हैं. कहानी एक शादीशुदा कपल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी जिंदगी में खोया हुआ रोमांच वापस लाना चाहता है.
इसके लिए पार्टनर स्वैप का आइडिया सामने आता है. सुनने में ही यह थोड़ा अजीब और असहज लगता है, लेकिन डायरेक्टर ने इसे काफी दिलचस्प तरीके से पेश किया है. कहानी में कोरियन फिक्शन का असर भी देखने को मिलता है. राधिका, कोंकणा, विजय और अभिषेक की एक्टिंग इस पूरे अजीब से लगने वाले आइडिया को पर्दे पर काफी नेचुरल बना देती है.
ये भी पढ़ें: Gandhari Movie Review: आंखों की रोशनी गई, लेकिन बेटी को बचाने का हौसला नहीं, कैसी है तापसी की फिल्म?
किरण राव की कहानी में ड्रग्स, प्यार और ठगी
किरण राव का सेगमेंट बाकी कहानियों से थोड़ा हल्का और मजेदार है. इसमें गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी नजर आते हैं. कहानी में ड्रग्स, पैसे और ठगी का खेल है.
इस हिस्से में आपको एक के बाद एक छोटे-बड़े ट्विस्ट देखने को मिलते हैं. खास बात यह है कि कहानी बेवजह बहुत गंभीर बनने की कोशिश नहीं करती. इसका हल्का अंदाज ही इसे बाकी से अलग बनाता है और कहानी देखते हुए दिलचस्पी बनी रहती है.
शकुन बत्रा ने दिखाई टूटती शादी की कहानी
शकुन बत्रा की कहानी रिश्तों की उस उलझन पर जाती है, जहां दो लोग एक-दूसरे से जुड़े तो हैं, लेकिन साथ रहना मुश्किल हो गया है. इसमें अली फजल और राधिका मदान मुख्य भूमिका में हैं.
कहानी सिर्फ शारीरिक आकर्षण की बात नहीं करती. इसमें तलाक, थेरेपी, परिवार का दबाव और शादी में बढ़ती दूरी जैसे मुद्दे भी हैं. दोनों कलाकारों की बातचीत और उनकी केमिस्ट्री काफी नेचुरल लगती है. कहानी यह दिखाती है कि कभी-कभी दो लोग एक-दूसरे की परवाह करते हुए भी साथ नहीं रह पाते.
विशाल भारद्वाज की कहानी लेकर जाती है 1987 में
चारों कहानियों में सबसे अलग अंदाज विशाल भारद्वाज का है. वह कहानी को सीधे साल 1987 में ले जाते हैं. इसमें अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव नजर आते हैं.
उस दौर में सेक्स एजुकेशन और महिलाओं की इच्छाओं जैसे विषयों पर खुलकर बात करना आसान नहीं था. फिल्म इसी झिझक को कहानी का हिस्सा बनाती है. नक्स वोमिका और बेलाडोना जैसी होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल भी कहानी में अलग तरह का मजा जोड़ता है. यह हिस्सा अपने माहौल और स्टाइल की वजह से बाकी तीनों से काफी अलग महसूस होता है.
चार कहानियां मिलकर कैसी बनती है ‘लस्ट स्टोरीज 3’?
एंथोलॉजी फिल्म में सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि चार कहानियों में से कोई एक कमजोर पड़ जाए और पूरी फिल्म का मजा कम कर दे. लेकिन ‘लस्ट स्टोरीज 3’ में चारों कहानियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं. यही इसकी खासियत भी है.
किसी को एक कहानी ज्यादा पसंद आ सकती है, तो किसी को दूसरी. लेकिन हर सेगमेंट रिश्तों और इंसानी चाहत को अपने तरीके से दिखाता है. फिल्म सिर्फ शारीरिक रिश्तों की बात नहीं करती, बल्कि शादी, अकेलेपन, जिज्ञासा और अपनी इच्छाओं को समझने जैसे मुद्दों को भी सामने रखती है.
देखें या नहीं?
अगर आप वीकेंड पर कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जो आम फिल्मों से थोड़ा अलग हो और मैच्योर कंटेंट पसंद करते हैं, तो ‘लस्ट स्टोरीज 3’ आपके लिए एक ऑप्शन हो सकती है. चार डायरेक्टर्स की चार अलग कहानियां फिल्म को एक जैसा नहीं लगने देतीं.
