madhuri dixit on film maa behen :ओटीटी प्लेफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आगामी 5 जून से फिल्म “मां बहन” स्ट्रीम करने जा रही है. इस थ्रिलर कॉमेडी में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित अलग अंदाज में नजर आनेवाली हैं. ऐसा किरदार उन्होंने अब तक नहीं किया है. इसके लिए वह इस फिल्म के मेकर्स की शुक्रगुजार हैं , जो उन्होंने इस भूमिका में उन्हें फिट पाया. उनकी इस फिल्म और करियर पर उर्मिला कोरी की हुई बातचीत
“मां बहन” फिल्म का शीर्षक है , यह जानने के बाद आपका पहला रिएक्शन क्या था ?
सच कहूं तो जब निर्देशक सुरेश त्रिवेणी इस फिल्म की कहानी सुनाने के लिए आये थे तो और उन्होंने मुझे शीर्षक बताया तो मुझे एक वक़्त को लगा कि वह मज़ाक कर रहे हैं. मैं हंसने भी लगी थी कि ये क्या शीर्षक है मां बहन ,लेकिन वह चुप थे ही थे. तो मुझे समझ आया कि वह सीरियस हैं और यही फिल्म का शीर्षक है. आमतौर को सिंगल मदर को सोसाइटी अलग तरह से जज करती है.अगर वह सोसाइटी के मानकों पर नहीं चलती है.माँ का मतलब परफेक्ट होना नहीं है. यह फिल्म हालत और इंसान के इम्पर्फेक्ट होने का जश्न मानती है. कहानी सुनने के बाद मुझे यह टाइटल परफेक्ट लगा.
क्या माधुरी दीक्षित रियल लाइफ में किसी चीज में इम्पर्फेक्ट हैं ?
बहुत सी चीजों में. दरअसल परफेक्ट कोई नहीं होता है. परफेक्ट बनने की कोशिश में बस हम अपना बेस्ट दे सकते हैं. मैं भी यही करती आयी हूँ और आगे भी यही करुँगी.फिर चाहे डांस हो या मेरी एक्टिंग.इस फिल्म के लिए भी मैंने बहुत मेहनत की है.इस फिल्म के लिए मैंने बॉडी लैंग्वेज से लेकर लैंग्वेज पर भी काम किया.
फिल्म में तृप्ति आपकी बेटी बनी है इस पहलू ने क्या शुरुआत में आपको असहज किया था ?
बिल्कुल भी नहीं क्योंकि मेरा किरदार बहुत ही पावरफुल है.एक एक्टर को और क्या चाहिए. यह फिल्म महिलाओं को अलग तरह से पेश करती है.यहाँ औरतें आइडियलिस्टिक नहीं रिअलिस्टिक हैं.आमतौर पर हमारी फिल्मों में पुरुषों को ऐसा दिखाया जाता है. पहली बार महिलाओं को इस तरह से पेश किया गया है.यह रेखा और उसकी दो बेटियों जया और सुषमा की कहानी है. रेखा सिंगल मदर है. लोगों से डील करने का उसका अपना सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है. वह टिपिकल माँ नहीं है. उसकी फैमिली डिस्फंगक्शनल है. बॉलीवुड की आम माँ बेटी वाली कहानी नहीं है, लेकिन अपनी बेटियों के लिए वह भी कर सकती है. इससे इंकार नहीं है.इस तरह के किरदार में मुझे सोचने के लिए मैं मेकर्स की शुक्रगुजार हूँ.
आप अलग तरह की मां की भूमिका में हैं ,हिंदी सिनेमा में आपकी पसंदीदा मां की भूमिका कौन सी रही है ?
बहुत सारी रही है. नरगिस जी मदर इंडिया में.दीवार में निरुपा रॉय जी या फिर राखी जी का करण अर्जुन में किरदार. मां की कई यादगार भूमिकाओं ने अभिनेत्रियों ने निभाया है.
फिल्मों के बजाय क्या ओटीटी में प्रेशर कम होता है ?
हाँ यह बात सही है क्योंकि फिल्मों में बॉक्स ऑफिस का प्रेशर रहता ही है. आपकी फिल्म ने 100 करोड़ बनाये या नहीं 200 करोड़ बनाये या नहीं. यह जेहन में चलता रहता है लेकिन ओटीटी में यह सब नहीं है. आप सिर्फ अपना प्रोडक्ट बेस्ट बनाना चाहते हैं. उसके बाद कमर्शियल पहलू के बारे में आपको सोचना नहीं पड़ता है.
आपकी इस फिल्म पर आपके बेटों का क्या रिएक्शन है ?
वह मेरी फिल्मों में रूचि लेते हैं. वह अक्सर अपनी सोच मेरा काम देखने के बाद सांझा करते हैं. इस फिल्म में मेरा अंदाज बिलकुल अलग है. वो भी यह मानते हैं. जब रिलीज होगी तो ही वह डिटेल में इसके बारे में बता पाएंगे.उसके बाद ही मैं इसे सांझा कर पाउंगी.
इस फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी की पिछली फिल्म सूबेदार अनिल कपूर को लेकर थी क्या आप चाहती हैं कि आप और अनिल कपूर को लेकर वह अगली फिल्म सोचें ?
क्यों नहीं. सुरेश त्रिवेणी कुछ नया और अलग हमें साथ लाने के लिए सोचें. मैं चाहती हूं कि हमारी जोड़ी को कॉमेडी में एक्सप्लोर हो.
