The Kashmir Files पर जानिए क्या कहा कुणाल खेमू ने...वे खुद भी हैं कश्मीरी पंडित

ज़ी 5 की पॉपुलर वेब सीरीज अभय का तीसरा सीजन जल्द ही दस्तक देने वाला है. एक बार फिर अभिनेता कुणाल खेमू सीरीज में अभय प्रताप सिंह की भूमिका को निभा रहे हैं.

ज़ी 5 की पॉपुलर वेब सीरीज अभय का तीसरा सीजन जल्द ही दस्तक देने वाला है. एक बार फिर अभिनेता कुणाल खेमू सीरीज में अभय प्रताप सिंह की भूमिका को निभा रहे हैं. वे कहते हैं कि मैं बहुत खुश हूं क्योंकि अभय वेब सीरीज अपने तीसरे सीजन में पहुंच चुका है. खुशनसीब खुद को मानता हूं कि एक ऐसे शो से जुड़ने का मौका मिला जहां टाइटल रोल मुझे करने का मौका मिला है. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत

जब अभय आपको पहली बार आफर हुआ था तो आपका क्या रिएक्शन था?

जब मुझे इस सीरीज का आफर मिला था तो मुझे आश्चर्य हुआ था क्योंकि उस वक़्त मेरी कॉमेडी फिल्में ही आ रही थी. मैंने हाथों हाथ इस मौके को ले लिया. मैं चाहता था कि मैं इस मौके को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाऊं. जब उस पहले सीजन को प्यार मिला और हमें पता चला कि एक और सीजन बनाया जाएगा तो आत्मविश्वास और बढ़ा. आज हम सीजन तीन में हैं तो जो हमारे फैंस हैं, उनके साथ साथ नए लोगों को भी यह सीरीज जोड़ें. यह हमारी कोशिश होगी.

कितनी चुनौतियों से भरा यह किरदार आपके लिए रहा है?

यह मेरे लिए बिल्कुल अलग किरदार था. फिल्मों में भी मैंने इस तरह का किरदार नहीं किया था. इस सीरीज के ज़रिए मुझे मौका मिला. लंबे अरसे तक इस किरदार को जीने का. हम दो घंटे की फ़िल्म बनाते हैं. यहां एक सीजन में आठ एपिसोडस होते हैं. बहुत ही यादगार जर्नी रही है. सीजन वन के मुकाबले सीजन थ्री में अभय को परफॉर्म करना ज़्यादा आसान है. सीजन वन में मैं भी समझने की कोशिश कर रहा था. धीरे धीरे इस किरदार को समझा.

क्या बहुत ही डार्क शो है क्या मानसिक तौर पर परेशान भी कर जाता है?

पहले दो जो सीजन्स थे वो सत्य घटनाओं पर आधारित थे. पहले एपिसोडस की शूटिंग करते हुए थोड़ा हैवी मेरे लिए हो गया था कि ये घटना असल लोगों की ज़िंदगी में हुई है. उनके परिवार को बहुत कुछ से गुजरना पड़ा होगा.

जब अभय का पहला सीजन आया था उस ववत ये कांसेप्ट बहुत नया था लेकिन अभी ऐसे कॉन्सेप्ट्स पर बहुत सारे शोज आते रहते हैं?

जो भी दूसरे शोज आ रहे हैं. वे हमसे अच्छे हैं बुरे हैं. इन सब बातों पर मैं ध्यान नहीं देता हूं बल्कि इस बात पर हमारा फोकस होता है कि पिछले सीजन से ये सीजन किस तरह से अलग होगा. बेहतर होगा. हमारी जिम्मेदारी हमसे ज़्यादा है क्योंकि हमने शो का एक टोन सेट कर लिया है. किरदार सेट कर लिया है. हम उससे बाहर नहीं जा सकते हैं. उसी में रहकर हम किस तरह से बेस्ट कर सकते हैं. हमारी कोशिश यही होती है. इस सीजन विजय राज के किरदार से एक नयी दुनिया आयी है. वो अभय के लिए भी नयी दुनिया है. वैसे भी सीजन 2 में कुछ हुक्स छोड़े थे हमने. आगे उनका क्या होता है. वो भी देखने को मिलेगा. काफी ट्विस्ट एंड टर्न हैं. नयी चीजों के साथ महत्वपूर्ण ये भी है कि जो चीज़ें अभय के बारे में लोगों को पसंद थी. वो तो हैं ही. इसके अलावा भी कुछ नया देने की कोशिश की है.

आपके अनुसार अभय की यूएसपी क्या है ,जो यह शो इतना पॉपुलर हुआ?

इस शो की यूएसपी और हाईलाइटस इसके विलेन्स ही रहते हैं. बाकी जो इन्वेस्टिगेशन शो हैं. वे विलेन्स की लाइफ में ज़्यादा नहीं जाते थे. आप क्राइम देखते हैं. यहां आप क्राइम पहले देख लेते हैं. विलेन की मानसिकता क्या है वो बाद में आपको मालूम पड़ती है. विलेन्स भी ऐसे एक्टर्स को चुनते हैं. जो उनकी इमेज से मेल नहीं खाते हैं. इस सीरीज ने मेरी इमेज के अपोजिट ध्यान में रखकर मुझे अभय आफर किया था. दीपक तिजोरी,चंकी पांडे, राम कपूर की इमेज से बिल्कुल ही अलग किरदार उन्हें दिए गए और उन्होंने उसे बखूबी निभाए. उसी चीज़ को आगे बढ़ाते हुए इस सीजन में दिव्या अग्रवाल,तनुज विरवानी,राहुल देव और फिर विजय राज जी भी हैं. विजय राज जी को इस तरह के किरदार में उन्हें नहीं देखा गया. उनकी ज़्यादातर इमेज कॉमेडी की है. इस सीजन उनका अलग रूप देखेंगे.

एक ही किरदार को बार बार निभाना क्या बोरिंग नहीं होता है?

बोर होने का डर लगता है लेकिन पूरी टीम ये जानती हैं कि हम एक किरदार सेट करने वाले हैं. हो सकता है एक सीजन करें. दो सीजन करे. दस सीजन करे. लिखाई ऐसी की जाती है कि हम इस इंसान के साथ क्या क्या कर सकते हैं दायरों में रहकर भी. मुझे निजी तौर पर बहुत उत्साह होता है जब मुझे मालूम पड़ता है कि नया सीजन होने वाला है क्योंकि अभय किरदार वही होता है लेकिन उसकी दुनिया बदल जाती है.

क्या ओटीटी में आप सोलो हीरो प्रोजेक्ट्स ही करना चाहेंगे?

कहानियां किरदारों की होती है. कभी वो एक की हो सकती है. कभी दो भाइयों की. कभी पांच दोस्तों की. गोलमाल पांचों भाइयों की कहानी है. अगर मैं ये सब सोचता तो कलंक जैसी फ़िल्म नहीं करता. मुझे किरदारों से लगाव है. किरदारों का कहानी में क्या योगदान है ये देखता हूं.

ओटीटी के फायदे तो बहुत हैं लेकिन नुकसान क्या आपको दिखते हैं?

सभी ओटीटी के रेस में शामिल होते जा रहे हैं. नए नए प्लेटफॉर्म्स आ रहे हैं पता नहीं कि क्वालिटी चेक कितना रहेगा. इसका डर है.

आपके आनेवाले प्रोजेक्ट्स?

एक मक्खीचूस फ़िल्म खत्म की है. एक और वेब सीरीज़ की है लेकिन उसके बारे में बात नहीं कर पाऊंगा.

आप कश्मीरी पंडित हैं, इनदिनों फ़िल्म द कश्मीर फाइल्स चर्चा में है आपकी फ़िल्म पर क्या राय है?

मैं कश्मीर फाइल्स देखना चाहता हूं लेकिन नहीं देख पाया. अभय के सिलसिले में थोड़ा बिजी था इसके अलावा देश से बाहर भी था. मैं उसे देखने के बाद ही अपनी राय दे पाऊंगा. अभी मैं जो भी कहूंगा वो सुनी सुनायी ,पढ़ी पढ़ाई बातें होगी. यह मुद्दा संवेदनशील है और मैं खुद भी कश्मीरी पंडित हूं तो मैं बिना देखें इस पर अपनी राय नहीं दे सकता हूं. हां खुशी है कि इस बात पर चर्चा हो रही है. कश्मीरी पंडितों के दर्द पर लोगों का ध्यान गया.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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