हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में जब भी शानदार कॉमेडी और बेहतरीन अभिनय की बात होती है, तो अभिनेता केष्टो मुखर्जी का नाम जरूर याद किया जाता है. पर्दे पर शराबी के किरदार को अपनी अलग पहचान देने वाले केष्टो मुखर्जी की आज 100वीं जयंती है. उनके बोलने का खास अंदाज, लड़खड़ाती चाल और चेहरे के मजेदार भाव दर्शकों को खूब हंसाते थे. लेकिन लोगों को हंसाने वाले इस बेहतरीन कलाकार की असली जिंदगी संघर्षों से भरी रही थी.
कोलकाता के थिएटर से मुंबई तक का सफर
केष्टो मुखर्जी का जन्म 7 अगस्त 1925 को कोलकाता में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कोलकाता के थिएटर से की. अपने सपनों को पूरा करने के लिए जब वे मुंबई आए, तो उनके लिए यह सफर आसान sनहीं था. शुरुआती दिनों में उन्हें रहने और गुजारा करने तक के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने हुनर पर भरोसा रखा.
1957 में बॉलीवुड में रखा कदम
कई मुश्किलों के बाद साल 1957 में फिल्म 'मुसाफिर' से केष्टो मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अपने लंबे करियर में उन्होंने 90 से ज्यादा हिंदी और बंगाली फिल्मों में काम किया. 'खूबसूरत', 'जंजीर', 'शोले' और 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्मों में उनके छोटे किरदार भी दर्शकों के दिलों में बस गए. फिल्म 'खूबसूरत' में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया.
शराबी के किरदार ने दिलाई खास पहचान
केष्टो मुखर्जी की सबसे खास बात यह थी कि असल जिंदगी में वे शराब नहीं पीते थे, लेकिन पर्दे पर शराबी का किरदार इतनी शानदार तरीके से निभाते थे कि लोग हैरान रह जाते थे. उनकी यही पहचान धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई. हालांकि, इसके कारण उन्हें कई बार एक जैसे किरदार मिलने लगे. फिर भी उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग कॉमेडी और अंदाज से जान डाल दी.
हमेशा याद किए जाएंगे केष्टो मुखर्जी
2 मार्च 1982 को केष्टो मुखर्जी का निधन हो गया. लेकिन उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. भारतीय सिनेमा के बेहतरीन कॉमेडियन की बात होगी, तो केष्टो मुखर्जी का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा.
