सिनेमा से सत्ता तक: साउथ के सुपरस्टार्स का राजनीति से इतना गहरा रिश्ता क्यों है?,जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स...

तमिल सुपरस्टार धनुष के एक भाषण ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। फैंस अब उन्हें राजनीति में सक्रिय होने की उम्मीद कर रहे हैं। दक्षिण भारत में कई ऐसे सितारे हैं जिन्होंने फिल्मी दुनिया से निकलकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई है।

तमिल सुपरस्टार धनुष इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने एक भाषण को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक रक्तदान शिविर के दौरान उन्होंने अपने फैन क्लबों से समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की। उनके इस संबोधन के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या धनुष भी तमिल सुपरस्टार विजय की राह पर चलते हुए राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, अभिनेता ने अब तक राजनीति में आने या किसी राजनीतिक दल के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

वैसे भी साउथ में फिल्मों से राजनीति तक का सफर कोई नया नहीं है। एमजीआर, जयललिता, एनटी रामाराव, चिरंजीवी, पवन कल्याण, कमल हासन, विजयकांत और अब विजय जैसे कई बड़े सितारे राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या फिल्मी लोकप्रियता राजनीतिक सफलता की गारंटी होती है? और क्या राजनीति में आने से किसी अभिनेता की फिल्मों पर असर पड़ता है?

साउथ में सिनेमा और राजनीति का गहरा रिश्ता

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव दशकों पुराना रहा है। एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) ने 1972 में AIADMK की स्थापना कर तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया और मुख्यमंत्री बने। उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री जे. जयललिता भी AIADMK की प्रमुख नेता बनीं और कई बार राज्य की मुख्यमंत्री रहीं। वहीं आंध्र प्रदेश में अभिनेता एन.टी. रामाराव (एनटीआर) ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) बनाकर क्षेत्रीय राजनीति में नई पहचान बनाई। इसके बाद चिरंजीवी ने प्रजा राज्यम पार्टी (PRP), पवन कल्याण ने जन सेना पार्टी,कमल हासन ने मक्कल नीधि मय्यम (MNM) और विजयकांत ने DMDK के जरिए राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। हाल के वर्षों में अभिनेता विजय ने 2024 में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) बनाकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। अब धनुष के सामाजिक भाषण के बाद उनका नाम भी संभावित अभिनेता-नेताओं की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि उन्होंने अभी तक राजनीति में आने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

क्या राजनीति का असर फिल्मों पर पड़ता है?

फिल्म ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा का मानना है कि किसी अभिनेता की राजनीतिक पारी का उसकी फिल्मों की लोकप्रियता पर सीधा असर नहीं पड़ता। उनके मुताबिक,"किसी भी अभिनेता का निजी जीवन या राजनीतिक पृष्ठभूमि फिल्मी पर्दे पर ज्यादा मायने नहीं रखती। अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं, लेकिन उनका राजनीतिक करियर सफल नहीं रहा। इसके बावजूद उनकी स्टारडम पर कभी असर नहीं पड़ा। इसी तरह किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा से जुड़ने के बाद भी दर्शकों या फैंस का प्यार कम नहीं होता। दर्शक अपने पसंदीदा अभिनेता को पर्दे पर हीरो के रूप में ही देखते हैं, चाहे वह राजनीति में सफल हो या असफल।"

'दक्षिण में राजनीति और सिनेमा का रिश्ता दामन-चोली जैसा'

वरिष्ठ फिल्म समीक्षक सुभाष के झा का कहना है कि दक्षिण भारत में फिल्मों और राजनीति का संबंध बेहद पुराना है, लेकिन दोनों की सफलता को एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उनके शब्दों में,"दक्षिण भारत में राजनीति और फिल्मी सितारों का रिश्ता दामन-चोली जैसा रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बड़ा अभिनेता सफल राजनेता भी होगा। एक साधारण अभिनेता बेहतरीन नेता बन सकता है, जबकि कोई सुपरस्टार राजनीति में सफल न हो। एनटी रामाराव की जगह आज तक कोई नहीं ले पाया। अब वैसी राजनीतिक क्षमता कुछ हद तक विजय में दिखाई देती है। दिलचस्प बात यह है कि एनटीआर की राजनीतिक विचारधारा कभी उनकी फिल्मों में हावी नहीं हुई। वे एक शानदार अभिनेता भी रहे और एक सफल नेता भी। इसलिए मुझे नहीं लगता कि किसी अभिनेता के राजनीति में आने से उसकी फिल्मों की फुटफॉल पर सीधा असर पड़ता है। आखिरकार फैसला जनता और दर्शकों के हाथ में होता है।"

दक्षिण भारत में सिनेमा और राजनीति का रिश्ता सिर्फ लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा,बल्कि कई सितारों ने इसे जनसेवा और नेतृत्व के मंच के रूप में इस्तेमाल किया है। हालांकि इतिहास यह भी बताता है कि फिल्मी स्टारडम राजनीति में सफलता की गारंटी नहीं होती। एमजीआर और एनटीआर जैसे सितारों ने जहां इतिहास रचा, वहीं कई कलाकारों को राजनीतिक सफर में संघर्ष करना पड़ा। आखिरकार किसी अभिनेता की राजनीतिक पारी का फैसला उसकी लोकप्रियता नहीं, बल्कि जनता का भरोसा और समर्थन करता है।


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By नेहा वर्मा

Neha Verma is an entertainment journalist with over 11 years of experience in Bollywood and digital journalism. She has worked with leading media brands including Aaj Tak, Navbharat Times and Dainik Jagran, reporting on celebrities, films, television and the wider entertainment industry. Known for her exclusive stories and breaking news coverage, she has worked in both Delhi and Mumbai. She currently heads the Entertainment section at Prabhat Khabar Digital.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >